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किस मामले में हुई झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी, पढ़ें कब-कब क्या हुआ?

Updated at : 31 Jan 2024 9:58 PM (IST)
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किस मामले में हुई झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी, पढ़ें कब-कब क्या हुआ?

मामला रांची के बड़गांईं अंचल के बरियातू इलाके में 8.50 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ा है. इस मामले की जब ईडी ने जांच शुरू की, उसके कागजात खंगाले, तो इस जमीन से जुड़े कागजात राजस्व उप-निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के मोबाइल फोन से मिले. जमीन की खरीद-बिक्री मामले में हेमंत सोरेन कैसे फंसे?

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जमीन की खरीद-बिक्री मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन हेमंत सोरेन बार-बार ईडी कार्यालय जाने से बचते रहे. उन्हें डर सताता रहा कि उनकी गिरफ्तारी हो सकती है. ईडी की पूछताछ से बचने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचे. हालांकि, न सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कोई राहत दी, न हाईकोर्ट ने. ईडी के समन पर रांची स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के लिए हाजिर होना होगा. चुने हुए मुख्यमंत्री को बार-बार ईडी की ओर से भेजे जा रहे नोटिस पर सियासत भी खूब हुई. झारखंड से दिल्ली तक इसके लिए केंद्र सरकार को कोसा गया. आखिरकार हेमंत सोरेन ने ईडी को मुख्यमंत्री आ‍वास में आकर पूछताछ करने की अनुमति दी. सीएम की ओर से चिट्ठी मिलने के बाद 20 जनवरी 2024 को ईडी की एक टीम कांके रोड स्थित सीएम आवास पहुंची.

8.50 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ा है मामला

आखिर अवैध रूप से जमीन की खरीद-बिक्री मामले में हेमंत सोरेन फंसे कैसे? मामला रांची के बड़गांईं अंचल के बरितयातू इलाके में 8.50 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ा है. इस मामले की जब ईडी ने जांच शुरू की, उसके कागजात खंगाले, तो इस जमीन से जुड़े कागजात राजस्व उप-निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के मोबाइल फोन से मिले. भानु प्रताप को कागजात की हेराफेरी करके जमीन बेचने के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है. मोबाइल फोन में मिले दस्तावेजों के आधार पर ईडी ने जमीन की जांच शुरू की. गिरफ्तार राजस्व उप निरीक्षक और बड़गाईं अंचल के तत्कालीन अंचल अधिकारी का बयान भी ईडी ने दर्ज किया.

सात बार हेमंत सोरेन ने ईडी के समन को किया इग्नोर

सीओ का बयान दर्ज करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से समन किया गया. ईडी ने हेमंत सोरेन से कहा कि वह रांची के जोनल ऑफिस में आकर अपनी संपत्ति का विवरण दें. हेमंत सोरेन ने ईडी ऑफिस जाने से इंकार कर दिया. एक-दो बार नहीं, सात बार उन्होंने ईडी के समन को इग्नोर किया. यहां तक कि एक बार ईडी को चेतावनी तक दे डाली कि अगर सेंट्रल एजेंसी ने अपना नोटिस वापस नहीं लिया, तो वह (हेमंत सोरेन) उसके (ईडी के) खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य हो जाएंगे. लेकिन, ईडी भी अपने स्टैंड पर कायम रहा.

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देखिए, ईडी ने कब-कब हेमंत सोरेन को नोटिस भेजा

  • 8 अगस्त 2023 को पहला समन जारी कर ईडी ने हेमंत सोरेन 14 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया.

  • 19 अगस्त 2023 को दूसरा समन जारी कर हेमंत सोरेन से कहा गया कि वे 24 अगस्त को ईडी ऑफिस आकर अपनी संपत्ति का ब्योरा दें.

  • 01 सितंबर 2023 को तीसरा समन जारी कर झारखंड के सीएम को 9 सितंबर को अपनी संपत्ति के ब्योरे के साथ ईडी ऑफिस बुलाया गया.

  • 17 सितंबर 2023 को सीएम हेमंत सोरेन को ईडी ने चौथा समन भेजा और 23 सितंबर को पूछताछ के लिए बुलाया.

  • 26 सितंबर 2023 को ईडी ने पांचवां समन जारी कर कहा कि वे दस्तावेजों के साथ 4 अक्टूबर को ईडी ऑफिस आएं.

  • 11 दिसंबर 2023 को 6ठा समन भेजकर प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 12 दिसंबर 2023 को पूछताछ के लिए ईडी कार्यालय बुलाया.

  • 29 दिसंबर 2023 को हेमंत सोरेन को ईडी ने लिखा- आपका बयान दर्ज करना है, दो दिन के अंदर आप ही बताएं, जगह कौन सी हो.

  • 12 दिसंबर 2024 को ईडी ने हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखकर कहा कि अगर आप नहीं आएंगे, तो हम आएंगे. इस चिट्ठी को आठवां समन समझें. झारखंड के सीएम को सात दिन की मोहलत दी गई. कहा गया कि हम आए, तो विधि-व्यवस्था बनाए रखना आपकी ही जिम्मेदारी है.

