भूमि अधिग्रहण विवाद में फंसे कई प्रोजेक्ट

Updated at : 17 Jul 2018 1:19 AM (IST)
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भूमि अधिग्रहण विवाद में फंसे कई प्रोजेक्ट

सांकतोड़िया : कोल इंडिया लिमिटेड ने (सीआइएल) वर्ष 2020 तक एक अरब टन कोयला उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसी आधार पर काम करने का निर्देश सभी आनुषांगिक कोयला कंपनियों को दिया गया है. ईसीएल को भी 62 मिलियन टन उत्पादन करने का लक्ष्य दिया गया है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उत्पादन […]

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सांकतोड़िया : कोल इंडिया लिमिटेड ने (सीआइएल) वर्ष 2020 तक एक अरब टन कोयला उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसी आधार पर काम करने का निर्देश सभी आनुषांगिक कोयला कंपनियों को दिया गया है. ईसीएल को भी 62 मिलियन टन उत्पादन करने का लक्ष्य दिया गया है.
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उत्पादन में बढ़ोतरी करने के लिए कोल इंडिया ने चालू वितीय वर्ष में कैपिटल बजट के रूप में 95 सौ करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है. कोयला मंत्रालय से इसकी मंजूरी मिल गई है. उन्होने कहा कि पिछले दिनो दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कोल इंडिया प्रबंधन ने आधारभूत संरचना पर होनेवाली खर्च पर रिपोर्ट पेश की थी. जमीन अधिग्रहण, एचइएमएम (हैवी अर्थ मूवर मशीन) व परियोजना विस्तार जैसे अहम काम इस रकम से किये जायेंगे. वित्तीय वर्ष 2017 -18 में कोल इंडिया का उत्पादन लक्ष्य 60 करोड़ टन है. वर्ष 2020 तक इसे बढ़ाकर एक अरब टन उत्पादन करना है.
ईसीएल सूत्रों ने बताया कि चालू वितीय वर्ष में ईसीएल को 1050 करोड़ रुपये कैपिटल बजट में आवंटित किये गये हैं. किस मद में कितना खर्च करना है, इसका प्रस्ताव प्रोजेक्ट एंड प्लानिंग विभाग ने बोर्ड में भेज दिया है. बोर्ड की मंजूरी के बाद रकम विभाग को दे दी जायेगी. पर्यावरणीय स्वीकृति में विलम्ब और अन्य कारणों से कोल इंडिया के चार दर्जन परियोजनाएं अपने उत्पादन लक्ष्य से पीछे चल रही है.
सूत्रों ने बताया कि कोल इंडिया ने कोयला खदानों के साथ ही अब विदेशों में धातु की खदानें लेने का मन बनाया है. इस परियोजनाओ के लिए संबंधित पक्षों से बातचीत शुरू की गई है. लौह अयस्क, बॉक्साइट और मैगजीन के खनन की कोल इंडिया तैयारी कर रही है. अभी के समय में सबसे बड़ी समस्या जमीन की है जमीन अधिग्रहण करने में कोल इंडिया को सबसे बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
जमीन अधिग्रहण की समस्या को लेकर ईसीएल सहित कोल इंडिया के अन्य आनुषंगिक कंपनियों में कई प्रोजेक्ट अधर में लटके हुए है. प्रबंधन ने जमीन अधिग्रहण करने एवं मशीन खरीदने के लिए प्रयासरत है ताकी दिए गए उत्पादन लक्ष्य आसानी से पा सके.
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