झुंड से बिछड़े हाथी ने 8 घर तोड़े, खा गये अनाज

Updated at : 29 Jan 2017 12:12 AM (IST)
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झुंड से बिछड़े हाथी ने 8 घर तोड़े, खा गये अनाज

कादाजामदा पंचायत के जीवासाई व डोलसाई की घटना घर में रखे बर्तनों को रौंद दिया, लोगों ने भागकर बचायी जान भय से जाग कर ग्रामीणों ने बितायी रात झुंड से बिछड़े एक हाथी ने ढाया कहर नोवामुंडी : कादाजामदा पंचायत के जीवासाई व डोलसाई में शुक्रवार की रात झुंड से बिछड़े एक हाथी ने जमकर […]

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कादाजामदा पंचायत के जीवासाई व डोलसाई की घटना

घर में रखे बर्तनों को रौंद दिया, लोगों ने भागकर बचायी जान
भय से जाग कर ग्रामीणों ने बितायी रात
झुंड से बिछड़े एक हाथी ने ढाया कहर
नोवामुंडी : कादाजामदा पंचायत के जीवासाई व डोलसाई में शुक्रवार की रात झुंड से बिछड़े एक हाथी ने जमकर उत्पात मचाया. हाथी ने आठ घरों को क्षतिग्रस्त कर घर में रखे अनाज चट कर दिया. वहीं बर्तनों को पैर से रौंद दिया. जीवासाई के सात व डोलसाई का एक ग्रामीण को नुकसान हुआ है. हाथी ने जीवासाई गांव के कैरा हेंब्रम, सुकराम हेंब्रम, भगवान हेंब्रम, गुरा हेंब्रम, मूली पुरती, लादुरा पुरती, रेंशो पुरती और डोलसाई के गोस्वामी लागुरी का घर तोड़ दिया. कैरा हेंब्रम की पत्नी अनिता हेंब्रम ने बताया कि पति चार माह पूर्व काम करने मुंबई गये हैं. दो बच्चों के साथ वह अकेली घर में रहती है. दो कच्चा मकान अलग-अलग बनायी थी. हाथी ने दोनों घरों को तोड़ दिया. घर में रखे अनाज खा गया. बर्तन को रौंदकर बर्बाद कर दिया. भगवान हेंब्रम के निर्मित शौचालय को हाथी ने तोड़ डाला. वहीं डोलसाई गांव के गोस्वामी लागुरी के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया. परिवार के लोगों ने किसी तरह भागकर जान बचायी.
हाथी के डर से भागने के दौरान दर्जनों ग्रामीण घायल. हाथी काफी आक्रमक दिख रहा था. हाथी को भगाने के लिए जामपानी व मुहल्ले से पहुंचे ग्रामीणों पर उसने हमला कर दिया. जान बचाकर भागने के चक्कर में दर्जनों ग्रामीण चोटिल हो गये.
रेंजर ने मुआवजा के लिए फॉर्म भरने को कहा. घटना की सूचना मिलते ही रेंजर आनंद बिहारी सिंह ने प्रभावित गांव का दौरा किया. जंगली हाथी के उत्पात से हुए नुकसान की स्थिति का जायजा लिया. मुआवजा के लिए फोटो समेत फॉर्म भरकर वन प्रक्षेत्र कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया.
हाथियों को भगाने की फंडिंग बंद, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी. जंगली हाथियों को भगाने व सुरक्षा के लिए वन सुरक्षा समिति का गठन किया गया. इसके लिए ट्रेनिंग दी गयी. इसके बाद वन विभाग ने फंड देना बंद कर दिया. प्रशिक्षित टीम के पास जंगली हाथियों को भगाने के लिए मशाल जलाने के लिए डीजल खरीदने तक के पैसे नहीं है. जंगली हाथियों के उत्पात से प्रभावित ग्रामीणों ने रेंजर से सुरक्षा की गुहार लगायी है. ग्रामीणों ने कहा हर साल जंगली हाथी दर्जनों ग्रामीणों के घरों को तोड़कर अनाज खा जा रहे हैं.
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