इंदिरा आवास जर्जर, दहशत में जी रहे 12 हरिजन परिवार

Updated at : 12 Jun 2017 1:19 AM (IST)
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इंदिरा आवास जर्जर, दहशत में जी रहे 12 हरिजन परिवार

टोंटोपोसी के हरिजन बस्ती में गिर रही घरों की छतें जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति आक्रोश प्रखंड मुख्यालय से महज 6 किमी की दूरी पर है बस्ती नोवामुंडी : टोंटोपोसी के हरिजन बस्ती में चार दशक पूर्व बने इंदिरा आवास की छतें टूटकर गिर रही है. इन्हीं घरों में मौत के साये में लोग […]

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टोंटोपोसी के हरिजन बस्ती में गिर रही घरों की छतें

जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति आक्रोश
प्रखंड मुख्यालय से महज 6 किमी की दूरी पर है बस्ती
नोवामुंडी : टोंटोपोसी के हरिजन बस्ती में चार दशक पूर्व बने इंदिरा आवास की छतें टूटकर गिर रही है. इन्हीं घरों में मौत के साये में लोग अपने परिवार के साथ रहने को विवश हैं. 12 परिवार वाले हरिजनों की बस्ती में कोई जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी नहीं आते हैं. बस्ती के करीब 80 लोग दहशत में जी रहे हैं. बस्ती मेन रोड से महज 700 गज की दूरी पर है. यहां जाने के लिए रास्ता भी नहीं है.
भूमिहीन है अधिकांश हरिजन परिवार:
बस्ती के 12 परिवारों में केवल एक परिवार के पास सिर्फ तीन डिसमिल जमीन है. वो भी बिहार के समय सामाजिक सेवा के कारण मुकुंद कारुवा के दादा को रहने के लिए कोटगढ़ के मुखिया व मुंडा ने बंदोबस्ती की थी. बस्ती के लोगों का दर्द न तो जन प्रतिनिधि सुनते हैं, न प्रशासनिक अधिकारी.
आवेदन के बावजूद नहीं बना शौचालय:
हरिजन बस्ती में शौचालय निर्माण की मांग के बावजूद लाभ नहीं हुआ. हरिजन बस्ती के लोग खुले में शौच को विवश हैं.
भूमिहीन होने के कारण नहीं मिला पीएम आवास का लाभ:
हरिजन बस्ती के 12 परिवार आजादी के पूर्व से रहते हैं, लेकिन उन्हें जमीन की बंदोबस्ती नहीं मिली. हरिजनों के पास भूमि नहीं होने के कारण पीएम आवास का लाभ नहीं मिला.
हरिजन परिवार की सूची:
फुलमणी देवी, कोअंआ देवी, मुकेंद्र कारुवा, महेंद्र कारुवा, विश्वनाथ कारुवा, चंदन कारुवा, दिलीप कारुवा, अविनाश कारुवा, पृथ्वीराज कारुवा, राजेश कारुवा, मंगल कारुवा व भोला कारुवा.
बस्ती में सिर्फ मुकुंद कारुवा ही मैट्रिक पास
हरिजन बस्ती में मुकुंद कारुवा ही मैट्रिक पास है. टीएसआरडीएस की ओर से बड़बिल (ओड़िशा) में छह माह का आइटीआइ कोर्स किया, लेकिन रोजगार नहीं मिला. उसने इंटर में एडमिशन लेकर आगे की पढ़ाई शुरु कर दी है. वह बस्ती के बच्चों को स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में भेज रहा है.
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