‘आदिवासी हो समाज महासभा सीएनटी पर अपना रुख स्पष्ट करे’
Updated at : 02 Dec 2016 5:33 AM (IST)
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शुक्रवार की बंदी को नैतिक समर्थन का निर्णय चाईबासा : आदिवासी हो समाज सेवानिवृत्त संगठन की एक बैठक गुरुवार को अध्यक्ष कृष्ण चंद्र बिरुली की अध्यक्षता में आदिवासी हो समाज महासभा के सभागार में हुई. इसमें निर्णय हुई कि कोल्हान विवि दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाने वाले डीबर पुरती व मनोरंजन हाईबुरु को संगठन […]
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शुक्रवार की बंदी को नैतिक समर्थन का निर्णय
चाईबासा : आदिवासी हो समाज सेवानिवृत्त संगठन की एक बैठक गुरुवार को अध्यक्ष कृष्ण चंद्र बिरुली की अध्यक्षता में आदिवासी हो समाज महासभा के सभागार में हुई. इसमें निर्णय हुई कि कोल्हान विवि दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाने वाले डीबर पुरती व मनोरंजन हाईबुरु को संगठन की ओर से 16 दिसंबर की बैठक में सम्मानित किया जायेगा. संगठन के 2017 के कैलेंडर में समाज के पर्व-त्योहार के साथ आदिवासी समाज व दलित समाज के महापुरुषों की जयंती व पुण्यतिथि अंकित की जायेगी. वहीं दो दिसंबर को आहूत झारखंड बंद को नैतिक समर्थन देने का निर्णय हुआ. सरकार का कहना है कि संशोधन के बाद कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि में परिवर्तित करने के बावजूद उस जमीन पर रैयत का मालिकाना हक बना रहेगा. यह समझ से परे है.
इसे उपयुक्त उदाहरण के साथ पेश करने पर आम आदमी को समझने में आसानी होगी. इस मुद्दे पर आदिवासी हो समाज की सर्वोच्च संस्था आदिवासी हो समाज महासभा (केंद्रीय समिति) की चुप्पी समाज कई सवाल खड़े करती है. संस्था को अपनी राय स्पष्ट करनी चाहिये. बैठक में सुखलाल पुरती, प्रताप सिंह कुंकल, राना बोयपाई, शिवचरण कालुंडिया, डी सी बिरुवा, के बिरुवा, एच सी सिरका, शैलेंद्र हेम्बरोम गुरुचरण बिरुवा (सीनियर), गुरुचरण गागराई, रामसिंह बिरुली, गणेश बिरुवा, केरसे देवगम, भोंज देवगम, गुरुचरण बिरुवा (जूनियर), सोमा हेसा, आरसीएस कुंटिया, कांडे बानरा, बागुन बोदरा उपस्थित थे.
व्यापारियों को कैशलेस लेन देन पर फोकस का निर्देश
वाणिज्यकर आयुक्त दोनों चेंबर के पदाधिकारियों के साथ बैठक करते.
मशीन से लेन-देन का लाभ बताया, दुकानों में मशीन लगाने को कहा
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