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महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद अखाड़ा परिषद में अध्यक्ष को लेकर घमासान, महंत राजेंद्रदास ने ठोंकी दावेदारी

पंच निर्मोही अनी अखाड़ा महंत राजेंद्रदास महाराज से प्रभात खबर ने जब बात की तो उन्होंने बताया की भारत के अंदर 13 अखाड़ा है. 13 अखाड़ों में 26 प्रतिनिधि है.

By Prabhat khabar Digital
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नरेंद्र गिरि की मौत के बाद अखाड़ा परिषद में अध्यक्ष को लेकर घमासान
नरेंद्र गिरि की मौत के बाद अखाड़ा परिषद में अध्यक्ष को लेकर घमासान
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महंत नरेंद्र गिरि की कथित मौत के बाद खाली हुए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर रोज नए नए मतभेद सामने आ रहे. अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पद को लेकर जूना और वैष्णव दोनों अखाड़ों ने अपनी दावेदारी पेश की है. वहीं अब सूचना आ रही है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पद को लेकर 25 अक्टूबर को हरि गिरि महाराज की अध्यक्षता में बैठक हो सकती है, जिसमे नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर चर्चा होगी. बैठक में सभी तेरह अखाड़ों के प्रतिनिधियों को बैठक में बुलाया जाएगा. यह बैठक प्रयागराज या हरिद्वार में होने की संभावना जताई जा रही है.

दूसरी ओर इस बैठक के संबंध में राष्ट्रीय अध्यक्ष/ श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा महंत राजेंद्रदास महाराज से प्रभात खबर ने जब बात की तो उन्होंने बताया की भारत के अंदर 13 अखाड़ा है. 13 अखाड़ों में 26 प्रतिनिधि है. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का चयन तभी होगा जब 26 प्रतिनिधि होंगे. महंत नरेंद्र गिरि और हरि गिरि महाराज, 13 अखाड़ों के 26 प्रतिनिधियों में से 2 अतिरिक्त थे. वो अखाड़ा परिषद थी ही नहीं. दोनों लोग अल जबरी पद पर थे. साधू समाज में अखाड़ों में भी शोषण किया जा रहा है.वो दोनों लोग अतिरिक्त थे. वरिष्ठ होने के कारण विरोध नहीं उठाया. अब जब पंच द्वारा नियुक्त अखाड़ा परिषद में 26 प्रतिनिधि होंगे तभी वह बैठक में शामिल होंगे. फिलहाल अभी हमारे पास बैठक की सूचना नहीं है. मैं राजेंद्रदास सन 2002 से निर्मोही अखाड़े का अध्यक्ष हूं और मैं ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का प्रथम उम्मीदवार हूं.

एक अन्य सवाल के जवाब में निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष राजेंद्रदास ने कहा अभी मैं गुजरात में हूं, मुझे नहीं बोलना चाहिए, लेकिन अब जब सभी अपना अपना पक्ष रख रहे है तो बोलना पड़ रहा है. यह दुर्भाग्य है कि 13 अखाड़ों के 26 प्रतिनिधियों के अतिरिक्त अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि और महामंत्री हरि गिरि दो बार से है. अखाड़ा परिषद की बैठक यदि 26 प्रतिनिधियों में से किसी के द्वारा आयोजित होती है तो वह बैठक में जायेंगे नहीं तो नहीं. उन्होंने कहा अखाड़ा परिषद के बिना कोई काम नहीं रुक रहा. सभी अखाड़े स्वतंत्र है और सभी का काम चल रहा है.

उन्होंने आगे कहा कि महंत राजेंद्र दास महाराज ने बताया की अखाड़ा परिषद का निर्माण कुंभ मेले की व्यवस्था देखने लिए किया गया था, जिससे एक व्यक्ति सभी व्यवस्थाओं को देख सके , धर्म को लेकर विवाद न हो और समाज में गलत संदेश न जाए, इस लिए अखाड़ा परिषद का गठन किया गया, 13 अखाड़ों में 26 प्रतिनिधि में से 2 अतिरिक्त जो है इसमें से 3 जूना अखाड़े और 3 निरंजनी अखाड़े के प्रतिनिधि है, महंत राजेंद्रदास ने कहा की अब महंत नरेंद्र गिरि ब्रम्हलीन हो गए है. वह महंत नरेंद्र गिरि जी का बहुत सम्मान करते है, उनकी कार्यशैली और व्यक्तिव सब से अलग था. उनके जैसा चरित्र और व्यक्तित्व शायद ही किसी और में देखने को मिले.

षोडशी भंडारे में न पहुंचने के सवाल के जवाब से उन्होंने बताया की मैं भंडारे में नहीं जापाया क्यों की मुझे श्राद्ध करनी थी और जरूरी नहीं की भंडारा खाया ही जाए. महंत के समाधी कार्यक्रम में गया था. वहीं दूसरी ओर गुजरात में नवरात्र है इसलिए भी अतिव्यस्त होने के कारण षोडशी भंडारे में नहीं आ सका.

उन्होंने आखिर में कहा की मुझे इस बात का बहुत दुख है कि अखाड़ों में 26 प्रतिनिधि है, न होने के बावजूद दो अतिरिक्त अध्यक्ष और महामंत्री रहे.अखाड़ों में कोई सही बोलने वाला है ही नहीं इस बात का मुझे बहुत दुख है. अब नई अखाड़ा परिषद में तभी शामिल हूंगा जब पंच द्वारा नियुक्त 13 अखाड़ों के प्रतिनिधि बैठक करेंगे. आखिर में अध्यक्ष पद पर दावेदारी करते हुए महंत राजेंद्रदास ने कहा की वैष्णव अखाड़े की ओर से अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद पर एक नंबर पर अपनी दावेदारी पेश करते है. उन्होंने कहा निर्माणी, निर्मोही, और दिगंबर, वैष्णव के ही अखाड़े है.

रिपोर्ट: एस के इलाहाबादी

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