बाहरी स्वच्छता के साथ-साथ आंतरिक स्वच्छता भी बेहद जरूरी: चंद्रशेखर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Jun 2018 3:20 AM

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दुर्गापुर : बाहरी स्वच्छता के साथ आंतरिक स्वच्छता भी जरूरी है. इससे ही परिवार, समाज व राष्ट्र का परिष्कृत, सुसंस्कृत व सर्वांगीण विकास होगा. हमारी सभ्यता, गौरवशाली परंपरा से स्वच्छता की शिक्षा मिलती है. देश में जितने भी तीज, त्यौहार, पर्व व उत्सव मनाए जाते हैं, उसमें स्वच्छता का स्थान होता है. दीपावली, दुर्गापूजा, छठ, […]

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दुर्गापुर : बाहरी स्वच्छता के साथ आंतरिक स्वच्छता भी जरूरी है. इससे ही परिवार, समाज व राष्ट्र का परिष्कृत, सुसंस्कृत व सर्वांगीण विकास होगा. हमारी सभ्यता, गौरवशाली परंपरा से स्वच्छता की शिक्षा मिलती है. देश में जितने भी तीज, त्यौहार, पर्व व उत्सव मनाए जाते हैं, उसमें स्वच्छता का स्थान होता है.
दीपावली, दुर्गापूजा, छठ, होली, रमजान आदि विभिन्न त्योहारों की शुरूआत स्वच्छता से ही होती है. डीएसटीपीएस, डीवीसी के नव पदस्थापित परियोजना प्रधान चंद्र शेखर त्रिपाठी ने ये बातें परियोजना द्वारा आयोजित स्वच्छता पखवाड़े के समापन समारोह में कहीं.
श्री त्रिपाठी ने मौके पर पखवाड़ा के दौरान आयोजित चित्रांकन प्रतियोगिता में भाग लेने वाले स्कूली छात्रों, परियोजना के अधिकारियों एवं अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग व पर्यावरण प्रदूषण के चरम पराकाष्ठा पर पहुंच चुका है. भीषण गर्मी, जल संकट इसका परिणाम है. यदि समय रहते प्राकृति हितैषी उपाय नहीं करते हैं तो आने वाली भावी पीढ़ी हमें कोसेगी. आज गर्मियों में तापमान 48 डिग्री है, आने वाले वर्षों में पारा 50 से 60 डिग्री होगा.
अतएव हमें मशीनीकरण के साथ पर्यावरण हितैषी ठोस कदम उठाने होंगे. इसके लिए जहां अधिक से अधिक पौधारोपण कर उसकी समुचित देखभाल करना होगा, वही कम से कम कार्बन जैसी विषाक्त गैस का उत्सर्जन करना होगा. उन्होंने आगे कहा कि स्वच्छता में ईश्वर का वास होता है. बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने में अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर ध्यानाकर्षण कराते हुए परियोजना प्रधान श्री त्रिपाठी ने कहा कि आज पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने की होड़ में अपने गौरवशाली परंपरा व संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं.
पश्चिमी देश हमारी संस्कृति को अपनाकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. संयुक्त परिवार की परंपरा, संस्कृति का स्थान टीवी व मोबाइल ने ले लिया. एकल परिवार की संकीर्ण सोच का दुष्प्रभाव खुलेआम दिख रहा है. समाज में अब संस्कृति व कुरीतियों का व्यापक प्रभाव दिख रहा है. उन्होंने यह आग्रह किया कि स्वच्छता को दिवस सप्ताह व पखवाड़ा में न समेट उसे जीवन व दिनचर्या में धारण करें. मौके पर परियोजना के मुख्य अभियंता (प्र0 वअनु0) मानवेंद्र देवदास ने स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर ध्यानाकर्षण कराया व वायु-जल जनित बीमारियों से बचाव हेतु स्वच्छता को अनिवार्य बताया.
कार्यक्रम का कुशल संयोजन करते हुए वरिष्ठ प्रबंधक (सीएसआर) संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि पखवाड़े के दौरान स्थानीय ग्रामों, संयंत्र परिसर व कार्यालय में स्वच्छता व जागरूकता पर बहुआयामी कार्यक्रम आयोजित किये गये. मौके पर स्कूली बच्चों द्वारा चित्रांकन प्रतियोगिता के दौरान उकेरे गये चित्रों को प्रदर्शित किया गया.
इस अवसर पर प्रतियोगिता के विजेताओं व प्रतिभागियों को पदाधिकारियों द्वारा पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया गया. समारोह के दौरान परियोजना के उप महाप्रबंधक (प्र0) संदीप भट्टाचार्य, वरिष्ठ प्रबंधक (वित्त) सुरेंद्र प्रसाद, अपर निदेशक (मानव संसाधन) प्रमोद कुमार, अधीक्षण अभियंता रोशन लकड़ा, प्रबंधक (मानव संसाधन) राकेश शर्मा, लक्ष्मण कुमार नायक समेत बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद थे.
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