Human trafficking in jharkhand : दिल्ली से मुक्त करायी गयी बच्चियों को हर माह मिलेंगे दो हजार रुपये

Updated at : 08 Nov 2020 6:35 AM (IST)
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Human trafficking in jharkhand : दिल्ली से मुक्त करायी गयी बच्चियों को हर माह मिलेंगे दो हजार रुपये

झारखंड में मानव तस्करी की शिकार बच्चियों मिलेंगे दो हजार रुपये

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रांची : सफेद सलवार सूट और ब्लेजर में कतार में बैठी 45 लड़कियों के चेहरे पर अपने घर आने का सुकून था. वहीं भविष्य को लेकर चिंता भी थी, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनकी चिंता दूर करते हुए कहा कि जो भी अवयस्क हैं, उन्हें पढ़ने के लिए सरकार दो हजार रुपये प्रति माह देगी.

साथ ही वयस्क लड़कियों को हुनरमंद बनाकर रोजगार के लिए प्रशिक्षित भी करेंगे, ताकि ये अपने पैरों पर खड़े हो सकें. सीएम ने यह बात मानव तस्करी की शिकार बच्चियों को संबोधित करते हुए कहीं. ये बच्चियां दिल्ली से रेस्क्यू कर लायी गयी थीं. शनिवार को उनसे सीएम आवास में मुख्यमंत्री ने मुलाकात की. उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मान दिया.

मानव तस्करी की शिकार बच्चियों को कराया मुक्त :

मानव तस्करी की शिकार इन बच्चियों को दिल्ली पुलिस, महिला आयोग और एनजीओ की मदद से बरामद किया गया था. कई माह से उक्त बच्चियां दिल्ली के बालगृह में रह रही थीं. सभी बच्चियों को एयरलिफ्ट कर 21,22 व 23 अक्तूबर को लाया गया और रांची के आश्रयगृह में रखा गया है.

मौके पर सीएम ने कहा कि गरीबी के कारण राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्र में निवास करनेवाले बच्चे व बच्चियां मानव तस्करी की शिकार हो जाती हैं और देश के विभिन्न राज्यों में उन्हें काम पर लगा दिया जाता है. सरकार समय-समय पर ऐसी बच्चियों को रेस्क्यू भी कराती है. इस कड़ी में राज्य की 45 बच्चियों की शनिवार को घर वापसी हुई है.

मौके पर ही रेस्क्यू कर लाये गये एक 13 वर्षीय बालक की समुचित पढ़ाई का खर्च सीएम श्री सोरेन और सांसद विजय हांसदा ने वहन करने की घोषणा की. इस मौके पर विधायक मथुरा महतो, सीएम के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, प्रधान सचिव अविनाश कुमार, सचिव पूजा सिंघल, डीके सक्सेना और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे.

दुष्कर्मी तो पराया था, पर अपनों ने सौदा किया

दिल्ली में काम दिलाने के नाम पर मुझे कोई खास अपना बहला-फुसलाकर घूमने के बहाने दिल्ली ले गया. वहां मुझे एजेंट के हवाले कर दिया गया. पहले तो कहा गया कि मुझे कोठियों में काम करना है. लेकिन कोठियों में काम करने के पहले मेरे साथ दुष्कर्म हुआ. मुझे धोखे से शिकार बनाया गया. दुष्कर्म करनेवाला तो कोई पराया था, लेकिन मुझे दुख इस बात का है कि मेरा सौदा किसी अपने ने किया. मैं वहां बार-बार मर रही थी. अब दोबारा उस जिंदगी में वापस नहीं जाना चाहती हूं.

मुझे सीढ़ी से धक्का दे दिया गया, लंगड़ा कर चलती हूं

झींकपानी की बेटी की यह कहानी भी दर्दनाक है. बच्ची बताती है कि एजेंट के माध्यम से मैं दिल्ली गयी. दिल्ली में जिस घर में मुझे रखा गया, वहां मुझे बहुत मारा-पीटा जाता था. पैसे के नाम पर कुछ भी नहीं मिला, क्योंकि मेरा सारा पैसा एजेंट ने खा लिया था. घर वापस जाने के नाम पर मुझे मारा-पीटा जाता था. एक दिन मुझे सीढ़ी से धक्का दे दिया गया, जिसके बाद मेरा पांव हमेशा के लिए खराब हो गया. आज तक मैं लंगड़ा कर चलती हूं.

झारखंड की बच्चियां अन्य राज्य जाकर दाई का काम करें, यह पीड़ादायक

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की बच्चियां अन्य राज्यों में जाकर दाई और आया का काम करें, यह पीड़ादायक है. सरकार इसे लेकर चिंतित है. सरकार का यह संकल्प है कि मानव तस्करी की शिकार बच्चियों को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ा जायेगा. सीएम ने बच्चियों को आश्वस्त किया कि उन्हें चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है. उनका बड़ा भाई राज्य की देखरेख में लगा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इन बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में कार्य होगा.

यह कहानी झारखंड की उन बेटियों की है, जो पिछले कई सालों से झारखंड के गांव से निकल कर दिल्ली में कैद थीं. प्रताड़ित हो रही थीं. इनकी आपबीती रोंगटे खड़ी कर देनेवाली है. यहां उनके नाम और परिचय को गुप्त रखा गया है.

posted by : sameer oraon

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