  • 15 जनवरी 2024 को हेमंत सोरेन ने ईडी को चिट्ठी भेजी कि 20 जनवरी को सीएम आवास आ जाएं. इसके बाद इडी की टीम सीएम आवास पहुंची और उनसे पूछताछ शुरू की.

  • 25 जनवरी 2024 को ईडी ने नौवां समन भेजकर कहा कि 27 से 31 जनवरी के बीच पूछताछ के लिए समय और जगह बताएं.

  • 27 जनवरी 2024 को फिर एक समन भेजा गया, जिसमें कहा गया कि 29 से 31 जनवरी के बीच पूछताछ के लिए उचित समय बताएं.

  • 29 जनवरी 2024 को दिल्ली में ईडी ने हेमंत सोरेन के सरकारी आवास के साथ-साथ झारखंड भवन और शिबू सोरेन के आवास पर उनसे पूछताछ करने गई, लेकिन वे नहीं मिले.

  • 29 जनवरी 2024 को सीएमओ से ईडी को एक ई-मेल भेजकर कहा गया कि सीएम से पूछताछ के लिए वे 31 जनवरी को 1 बजे सीएम आवास आ सकते हैं.

  • 30 जनवरी 2024 को 2 बजे के बाद हेमंत सोरेन ने सीएम आवास में सत्ता पक्ष के विधायकों की बैठक की अध्यक्षता की. सीएमओ ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी दी.

  • 31 जनवरी 2024 को सीएमओ की ओर से मिले समय के मुताबिक, एक बजे के बाद ईडी की टीम मुख्यमंत्री आवास पहुंची. कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद हेमंत सोरेन से पूछताछ शुरू हुई. रात में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

झारखंड हाईकोर्ट में ईडी के अधिकारों को सीएम ने दी चुनौती

इससे पहले ही हेमंत सोरेन ने 24 सितंबर को झारखंड हाईकोर्ट में एक रिट पिटीशन दायर करके ईडी के अधिकारों को चुनौती दी. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह सुनवाई के योग्य नहीं है. इससे पहले हेमंत सोरेन सुप्रीम कोर्ट गए थे और सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया था कि ईडी के नोटिस पर रोक लगाई जाए. उन्हें बार-बार नोटिस भेजकर ईडी की ओरसे परेशान किया जा रहा है. जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए ईडी के नोटिस पर रोक लगाने से इंकार कर दिया. हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आप राहत चाहते हैं, तो हाईकोर्ट जा सकते हैं. इसलिए उन्होंने हाईकोर्ट में रिट पिटीशन फाइल कर दी. 13 अक्टूबर को हेमंत सोरेन की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और यहां से भी उनको झटका लगा. हेमंत सोरेन को कोई भी राहत देने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया. यहां तक कि चीफ जस्टिस ने कहा कि यह याचिका सुनवाई के लायक ही नहीं है.

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जमीन की खरीद-बिक्री मामले में ईडी ने 13 को किया गिरफ्तार

हेमंत सोरेन हर बार किसी न किसी बहाने से ईडी के ऑफिस जाने से बचते रहे. कभी कोर्ट में याचिका के नाम पर, कभी राष्ट्रपति की ओर से दिए गए रात्रिभोज में शामिल होने के नाम पर. बता दें कि जमीन की खरीद-बिक्री के मामले में अब तक 13 लोगों को ईडी ने गिरफ्तार किया है. इनसे हुई पूछताछ और इनके मामलों की जांच के दौरान ही ईडी को सीएम हेमंत सोरेन और उनके परिजनों की बेनामी संपत्ति का पता चला. इसके बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया.

13 अप्रैल को ईडी ने जब्त किए थे इतने दस्तावेज

ईडी ने हेमंत सोरेन को समन करने का आधार भी बताया है. उसने 13 और 26 अप्रैल, 2023 को हुई छापेमारी के आलोक में दर्ज कराई गई प्राथमिकी को अपना आधार बनाया है. ईडी ने 13 अप्रैल को छापेमारी के दौरान राजस्व कर्मचारी भानु प्रताप के घर से बक्सों में भरकर रखे गए जमीन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए थे. इनमें काट-छांट करने और जालसाजी कर असली मालिक का नाम काटकर दूसरे का नाम लिखने का मामला प्रकाश में आया था. साथ ही गलत तरीके से आदिवासियों की जमीन की खरीद-बिक्री और अवैध कब्जा के मामले में भी हेमंत सोरेन से पूछताछ किए जाने की संभावना है.

