भगवान और इतिहास दोनों जुड़े हैं गौ कथा से
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Dec 2015 1:40 AM (IST)
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चाईबासा : गौ कथा के दूसरे दिन शंभू मंदिर में गौ कथा में श्रद्धालु घंटों सराबोर रहे. स्वामी सीताशरण जी महाराज ने छोटे-छोटे पाठ के साथ गौ माता और उनसे जुड़े लोगों के विषय में बताया. बताया कि गौशाला जाकर हम लोग गौ माता को खिलाते-पिलाते हैं. पर किसी गाय को अगर हम सड़क से […]
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चाईबासा : गौ कथा के दूसरे दिन शंभू मंदिर में गौ कथा में श्रद्धालु घंटों सराबोर रहे. स्वामी सीताशरण जी महाराज ने छोटे-छोटे पाठ के साथ गौ माता और उनसे जुड़े लोगों के विषय में बताया. बताया कि गौशाला जाकर हम लोग गौ माता को खिलाते-पिलाते हैं. पर किसी गाय को अगर हम सड़क से ले आये तो वो हमारा सौभाग्य होगा. गाय हमारी मां के समान है तथा कृष्ण ने भी देवकी से ज्यादा यशोदा मइया का आभार जताया है़ क्योंकि यशोदा माता ने उसे गाय का दूध पिलाया.
कृष्ण जन्म की कथा सुनकर लोग आनंदित हो उठे. महाराज ने बताया कि इतिहास में गौ माता का बड़ा महत्व था. एक बार छत्रपति शिवाजी अपने घोड़े पर बैठकर कहीं जा रहे थे. उन्हें कसाई नजर आया. उन्होंने बिना किसी से अनुमति लिए उस कसाई का सिर धर से अलग कर दिया.
गौ हत्या पर लगे पाबंदी
आज गौ माता को कसाइ जिस तरह से मार रहे हैं. उन पर पूर्ण पाबंदी लगा देनी चाहिए तथा उन्हें उचित दंड मिलना चाहिए. उत्तराखंड और झारखंड की गायों की विशेषता बताते हुए कहा कि भले ही अन्य राज्यों की गायें मात्रा में ज्यादा दूध देती हो मगर यहां की गाये कम मात्रा में भी ज्यादा गुणकारी दूध देती हैं. गौ कथा में उद्योगपति राजकुमार शाह भी पहुंचे थे. धेनु मानस गौ कथा में धेनु मानस की डीवीडी, पुस्तक और किताबों का भी स्टॉल लगाया गया है.
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