छऊ नृत्य है अनमोल सांस्कृतिक धरोहर
Updated at : 02 Apr 2017 12:10 AM (IST)
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राजघराने में भैरव पूजा का आयोजन सरायकेला : छऊ नृत्य को विश्व के कोने कोने तक पहुंचाने में सरायकेला राजघराने का अविस्मरणीय योगदान रहा है. सरायकेला छऊ नृत्य को राजघराने का सहयोग व संरक्षण ना मिला होता तो यह नृत्य न होकर प्राचीन परिखंडा का परिष्कृत रूप भर ही रहता. यह बात श्रीकलापीठ के संरक्षक […]
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राजघराने में भैरव पूजा का आयोजन
सरायकेला : छऊ नृत्य को विश्व के कोने कोने तक पहुंचाने में सरायकेला राजघराने का अविस्मरणीय योगदान रहा है. सरायकेला छऊ नृत्य को राजघराने का सहयोग व संरक्षण ना मिला होता तो यह नृत्य न होकर प्राचीन परिखंडा का परिष्कृत रूप भर ही रहता. यह बात श्रीकलापीठ के संरक्षक राजा आदित्य प्रताप सिंहदेव ने कही.
राजघराने द्वारा भैरवशाल में आयोजित पूजा-अर्चना के पश्चात श्री सिंहदेव ने कहा कि जाति व धर्म का बंधन तोड़ राजघराने के लोगों को एक मंच पर नृत्य करते देख महात्मा गांधी व रवींद्र नाथ टैगोर जैसे विभूतियों ने राजघराने व छऊ नृत्य की भूरि भूरि प्रशंसा की थी. आदित्य सिंहदेव ने कहा कि छऊ को आधुनिक बनाने के क्रम में इसकी अनमोल सांस्कृतिक
धरोहर और परंपराओं के साथ छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए. श्री सिंहदेव ने केयू द्वारा छऊ पाठ्यक्रम को चालू करने के बावजूद एक भी छात्र का नामांकन नहीं होने पर इससे दुखद करार दिया. मौके पर मनोरंजन साहू, अधिवक्ता गोलक पति, अनिल सारंगी व अन्य उपस्थित थे.
भैरवनाथ की पूजा-अर्चना :
राजघराने द्वारा भैरव पूजा का आयोजन किया गया. राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव ने यजमान की भूमिका अदा करते हुए बाबा भैरवनाथ की पूजा-अर्चना की. उन्होंने कहा कि इस वर्ष का छऊ नृत्य रानी पद्मीमीनी कुमारी सिंहदेव पर समर्पित होगा. भैरव पूजा के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया.
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