खेल को बढ़वा देने के लिए झारखंड सरकार का बड़ा कदम, स्कूली स्तर पर अब खेल अनिवार्य

Updated at : 30 Dec 2020 7:58 AM (IST)
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खेल को बढ़वा देने के लिए झारखंड सरकार का बड़ा कदम, स्कूली स्तर पर अब खेल अनिवार्य

झारखंड खेल नीति 2020 लॉन्च, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, स्कूली स्तर पर खेल की अनिवार्यता, पदक जीतने पर खिलाड़ियों को कैश अवार्ड, पुराने खिलाड़ियों मिलेगा अब ये लाभ

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‘झारखंड खेल नीति-2020’ मंगलवार को लांच की गयी. इसमें खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, स्कूली स्तर पर खेल की अनिवार्यता, पदक जीतने पर खिलाड़ियों को कैश अवार्ड, पुराने खिलाड़ियों को प्रतिमाह पेंशन और दिव्यांग खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने समेत कई बातें शामिल हैं. नयी खेल नीति में खिलाड़ियों और कोच को प्रोत्साहित करने के लिए ‘जयपाल सिंह मुंडा अवार्ड’ देने की बात कही गयी है.

साथ ही इसमें प्रावधान किया गया है कि बिना मान्यता प्राप्त खेल संघों को खेल विभाग की ओर से कोई अनुदान नहीं दिया जायेगा. खेल नीति-2020 के तहत सभी सरकारी और निजी स्कूलों में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर के पाठ्यक्रम में शारीरिक शिक्षा एवं खेल को अनिवार्य बनाया जायेगा. ऐसी व्यवस्था की जायेगी, जिससे स्कूल परिसर में प्रतिभाशाली बच्चों को उत्कृष्ट खिलाड़ी बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण की सुविधा दी जा सके.

सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों में कम से कम एक घंटे शारीरिक गतिविधियों और खेल के लिए निर्धारित होगा. इसके अलावा कॉलेजों और विवि में खेल को विकसित किया जायेगा. राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक स्कूल (जिसके पास खेल के मैदान या स्टेडियम उपलब्ध हो) को चिह्नित कर उसमें खेल की समुचित सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी और उसे ग्रामीण खेल केंद्र के रूप में विकसित किया जायेगा. ग्रामीण खेल केंद्रों के लिए अनुबंध पर दो साल के लिए एक खेल मित्र बहाल किया जायेगा, जो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को पसंदीदा खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

खेल अकादमी व खेल विश्वविद्यालय की होगी स्थापना : राज्य में उच्च प्राथमिकतावाले खेलों के लिए एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना की जायेगी, जिसमें बालक व बालिकाओं को प्रशिक्षण दिया जायेगा. खेल निदेशालय समय-समय पर तय मानदंडों के अनुसार खिलाड़ियों का चयन करेगा. खिलाड़ियों को मुफ्त आवास, बोर्डिंग, खेल किट, खेल उपकरण, प्रतियोगिता प्रदर्शन और पोषण विशेषज्ञ का समर्थन और चिकित्सा प्रदान की जायेगी. वहीं, मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खेल विश्वविद्यालय शुरू किया जायेगा. खेल निदेशालय की ओर से प्रतिवर्ष ‘खेल प्रतिभा खोज’ का आयोजन किया जायेगा.

दिव्यांग खिलाड़ियों को मिलेंगे समान अवसर : नयी खेल नीति के तहत दिव्यांग खिलाड़ियों को समान अवसर प्रदान किये जायेंगे. इसमें दिव्यांगों के लिए जिलास्तरीय स्टेडियम की सुविधा प्रदान की जायेगी. पदक जीतनेवाले खिलाड़ियों को भी कैश अवार्ड देकर सम्मानित किया जायेगा.

ओलिंपिक में स्वर्ण जीतने पर दो करोड़ का पुरस्कार :

नयी खेल नीति में ओलिंपिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ, विश्व कप या विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतनेवाले या भाग लेनेवाले खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार की राशि तय की गयी है. ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतनेवाले खिलाड़ियों को दो करोड़, रजत को एक करोड़ और कांस्य पदक जीतनेवाले को 75 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जायेगा. विश्वकप या विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने पर 20 लाख, रजत जीतने पर 15 लाख और कांस्य जीतने पर 10 लाख रुपये पुरस्कार में मिलेंगे. वहीं, ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतनेवाले खिलाड़ी के कोच को 10 लाख रुपये पुरस्कार में मिलेंगे.

मान्यता प्राप्त खेल संघों को ही अनुदान :

राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त करने के लिए खेल संघों को खेल विभाग से मान्यता प्राप्त करना होगा. इसके अलावा सोसाइटी एक्ट के तहत निबंधन भी आवश्यक होगा. इसके बाद ही अनुदान मिल सकेगा. साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजन के लिए अधिकतम एक करोड़ की राशि मिलेगी. इसमें 50 प्रतिशत राशि तुरंत और 50 प्रतिशत ऑडिट रिपोर्ट मिलने के बाद मिलेगी. इसी तरह अन्य खेलों के आयोजन के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी.

Posted by : Sameer Oraon

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