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झारखंड की 80 हजार परिवार की महिलाएं एसएचजी से जुड़ेंगी, खुलेंगे रोजगार के द्वार

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
महिलाओं को स्वयंसहायता समूह से जोड़ा जायेगा.
महिलाओं को स्वयंसहायता समूह से जोड़ा जायेगा.
Prabhat Khabar

रांची : कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से घोषित लॉकडाउन में जब लोग मुश्किलों से घिरे, तो अपने घरों की ओर भागे. झारखंड सरकार ने अलग-अलग राज्यों में फंसे अपने लोगों को लाने की पहल की और करीब 7 लाख लोग अलग-अलग परिवहन माध्यमों से लाये गये. इस दौरान सरकार ने प्रवासी श्रमिकों का एक सर्वेक्षण भी कराया, जिसमें पता चला कि 80 हजार से अधिक परिवार स्वयं सहायता समूह का हिस्सा नहीं है.

अब इन लोगों को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर इन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि फिर से इन लोगों को रोजी-रोटी के लिए अपना गांव-घर छोड़कर किसी और राज्य में पलायन न करना पड़े. बस, ट्रेन और हवाई जहाज से लौटे 3,01,987 लोगों को प्रवासी श्रमिक के रूप में चिह्नित किया गया है. इनमें से 26.51 फीसदी परिवार अब तक स्वयं सहायता समूह से नहीं जुड़ पाये हैं.

ऐसे 80,047 परिवारों की पहचान की गयी है. ग्रामीण विकास विभाग की सचिव आराधना पटनायक ने कहा है कि इन परिवारों की महिलाओं को एसएचजी से जोड़कर उन्हें स्वावलंबी बनाया जायेगा. उन्होंने कहा कि सरकार के पास ऐसे लोगों का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं था. लॉकडाउन के दौरान सखी मंडल के जरिये यह पता लगाया गया कि कौन-कौन लोग कमाने के लिए बाहर गये हैं और लौटना चाहते हैं. ये लोग वहां क्या काम करते हैं.

‘मिशन सक्षम’ के तहत सखी मंडल के जरिये ही यह भी पता लगाया गया कि प्रवासी श्रमिकों के परिवार सरकार की किन योजनाओं का लाभ ले रहे हैं. इसी दौरान मालूम हुआ कि पात्रता के बावजूद वे कम से कम 7 योजनाओं का सरकारी लाभ नहीं ले पा रहे हैं. ग्रामीण विकास विभाग की सचिव ने यह भी बताया कि सर्वेक्षण के दौरान यह भी आंकड़ा एकत्र कर लिया गया है कि प्रवासी श्रमिकों की रुचि किस काम में है. इसके आधार पर सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत उन्हें रोजगार उपलब्ध करवायेगी.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि वैश्विक महामारी कोविड19 (कोरोना वायरस डिजीज 2019) की वजह से देश भर में घोषित लॉकडाउन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से 6.89 लाख से अधिक लोग झारखंड लौटे. इनमें से 5,11,663 (5 लाख 11 हजार 663) लोगों को प्रवासी मजदूर के रूप में चिह्नित किया गया. इनमें से 3 लाख से अधिक लोगों का ग्रामीण विकास विभाग ने सर्वे किया, तो पाया कि 2.09 लाख से अधिक लोग कुशल श्रमिक हैं, जबकि 92 हजार से अधिक लोग अकुशल श्रमिक हैं.

ज्ञात हो कि 1 मई, 2020 से 238 स्पेशल ट्रेनें अलग-अलग राज्यों से झारखंड के 6.89 लाख से अधिक लोग अपने घर पहुंचे. इनमें से 4 लाख 12 हजार 357 लोग झारखंड सरकार की मदद से अपने राज्य और अपने घर पहुंचे. झारखंड सरकार की मदद से जो लोग लाये गये, उनमें से 3 लाख 10 हजार 340 लोगों को 238 स्पेशल श्रमिक ट्रेन के माध्यम से लाया गया है. 1 लाख 852 लोगों को बस तथा 1,165 लोगों को हवाई मार्ग से झारखंड लाया गया और फिर उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था की गयी.

Posted By : Mithilesh Jha

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