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President Visit In Gorakhpur: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा- प्रेस नहीं साहित्य का मंदिर है गीता प्रेस

Updated at : 04 Jun 2022 10:26 PM (IST)
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President Visit In Gorakhpur: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा- प्रेस नहीं साहित्य का मंदिर है गीता प्रेस

शाम 5 बजे राष्ट्रपति विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष समारोह के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे. वहां वे गीता प्रेस शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में मंच पर पहुंचे. उनके साथ उनकी पत्नी सविता कोविंद, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे.

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Gorakhpur News: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने दो दिवसीय दौरे पर शन‍िवार को गोरखपुर पहुंचे हैं. गोरखपुर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति सर्किट हाउस पहुंच कर वहां विश्राम किये. उसके बाद शाम 5 बजे राष्ट्रपति विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष समारोह के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे. वहां उन्‍होंने लीला चित्र मंदिर का दर्शन किया. इसके बाद राष्ट्रपति गीता प्रेस शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में मंच पर पहुंचे. उनके साथ उनकी पत्नी सविता कोविंद, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे. मंच पर गीता प्रेस से जुड़े ट्रस्टी भी मौजूद रहे.

सीएम ने किया दो ग्रंथों का विमोचन

गीता प्रेस की शताब्दी वर्ष शुभारंभ अवसर पर रामनाथ कोविंद व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के समक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 ग्रंथों का विमोचन किया. इन दो ग्रंथों में 300 रंगीन चित्रों के साथ आर्ट पेपर पर श्री रामचरितमानस और गीता प्रेस के संस्थापक जय दयाल गोविंद का द्वारा रचित गीता तत्व विवेचना का प्रकाशन शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में किया गया. मुख्यमंत्री ने दोनों गणतों की प्रथम प्रति राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेंट की. मंच से अपने संबोधन में रामनाथ कोविंद ने कहा कि गीता प्रेस एक सामान्य प्रिंटिंग प्रेस नहीं अपितु समाज का मार्गदर्शन करने वाला साहित्य का मंदिर है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और संस्कृति को बचाए रखने में इसकी भूमिका मंदिरों और तीर्थ स्थलों जितनी ही महत्वपूर्ण है. रामनाथ कोविंद ने कहा, ‘मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति की अवधारणा रही है कि गीता प्रेस एक प्रेस होगा जहां मशीन होगी. कर्मचारी होंगे. एक छोटा घर होगा लेकिन आज जो देखने को मिला है, वह सिर्फ प्रेस नहीं बल्कि साहित्य मंदिर है.’ उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास प्राचीन काल से ही धर्म और अध्यात्म से जुड़ा रहा है. हमारी अनुपम संस्कृति को पूरे विश्व में सराहा गया है .भारत के धार्मिक व आध्यात्मिक सांस्कृतिक ज्ञान और जन-जन तक पहुंचाने में गीता प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

प्रेसीडेंट ने दी बधाई

रामनाथ गोविंद ने कहा कि जब इस प्रेस की नींव में ही भागवत प्रेम है तो इसका नाम गीता प्रेस होना स्वाभाविक ही था. उन्होंने कहा कि गीता प्रेस धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन हेतु विश्व की सबसे बड़ी संस्था है. इसने कठिन दौर में भी सस्ते दर पर पुस्तकें उपलब्ध कराने का क्रम जारी रखा है. स्थापना काल से अब तक 70 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन गीता प्रेस ने किया है. इसके लिए बधाई देता हूं.

किराये के भवन में शुरू हुआ सफर

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धार्मिक आध्यात्मिक व संस्कृत साहित्य के माध्यम से गीता प्रेस देश की अपूर्व सेवा कर रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता प्रेस दो शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर राष्ट्रपति का आगमन गौरवशाली पल है. 1923 में 10 रुपये के किराए के भवन में जयदयाल गोयनकाजी ने जिस बीज का रोपण किया था, आज वह वटवृक्ष बनकर देश दुनिया में घर-घर को धर्म संस्कार से जोड़कर देश सेवा का उल्लेखनीय कार्य कर रहा है. मंच से अपने संबोधन में योगी ने गीताश्री गोरक्ष पीठ के जुड़ाव का उल्लेख भी किया. उन्होंने कहा कि 1955 में जब देश के प्रथम राष्ट्रपति गीता प्रेस के मुख्य द्वार वह लीला चित्र मंदिर का उद्घाटन करने आए थे. उस समय उनके साथ मेरे दादा गुरु व तत्कालीन पीठाधीश्वर महंत दिग्विजय नाथ जी भी मौजूद थे. आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आगमन पर यह सौभाग्य मुझे प्राप्त हो रहा है.

‘मानवता की सेवा हो रही’

गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष शुभारंभ समारोह के अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि गीता प्रेस विशुद्ध आध्यात्मिक संस्था है गीता प्रेस से प्रकाशित विश्व प्रसिद्ध कल्याण पत्रिका के संपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार के प्रति श्रद्धा निवेदित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सत्य प्रेम शांति के माध्यम से मानवता की सेवा करने के लिए गीता प्रेस की स्थापना हुई है.

रिपोर्ट : कुमार प्रदीप

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