खासमहाल की भूमि फ्री-होल्ड करने की दर की समीक्षा करेगी सरकार

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 18 Mar 2020 1:50 AM

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खासमहाल की जमीन पर मालिकाना हक देने और फ्री-होल्ड करने के मामले में सरकार नीति की समीक्षा करेगी़ फ्री-होल्ड करने के लिए सरकार द्वारा तय की गयी दर की भी समीक्षा होगी़

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रांची : खासमहाल की जमीन पर मालिकाना हक देने और फ्री-होल्ड करने के मामले में सरकार नीति की समीक्षा करेगी़ फ्री-होल्ड करने के लिए सरकार द्वारा तय की गयी दर की भी समीक्षा होगी़ राज्यभर में खासमहाल की जमीन को फ्री-होल्ड करने के लिए रैयतों से मार्केट वैल्यू का 15 व 30 प्रतिशत दर लेने का प्रावधान है़

पक्ष-विपक्ष के विधायकों का कहना था कि खासमहाल की जमीन पर मालिकाना हक देने का निर्णय तो सरकार ने लिया है, लेकिन इसकी दर बहुत अधिक है़ सदन में भाजपा विधायक अनंत ओझा के सवाल पर संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम का कहना था कि यह मामला बहुत पुराना है़ सरकार आयी और गयी़ हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला गया़ इसमें कुछ दिक्कत है़ इस परेशानी को दूर किया जायेगा़ सरकार इसमें निर्धारित दर की समीक्षा कर निर्णय लेगी़ यह गंभीर मामला है़ 150 वर्ष से लोग मकान बना कर रह रहे है़ं

जीवन की शुरुआत उसी घर से कर रहे हैं, लेकिन उस पर हक नहीं मिल पाया है़ मंत्रिमंडल के अंदर इसे लेकर एकमत बना कर सरकार निर्णय लेगी़ विधायक अनंत ओझा का कहना था कि यह खासमहाल अंग्रेजों के जमाने का काला कानून है़ लोगों के पास कागज है, केवाला है़ लोगों को जमीन पर मुआवजा भी मिला है, लेकिन इस जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो रही है़ साहिबगंज जिला में हजारों आवेदन लंबित है़ं खासमहाल को सरकार ने समाप्त कर दिया है, पर इसको सरल बनाने की जरूरत है़ प्रभारी मंत्री जगरनाथ महतो का कहना था कि मामला पुराना है़

विधायक श्री ओझा यह सवाल दो बार पिछली सरकार में पूछ चुके है़ं इस पर अनंत ओझा ने कहा कि उसके बाद सरकार ने संकल्प जारी कर खासमहाल की जमीन रैयतों को देने का निर्णय भी कर लिया़ लेकिन मैं अब नया मामला लेकर आया हूं, रजिस्ट्री नहीं हो रही है़ मंत्री का कहना था कि उपायुक्तों को निर्देश दिया गया है कि फ्री होल्ड करने के लिए 15 से 30 प्रतिशत दर लेकर मालिकाना हक दे दे़ं

मंत्री के जवाब के बाद श्री ओझा ने कहा कि उपायुक्त रजिस्ट्री नहीं कर रहे हैं. उनको विभाग का आदेश नहीं मिला है़ विधायक नवीन जायसवाल का कहना था कि दर बहुत ही अधिक है़ गरीब परिवार 20 से 25 लाख रुपये ला कर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहा है़ इसके बाद पूरे मामले में स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने संसदीय कार्य मंत्री को सरकार का पक्ष रखने को कहा़ इसके बाद मंत्री श्री आलमगीर ने पूरे मामले की समीक्षा करने का आश्वासन सदन को दिया़

खासमहाल की जमीन की रजिस्ट्री नहीं होने के सवाल का संसदीय कार्य मंत्री ने दिया जवाब

पक्ष-विपक्ष के विधायक आये साथ,

फ्री-होल्ड के लिए तय दर को ज्यादा बताया

राज्यभर में खासमहाल की जमीन को फ्री-होल्ड करने के लिए रैयतों से मार्केट वैल्यू का 15 व 30 प्रतिशत दर लेने का प्रावधान है

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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