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पलामू टाइगर रिजर्व के वन्य जीवों को मिलेगी सुख-चैन की जिंदगी, रेलवे ने बनायी ये योजना

Updated at : 19 May 2023 3:36 PM (IST)
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पलामू टाइगर रिजर्व के वन्य जीवों को मिलेगी सुख-चैन की जिंदगी, रेलवे ने बनायी ये योजना

भारतीय रेलवे ने एक ऐसा फैसला किया है, जिससे पलामू टाइगर रिजर्व के वन्य जीवों को स्वच्छंद रूप से जंगल में विचरण करने की आजादी मिलेगी. जी हां. छिपादोहर से हेहेगढ़ा स्टेशन के बीच 11 किलोमीटर लंबे रेल खंड को अन्यत्र शिफ्ट कर दिया जायेगा.

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झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में वास करने वाले वन्य जीवों को सुख-चैन की जिंदगी देने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है. इस योजना के अमल में आने के बाद पीटीआर के जीव-जंतु जंगल में स्वच्छंद रूप से विचरण कर सकेंगे. इसके लिए पलामू प्रमंडल में स्थित पीटीआर से गुजरने वाली 11 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को अन्यत्र शिफ्ट करने का फैसला किया है. इस योजना को अंजाम देने के लिए रेलवे ने पलामू टाइगर रिजर्व के साथ मिलकर एक सर्वेक्षण कर रहा है. सर्वेक्षण पूरा होने के बाद इसका डीपीआर तैयार होगा. इसका उद्देश्य वन्य जीवों की ट्रेनों से कटकर होने वाली मौतों पर रोक लगाना है.

रेलवे-पीटीआर की संयुक्त टीम करेगी सर्वेक्षण

भारतीय रेलवे और पलामू टाइगर रिजर्व ने सर्वेक्षण के लिए एक संयुक्त टीम का गठन किया है. पीटीआर साउथ डिवीजन के डिप्टी डायरेक्टर कुमार आशीष ने बताया कि उन्होंने रेलवे के अधिकारियों ने 3-4 रूट्स सुझाये हैं. पीटीआर ने भी अपनी तरफ से एक रूट सुझाया है, जिसमें कुछ सुधार किये जा रहे हैं. पीटीआर के अधिकारी भारतीय रेलवे के अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं, ताकि जंगल में वन्य जीवों के निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित किया जा सके.

रेलवे के अधिकारियों को 3 महीने में डीपीआर तैयार करने का निर्देश

कुमार आशीष ने बताया कि भारतीय रेलवे की ओर से पहले भी सर्वेक्षण हो चुका है. लेकिन, वन विभाग ने उनके प्रस्ताव को नकार दिया था. अब दोनों विभागों की संयुक्त टीम सर्वे कर रही है. हम मिलकर हर विषय पर सर्वसम्मति बनाना चाहते हैं. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे ने अपने अधिकारियों को इसका डीपीआर तैयार करने के लिए 3 महीने का वक्त दिया गया है. बता दें कि छिपादोहर से हेहेगढ़ा स्टेशन के बीच का इलाका पीटीआर के कोर एरिया में आता है. इसी को शिफ्ट किया जाना है. नया रेल मार्ग 11 किलोमीटर से बढ़कर 14 किलोमीटर का हो जायेगा.

हर 10 मिनट में एक ट्रेन गुजरती है पलामू टाइगर रिजर्व से

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि भारतीय रेलवे के इस 11 किलोमीटर लंबे खंड से हर दिन कम से कम 200 ट्रेनें गुजरती हैं. यानी हर 10 मिनट में पलामू टाइगर रिजर्व से एक ट्रेन गुजरती है. यह रेलवे लाइन एक तरह से पलामू टाइगर रिजर्व के बीच में अदृश्य दीवार की तरह है. लगातार ट्रेनों के आवागमन की वजह से बड़ी संख्या में वन्य जीवों की ट्रेन से कटकर मौत हो जाती है. इस पर रोक लगाने के उद्देश्य से ही रेलवे लाइन को शिफ्ट करने की योजना पर काम चल रहा है.

9 हाथी समेत 28 वन्य जीवों की रेल से कटकर हुई मौत

वर्ष 1980 से वर्ष 2022 तक 28 वन्य जीवों की मौत हो चुकी है. 9 हाथियों के अलावा 9 हिरण, 8 बायसन, एक हायना और एक तेंदुआ की भी रेलगाड़ी (यात्री और मालगाड़ी दोनों) की चपेट में आने से मृत्यु हो गयी. इस रेलवे लाइन को शिफ्ट करने की लंबे समय से मांग चल रही है. अब रेलवे ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है. पीटीआर के अधिकारियों को उम्मीद है कि रेल लाइन के शिफ्ट हो जाने के बाद जानवर जंगल में स्वच्छंद रूप से विचरण कर सकेंगे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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