इसीएल मुख्यालय के गेट पर शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

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बिना किसी पूर्व सूचना के स्कूल बंदी से बनी भुखमरी की स्थिति सीआइएल के सर्वे में 44 स्कूलों में मौजूद नहीं था एक भी छात्र सांकतोड़िया. इसीएल के स्तर से संचालित 44 स्कूलों को बंद किये जाने के विरोध में शुक्रवार को इसीएल मुख्यालय गेट के समक्ष कोयला खदान शिक्षक मोर्चा ने विरोध प्रदर्शन किया […]

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बिना किसी पूर्व सूचना के स्कूल बंदी से बनी भुखमरी की स्थिति
सीआइएल के सर्वे में 44 स्कूलों में मौजूद नहीं था एक भी छात्र
सांकतोड़िया. इसीएल के स्तर से संचालित 44 स्कूलों को बंद किये जाने के विरोध में शुक्रवार को इसीएल मुख्यालय गेट के समक्ष कोयला खदान शिक्षक मोर्चा ने विरोध प्रदर्शन किया एवं धरना दिया.
इसी बीच शिष्टमंडल ने प्रवंधन को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. प्रवंधन ने इस पर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया. इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ. मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष डी मिश्र, इसीएल शाखा के अध्यक्ष संजय चौधरी, सचिव एचके पांडेय, ऋ षि मुनि तिवारी, विनय कुमार सिंह, जेपी वर्मा, आरपी राम आदि ने नेतृत्व किया. केंद्रीय अध्यक्ष श्री मिश्र एवं सचिव श्री पांडेय ने बताया कि पूरे इसीएल में अनुदान के आधार पर 162 विद्यालयों का संचालन होता है.
कंपनी प्रवंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना के 44 स्कूलों को बंद कर दिया. इनमें कार्यरत शिक्षक व उनके परिजनों के सामने भूखे मररने की स्थिति आ गयी है. उनके पास कोई विकल्प नहीं है. उचित मांग के समाधान के लिए प्रवंधन के पास आये हैं. उन्होंने कहा कि मांग मांगने के दौरान शिक्षकों पर प्रबंधन ने पुलिस द्वारा पिछले वर्ष मार्च में लाठियां चटकायी थीं. शिक्षकों की उम्र लाठी खाने की नहीं रह गयी है.
प्रबंधन ने फासला लिया था कि सोवाकत शिक्षकों को एकमुश्त पांच लाख रु पये का भुगतान कितया जायेगा परन्तु वह भी किसी को नहीं मिला. उन्होंने कहा कि अनुदान के रूप में तीन प्रकार से शिक्षकों को पैसा मिलता है. जो शिक्षक माध्यमिक हैं, उन्हें प्रतिमाह पांच हजार, जो ग्रेजुएशन हैं, उनको साढ़े पांच हजार तथा जो बीएड हैं, उन्हें सात हजार रूपये महीना मिलते हैं. उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए मिड डे मील योजना शुरू की गयी थी.
सीएमडी के तकनीकी सचिव नीलाद्रि राय ने कहा कि कंपनी के तहत 162 स्कुल संचालित है. जिसमें 610 शिक्षक कार्यरत हैं. इन्हे अनुदान के रूप में कंपनी सालाना 3.73 करोड़ रु पये खर्च करती है. उन्होंने कहा की कोल इंडिया द्वारा टेरी की टीम को इन स्कूलों के निरीक्षण के लिए भेजा गया था.
टीम के सदस्यों ने इन स्कूलों का निरीक्षण किया जिसमे 44 स्कूलों में एक भी स्टूडेंट्स नहीं मिला. उनकी उपस्थिति सिर्फ रजिस्टर में ही थी. कुछ स्कूलों में दो चार बच्चे है और रजिस्टर में संख्या काफी अधिक थी. सारी रिपोर्ट संस्था ने कोल इंडिया प्रबंधन को सौंपा. रिपोर्ट की समीक्षा के बाद कोल इंडिया प्रबंधन ने 44 स्कूलों को बंद करने का निर्देश जारी किया है. उस आदेश का पालन करते हुए ऐसा निर्णय लिया गया है.
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