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बापू ने रांची में बच्चों को बताया था सफाई का महत्व

चार जून 1917 को गांधी जी रांची के आड्रे हाउस में सर एडवर्ड से वार्ता की थी. वार्ता छह जून तक चली थी. महात्मा गांधी ने यह वार्ता चंपारण आंदोलन के क्रम में की थी. इसके बाद वर्ष 1925 में महात्मा गांधी फिर रांची आये.

महात्मा गांधी वर्ष 1934 में अपने रांची प्रवास के दौरान हरिजन स्कूल गये थे. हरिजन शिल्प विद्यालय का उन्होंने उदघाटन किया. गांधी जी अस्पृश्यता के खिलाफ उन दिनों अभियान चला रहे थे. रांची में उन्होंने हरिजन छात्र सम्मेलन में भाषण देते हुए विद्यार्थियों को सफाई के महत्व के बारे में बताया था. उन्होंने छात्र साफ-सफाई कैसे रखें इसके बारे में बताया. गांधी जी ने खुद बच्चों के नाखून, आंख, कान की सफाई की एवं खुद से जांच भी की. उन्होंने शिक्षकों को उनकी जिम्मेदारी के बारे में भी बताया. स्कूल में गांधी जी ने बच्चों को बताया था कि उन्हें हर दिन स्नान व व्यायाम करना चाहिए. गांधी जी के रांची प्रवास का वृतांत वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा की पुस्तक महात्मा गांधी की झारखंड यात्रा से ली गयी है. बच्चों के अलावा गांधी जी टाना भगतो से भी मिले थे. श्री सिन्हा अपनी किताब में लिखते हैं कि महात्मा गांधी इससे पूर्व 1917 में भी रांची आये थे.

चार जून 1917 को गांधी जी रांची के आड्रे हाउस में सर एडवर्ड से वार्ता की थी. वार्ता छह जून तक चली थी. महात्मा गांधी ने यह वार्ता चंपारण आंदोलन के क्रम में की थी. इसके बाद वर्ष 1925 में महात्मा गांधी फिर रांची आये. इस दौरान महात्मा गांधी जब देशबंधु सहायता कोष के लिए सहायता मांगी तो महिलाओं ने सभा में अपने जेवर तक उन्हें सौंप दिये थे. रांची में एक नाटक में उन्हें जब बुलाया गया तो गांधी जी ने शर्त रख दी कि अगर नाटक में भाग लेने वाले विदेशी कपड़े पहनेंगे तो वे नहीं जायेंगे. उन्होंने खादी पहनने की शर्त रखी. जिसे लोगों ने मान लिया. गांधी जी संत पॉल स्कूल परिसर में भाषण दिया थे, एवं खादी के महत्व के बारे में बताया था. गांधी जी को बच्चों से बहुत प्यार था, और उनके रांची दौरा में यह देखने को भी मिला था. उन्होंने योगदा सत्संग ब्रह्मचर्य विद्यालय का बड़ा नाम सुना था, इसीलिए बच्चों से मिलने खुद विद्यालय आये थे.

बापू के विचारों से प्रभावित युवा समाज हित में कर रहे कार्य

चुटिया के रहनेवाले सुधीर शर्मा कहते हैं कि 2016 में स्वर्णरेखा और हरमू नदी के संगम पर स्थित नागवंशीकालीन 21 शिवलिंग (इक्कीसो महादेव) में एक दोस्त के साथ सफाई अभियान की शुरुआत की. सोशल मीडिया को हथियार बनाकर पोस्ट के माध्यम से लोगों को जागरूक किया. वह कहते हैं कि इस अभियान को लोगों का व्यापक समर्थन मिला. रोज एक घंटे के श्रमदान से इक्कीसों महादेव के घाटों की तस्वीर बदल गयी. बिना किसी बड़ी योजना के इस नदी का पुनरुद्धार संभव नहीं है. वीडियो और रील्स के माध्यम से स्वर्णरेखा नदी को प्रदूषणमुक्त करने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं. वीडियो पोस्ट को अब तक छह लाख से अधिक लोगों ने देखा और दस हजार से अधिक लोगों ने शेयर किया है.

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समाज में नशा मुक्ति के लिए की पहल

राजधानी में सेवा फाउंडेशन के द्वारा नशा मुक्ति पर काम किया जा रहा है. पिछले डेढ़ साल से रांची में 18 से 45 वर्ष के लोगों के बीच नशा मुक्ति को लेकर संस्था काम करती है. फाउंडेशन इंचार्ज इमरान खान ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से नशा से ग्रसित लोगों की जानकारी मिलती है. यहां चार महीने का इलाज कराया जाता है.

बच्चियों को स्वस्थ रहने के लिए किया प्रेरित

द वॉयस ऑफ चेंज कैंपेन के माध्यम से पिछले चार सालों से मासिक धर्म स्वच्छता पर काम किया जा रहा है. इसके तहत प्रोजेक्ट मिशन बबुनिया और पीरियड पाठशाला के माध्यम से संस्था समाज में पीरियड्स को एक आम विषय बनने का प्रयास कर रही है. संस्था के संस्थापक बताते हैं कि इस मुहिम की शुरुआत के बाद से काफी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है.

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