हमें, हमारी भावी पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा पर्यावरण असंतुलन का खामियाजा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Jun 2018 4:54 AM
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दुर्गापुर : विश्व पर्यावरण दिवस के मद्देनजर शहर के सिटी सेंटर इलाका स्थित ट्रोयका पार्क परिसर में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के उदेश्य से विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्रदूषण नियंत्रण परिषद ने कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली बच्चों को लेकर जागरूकता रैली निकाल कर की. रैली में शामिल बच्चे अपने हाथो में बैनर […]
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दुर्गापुर : विश्व पर्यावरण दिवस के मद्देनजर शहर के सिटी सेंटर इलाका स्थित ट्रोयका पार्क परिसर में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के उदेश्य से विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्रदूषण नियंत्रण परिषद ने कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली बच्चों को लेकर जागरूकता रैली निकाल कर की. रैली में शामिल बच्चे अपने हाथो में बैनर लेकर लोगों को पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे थे.
मौके पर मेयर दिलीप अगस्ती, महकमा शासक शंख सतारा,सीएमईआरआई के वैज्ञानिक बी रूज, डीएफओ मृणाल कांति मंडल, दुर्गापुर नगर निगम के एमआईसी प्रभात चटर्जी, प्रदूषण विभाग के अधिकारी अंजन फौजदार तथा दुर्गापुर चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स के सचिव भोला भगत आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे. पूरे सिटी सेंटर इलाके की परिक्रमा करने के बाद कार्यक्रम स्थल पर पहुंच कर शेष हुई. वहां प्रत्येक को कई तरह के वृक्ष प्रदान किये गये.
इस मौके पर महकमा शासक शंख सतारा ने कहा कि शहरों का वातावरण तेजी से प्रदूषित होता जा रहा है. हमें उसे और अधिक प्रदूषित होने से बचाने के लिये प्रयास करना होगा. विश्व पर्यावरण दिवस पर आमजन को भागीदार बना कर उन्हे इस बात का अहसास करवाना होगा कि बिगड़ते पर्यावरण असंतुलन का खामियाजा हमें व हमारी आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ेगा. इसलिये हमें अभी से पर्यावरण को लेकर सतर्क व सजग होने की जरूरत है. हमें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में तेजी से काम करना होगा.
आज दुनिया में सबसे ज्यादा पर्यावरण को प्लास्टिक नुकसान पहुंचा रहा है. प्लास्टिक से बनी थैलियों को खाने से प्रतिवर्ष लाखों पशु मौत के मुंह में समा जाते हैं. पहले लोग बाजार से सामान खरीदने जाते तो घर से कपड़े या जूट से बना थैला साथ लेकर जाते थे. पुराने समय में पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिये पेड़ लगाने पर सबसे अधिक जोर रहता था. पेड़ों को देवता के समान दर्जा दिया जाता था, ताकि उन्हे कटने से बचाया जा सके. बंगाल में तो आज भी दैनिक उपयोग में प्लास्टिक के बजाय मिट्टी से बने बर्तनों का अधिक उपयोग होता है.
इससे पर्यावरण भी नहीं बिगड़ता है, साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिलता है. प्लास्टिक से बना सामान जल्दी नष्ट नहीं होता है जिससे उत्पन्न प्रदूषण का खामियाजा पशु, पक्षी, मनुष्य सहित पूरी पृथ्वी को उठाना पड़ता है. पर्यावरण को बचाने के लिए प्लास्टिक का उपयोग करने से बचना होगा, थरमाकोल से बने ग्लास प्लेट का इस्तेमाल करना नही चलेगा क्योंकि प्लास्टिक और थरमाकोल से बने चीजों का इस्तेमाल शरीर के लिए हानिकारक होता ही है साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है.
इसलिए इन चीजों का इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है. प्लास्टिक और थरमाकोल सेे बनी चीजो के बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है. मेयर दिलीप अगस्ती ने कहा कि सभी को अपने घरों में वृक्षारोपण कर शहर को क्लीन और ग्रीन बनाने का संकल्प लेना चाहिए. आने वाले समय में नगर निगम इलाके में तीन लाख पेड़ ओर लगाने का संकल्प लिया गया है. मौके पर पर्यावरण को लेकर चित्रांकन प्रतियोगिता आयोजित की गयी. इसमें सैकड़ों बच्चों ने हिस्सा लिया. विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया.
डीएसटीपीएस, डीवीसी में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया (बॉक्स)
दुर्गापुर. डीएसटीपीएस, डीवीसी में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया, जो हरित ऊर्जा की ओर संस्थान की प्रतिबद्धता को चिन्हित करता है. इस अवसर पर विश्व पर्यावरण दिवस का पालन करने के लिए आयोजित विभिन्न गतिविधियों में वृक्षारोपण शामिल था. इसमें डीएसटीपीएस के मुख्य अभियंता सह परियोजना प्रधान सीएस त्रिपाठी के साथ मुख्य अभियंता (ओएंडएम) एमदेव दास के अलावा डीएसटीपीएस के विभिन्न विभागों के प्रमुख और सीआईएसएफ के उप कमांडेंट आदि मौजूद थे.
इस साल पर्यावरण के ‘बीट प्लास्टिक प्रदूषण’ विषय का समर्थन करने के लिए परिसर में सामान्य स्थानों पर पोस्टर लगाया गया था. मौके पर उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे (डब्ल्यूईडी) 2018 का विषय "बीट प्लास्टिक प्रदूषण" के लिए हम सभी को हमारे समय की महान पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक का मुकाबला करने के लिए एक साथ आने के लिए कार्रवाई करने का आह्वान है.
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