हेमंत सोरेन ने ईडी को दी थी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

हेमंत सोरेन ने पहले ईडी को धमकी दी कि अगर जांच एजेंसी ने नोटिस वापस नहीं लिया, तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे. ईडी ने उनकी इस चिट्ठी को गंभीरता से नहीं लिया और अगला समन जारी कर दिया. इसके बाद हेमंत सोरेन सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक गए, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी. सुप्रीम कोर्ट में हेमंत सोरेन ने जो याचिका दाखिल की थी, उसमें उन्होंने मनी लॉन्डरिंग ऐक्ट के सेक्शन 50 और 63 के तहत जारी ईडी के नोटिस को रद्द करने की मांग की. उन्होंने कहा कि इससे व्यक्ति को हमेशा डर बना रहता है कि पीएमएलए के सेक्शन 19 में मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए ईडी उसे गिरफ्तार कर सकता है. हेमंत सोरेन ने यह भी कहा कि सेक्शन 50 और 63 व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन करता है.

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जमीन की खरीद-बिक्री मामले में आईएएस समेत 13 हो चुके हैं गिरफ्तार

बता दें कि रांची में अवैध तरीके से जमीन की खरीद-बिक्री मामले में रांची के पूर्व उपायुक्त यानी डीसी छवि रंजन और बड़े कारोबारी विष्णु अग्रवाल समेत 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. विष्णु अग्रवाल के अलावा रांची के तत्कालीन डीसी छवि रंजन, जगत बंधु टी इस्टेट के निदेशक दिलीप घोष, राजेश ऑटो के निदेशक अमित अग्रवाल, राजस्व कर्मचारी भानु प्रताप प्रसाद, जमीन के फर्जी मालिक का पोता राजेश राय, पावर ऑफ अर्टानी होल्डर भरत प्रसाद, सेना के कब्जे वाली जमीन का फर्जी मालिक प्रदीप बागची, जालसाजी कर जमीन बेचने वाले गिरोह का सरगना अफसर अली, जालसाज गिरोह का सदस्य इम्तियाज अहमद, सद्दाम हुसैन, तलहा खान और फैयाज खान की गिरफ्तारी हो चुकी है.

ईडी का दावा- हेमंत सोरेन परिवार की बेनामी संपत्ति का पता चला

ईडी बार-बार हेमंत सोरेन से अपनी संपत्ति का ब्योरा पेश करने के लिए कहा, लेकिन हेमंत सोरेन ईडी ऑफिस नहीं गए. ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर देवव्रत झा को उन्होंने एक चिट्ठी लिखकर कहा कि उन्होंने अपनी और अपने परिजनों की संपत्ति का ब्योरा 30 नवंबर 2022 को ही ईडी को उपलब्ध करवा दिया था. दूसरी ओर, ईडी का कहना है कि हाल ही में सोरेन परिवार की कई बेनामी संपत्ति के बारे में पता चला है. इस संबंध में उनसे कुछ जानकारी लेने के लिए उन्हें समन किया गया है. इस पर हेमंत सोरेन ने कहा है कि अगर ईडी ऑफिस से दस्तावेज गायब हो गए हों, तो सीबीआई से सारी जानकारी ले लें. झारखंड के सीएम ने कहा कि सांसद निशिकांत दुबे ने उनके (सोरेन) परिवार की संपत्ति की जांच की मांग लोकपाल से की थी. सीबीआई ने गलत तरीके से जांच कर उनके परिवार की संपत्ति की जानकारी जुटाई थी. अगर ईडी चाहे, तो सीबीआई से वो सारे दस्तावेज हासिल कर सकती है.

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साहिबगंज अवैध खनन मामले में ईडी के सामने पेश हुए थे हेमंत सोरेन

आपको बता दें कि साहिबगंज में हुए अवैध खनन मामले में बरहेट के विधायक हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि के घर से मिले उनके (हेमंत सोरेन के) नाम के चेकबुक मिले थे. इस सिलसिले में झारखंड के सीएम को पूछताछ के लिए ईडी ने बुलाया था. कई समन के बाद जब हिनू स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे. 17 नवंबर को करीब 10 घंटे तक उनसे पूछताछ हुई. उस समय भी ई़डी के नोटिस पर झारखंड से लेकर नई दिल्ली तक खूब राजनीति हुई थी. हेमंत सोरेन बार-बार कह रहे हैं कि केंद्र सरकार उन्हें परेशान कर रही है. केंद्रीय एजेंसियों की मदद से एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की साजिश कर रही है.

हेमंत सोरेन ने नवंबर 2022 में कहा था- मुझे बदनाम करने की कोशिश

नवंबर 2022 में हेमंत सोरेन ने ईडी दफ्तर जाने से पहले सीएम आवास में प्रेस और अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए. अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया. कहा कि एक राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री को ऐसे बुला रहे हैं, जैसे मैं कोई अपराधी हूं. यह सब केंद्र के इशारे पर हो रहा है. एक युवा आदिवासी मुख्यमंत्री बन गया और झारखंड की तरक्की हो रही है, यह बीजेपी और उसके आकाओं को हजम नहीं हो रहा है. इसलिए मुझे बदनाम करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध भी करार दिया था.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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