खनन से सर्वाधिक प्रभावित आदिवासी विकास से वंचित

Updated at : 06 Aug 2018 12:19 AM (IST)
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खनन से सर्वाधिक प्रभावित आदिवासी विकास से वंचित

आसनसोल : रानीगंज कोयलांचल में भूमिगत आग और भू-धंसान से प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को पुनर्वासित करने, खुली कोयला खदानों (ओसीपी) के कारण उजड़ रहे गांवों के निवासियों के पुनर्वास, बन्द ओसीपी की भराई कर पुनः उसे खेती व रहने योग्य बनाने सहित आठ सूत्री मांगों के समर्थन में कोयलांचल बचाओ मंच ने स्थानीय गुजराती […]

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आसनसोल : रानीगंज कोयलांचल में भूमिगत आग और भू-धंसान से प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को पुनर्वासित करने, खुली कोयला खदानों (ओसीपी) के कारण उजड़ रहे गांवों के निवासियों के पुनर्वास, बन्द ओसीपी की भराई कर पुनः उसे खेती व रहने योग्य बनाने सहित आठ सूत्री मांगों के समर्थन में कोयलांचल बचाओ मंच ने स्थानीय गुजराती भवन में रविवार को जन कन्वेंशन आयोजित किया.
दस जनसंगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने भी भागीदारी की. उनकी मांगों को लेकर जन आंदोलन विकसित करने का समर्थन किया. महाराष्ट्र से आये तथा ओसीपी के विरोध में राष्ट्रीय स्तर पर जन आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता लाल सू सोमा नगटी, दिल्ली से आये न्यू ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव (एनटीयूआई) के सचिव गौतम मोदी, पूर्व सांसद सह भाकपा के जिला सचिव आरसी सिंह, लेखिका जया मित्रा, रानीगंज सिटीजन फोरम के गौतम घटक, एलायंस फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स की सुजाता भट्ट के साथ सामाजिक संगठन अधिकार की सचिव सुदीप्ता पाल, इसीएल ठेका श्रमिक अधिकार यूनियन के अध्यक्ष दुगायी मुर्मू, दिसम आदिवासी जुमीत गावता के रामदास, रवि हेम्ब्रम, ऑल वेस्ट बंगाल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव यूनियन के प्रदीप राय, गौतम मंडल, दलित व संख्या लघु मंच के सपन दास, गण अधिकार मंच दुर्गापुर के इंद्रजीत मुखर्जी, एनटीयूआई के शैलेन भट्टाचार्या आदि उपस्थित थे.
श्री नगटी ने कहा कि पहाड़ और जंगल को आदिवासी भगवान के रूप में पूजते है. यही पहाड़ और वन को नष्ट कर ओसीपी बनाकर भूमिगत खनिज का दोहन हो रहा है. माईनिंग से सबसे ज्यादा प्रभावित आदिवासी समाज हुआ है. लेकिन उसे इस खनन से कोई लाभ नहीं हुआ.
उन्होंने कहा कि पर्यावरण के दृष्टिकोण से ओसीपी सबसे ज्यादा
खतरनाक है. पूर्व सांसद श्री सिंह ने कहा कि देश मे आपातकाल की स्थिति बन गयी है. केंद्र सरकार भूमिगत सभी खदानों को बंद कर ओसीपी बनाने के दिशा में आगे बढ़ रही है. श्रमिक हित को नजरअंदाज कर खदानों को निजी हाथों में सौपा जा रहा है. निजी मालिकाने में सिर्फ मुनाफा ही देखा जा रहा है. आम जनता को क्या नुकसान हो रहा है, पर्यावरण की कितनी क्षति हो रही है, इसकी कोई परवाह नहीं की जा रही है.
कन्वेशन में इंद्रजीत मुखर्जी और सुरेंद्र कुमार ने हिंदी व बांग्ला में आठ सूत्री प्रस्ताव का पाठ किया. लेखिका जया मित्रा ने समर्थन किया.
आठ सूत्री प्रस्ताव हुए पारित
कन्वेंशन में पारित आठ सूत्री प्रस्ताव में भूमिगत आग व भू- धंसान प्रभावित इलाके के लोगो को तत्काल पुनर्वासित करने, उन्हें रोजगार मुहैया कराना, ओसीपी से होने वाले नुकसान से सभी को अवगत कराने व ओसीपी के लिए गांव के पुनर्वास का विरोध करना, भूमिगत खदान के बंदी के विरोध में आंदोलन विकसित करने, गांव व बस्ती के पास ओसीपी बनाना और ओसीपी के विस्तारीकरण के लिए गांव को हटाने का विरोध करने, ओसीपी के लिए कंपनी ने प्लानिंग में कम आवादी बताकर प्राप्त की गयी मंजूरी के विरोध कर उसे रद्द कराने, परित्यक्त खदानों की भराई कर उसे कृषि और रहने योग्य बनाने, अबैध कोयला खदान व कोयला चोरी को बंद करने और भूमिगत खदान को बंद कर ओसीपी बनने से लोगों का रोजगार छीन जाने के विरोध में जनआंदोलन विकसित करने के प्रस्ताव शामिल है.
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