बैंक में पैसा खत्म, ग्राहकों का हंगामा

Updated at : 23 Nov 2016 6:15 AM (IST)
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बैंक में पैसा खत्म, ग्राहकों का हंगामा

सोनुवा : सोनुवा के बैंक ऑफ इंडिया शाखा में पैसा खत्म होने के बाद मंगलवार शाम करीब चार बजे पैसे के लिए लाइन में लगे ग्राहकों ने हंगामा किया. घंटों पैसे के लिए लाइन खडे पुरुष व महिला ग्राहकों को जब पता चला कि पैसा खत्म हो गया है. तब गुस्साएं ग्राहकों ने बैंक कर्मचरियों […]

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सोनुवा : सोनुवा के बैंक ऑफ इंडिया शाखा में पैसा खत्म होने के बाद मंगलवार शाम करीब चार बजे पैसे के लिए लाइन में लगे ग्राहकों ने हंगामा किया. घंटों पैसे के लिए लाइन खडे पुरुष व महिला ग्राहकों को जब पता चला कि पैसा खत्म हो गया है. तब गुस्साएं ग्राहकों ने बैंक कर्मचरियों के कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए हंगामा किया.

लाइन में लगे ग्राहकों ने टोकन देने की बात कहते हुए हंगामा किया. लेकिन बैंक कर्मचारी टोकन देने से मना कर दिया. ग्राहक टोकने देने की जिद पर अड़ गये व हंगामा जारी रखा. बैंक में ग्राहकों की हंगामें की सूचना पाकर बीडीओ संजय कुमार सिन्हा व सोनुवा थाना के अवर निरीक्षक एसएन लाल बैंक पहुंच ग्राहकों को समझाते हुए बैंक कर्मचारियों को टोकन देने का निर्देश दिया. जिसके बाद ग्राहकों ने हंगामा बंद किया.

ज्ञात हो कि सोमवार सुबह बैंक ऑफ इंडिया में कैश खत्म होने से भुगतान बंद था. बैंक में मंगलवार दोपहर को कैश आया, जिसके बाद मंगलवार दोपहर दो बजे के बाद बैंक में भुगतान शुरू हुआ. लेकिन शाम के चार बजते ही फिर से कैश खत्म हो जाने से गुस्साये ग्राहकों ने हंगामा किया.
नोटबंदी से नक्सल प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण परेशान: किरीबुरू
नक्सल प्रभावित सारंडा के दर्जनों गांवों के लोग नोटबंदी और नक्सलियों की काली कमाई ग्रामीणों के माध्यम से सफेद करने के प्रयास से परेशान हैं. छोटानागरा थाना के राजाबेड़ा, जोजोगुट्टू, जामकुन्डिया, बाईहातु, छोटानागरा आदि गांवों के दर्जनों लोगों ने प्रभात खबर से कहा कि सारंडा के दूर दराज गांवों के बीच छोटानागरा में एकमात्र केनरा बैंक है. यहां की एटीएम में नोटबंदी के बाद पैसा नहीं डाला गया. ग्रामीणों को बैंक से दो-दो हजार के नोट दिये जा रहे हैं. इसे दुकान खुचरा की परेशानी के कारण नहीं ले रहे हैं.
दूसरी तरफ बकरा व मुर्गा आदि बेचकर रुपये जमा करने वाले ग्रामीण बैंक में जमा करने पहुंच रहे हैं, तो पुलिस-प्रशासन नक्सलियों का पैसा होने के संदेह कर रहे हैं. ग्रामीणों ने बताया की हमारा आय का सबसे बड़ा स्रोत बकरी व मुर्गी पालन है. सारंडा के प्रायः ग्रामीण के पास बकरी व मुर्गी है. हम बकरियों को महीनों जंगल में चरा बड़ा करते हैं. व्यापारियों को एक-एक बकरा 20-25 हजार रुपये तक बेचते हैं. इस मामले में छोटानागरा स्थित केनरा बैंक के अधिकारियों ने बताया कि पैसे की कमी के कारण एटीएम बंद है. 100, 50 व 10 के हमारे बैंक में नहीं भेजे जा रहे हैं. इस कारण दो-दो हजार के नोट हम ग्रामीणों को दे रहे है.
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