बेटे के अत्याचार से मां-बाप ने छोड़ा घर जज बोले : बेटे को घर में रहने का हक नहीं
Updated at : 08 Sep 2018 2:18 AM (IST)
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कोलकाता : बेटे व बहु के अत्याचार से मां-बाप के घर छोड़ने के मामले पर हाइकोर्ट में न्यायाधीश नादिरा पाथेरिया की अदालत ने का कि ऐसे बेटे को घर में रहने का कोई अधिकार नहीं है. अगले तीन हफ्ते में बेटे व बहु को घर छोड़कर अन्य जगह किराये के घर में रहने का निर्देश […]
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कोलकाता : बेटे व बहु के अत्याचार से मां-बाप के घर छोड़ने के मामले पर हाइकोर्ट में न्यायाधीश नादिरा पाथेरिया की अदालत ने का कि ऐसे बेटे को घर में रहने का कोई अधिकार नहीं है. अगले तीन हफ्ते में बेटे व बहु को घर छोड़कर अन्य जगह किराये के घर में रहने का निर्देश अदालत ने दिया है. मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते के बाद होगी.
मामले की सुनवाई में भरी अदालत में न्यायाधीश ने उससे पूछा कि वह क्या करता है. इसपर उसने कहा कि वह एक प्राइवेट ट्यूटर है. एमए पास करने के बाद भी नौकरी नहीं मिली. इसपर न्यायाधीश ने कहा कि वह कैसे शिक्षक हैं? माता-पिता पर अत्याचार करते हैं. उन्हें क्या उनके विद्यार्थी पीटते नहीं हैं? बेटे की बॉडी लैंग्वेज ही कह रही है कि वह कितने गलत हैं.
न्यायाधीश का यह भी कहना था कि जो बेटा माता-पिता पर अत्याचार करता है उसे घर में रहने का कोई अधिकार नहीं है. वह कब घर छोड़ेंगे वह बतायें? घर की चाबी कब माता-पिता को सौंपेंगे? याचिकाकर्ता हाड़वा के रहने वाले पेशे से पूर्व शिक्षक धनंजय मंडल के वकील शुभाशीष पाछाल व शेख्र बर्मन ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल धनंजय व उनकी पत्नी कुमुदनी उत्तर 24 परगना के हाड़वा के चंडीगढ़ में रहते हैं.
बेटे व बहु के अत्याचार से आजिज आकर उन्हें घर छोड़ना पड़ा है. संपत्ति के लोभ में कुछ वर्षों से उनके मंझले बेटे प्रकाश व बहु अपर्णा ने उन्हें घर से निकाल दिया है. फिलहाल वह सोदपुर में बेटी के घर रहते हैं. मंझली बहु के अत्याचार से दो अन्य भाई भी घर छोड़ चुके हैं. बड़े भाई पर छेड़खानी का आरोप लगाकर उन्हें घर से निकाल दिया गया है. छोटा भाई भी घर से बेघर है. उनके मुवक्किल को अपने घर में शांतिपूर्ण तरीके से रहने की व्यवस्था हाइकोर्ट करे.
इस संबंध में सरकारी वकील ने कहा कि बेटे व बहु के खिलाफ मामला शुरू किया गया है. उसकी रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गयी. इस संबंध में बेटे-बहु के वकील नरेन घोष दस्तिदार ने बेटे व बहु का दोष स्वीकार करके कहा कि उन्हें एकबार अदालत मौका दे. वह अपनी गलती सुधारेंगे. हालांकि अदालत ने उक्त निर्देश दिया.
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