1. home Hindi News
  2. state
  3. jharkhand
  4. ranchi
  5. corona active cases in jharkhand active cases below 100 in 17 districts 1492 still in ranchi srn

Corona active cases in jharkhand : 17 जिलों में एक्टिव केस 100 से नीचे, रांची में अब भी हैं 1492

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
17 जिलों में एक्टिव केस 100 से नीचे
17 जिलों में एक्टिव केस 100 से नीचे
File Photo

रांची : राज्य में कोरोना के नये संक्रमितों की संख्या में कमी आने से कई जिलों की स्थिति बेहतर हो गयी है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों (सात नवंबर सुबह तक) की मानें तो राज्य के 17 ऐसे जिले हैं जहां एक्टिव केस की संख्या 100 से नीचे पहुंच गयी है. झारखंड में सबसे अधिक एक्टिव केस रांची में है. अभी रांची में 1492 एक्टिव केस हैं. वहीं छह ऐसे जिले भी हैं जहां एक्टिव केस की संख्या 50 से नीचे है.

विशेषज्ञ डॉक्टरोें का कहना है कि यह अच्छे संकेत है, लेकिन सावधानी व सतर्कता जरूरी है. अगर सावधानी व सख्ती से गाइडलाइन का पालन किया गया तो एक्टिव केस की संख्या मेें और कमी आयेगी. ठंड व सर्दी के मौसम में हल्की लापरवाही भी बरती गयी, तो कोरोना संक्रमण का आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है. कोरोना के नये संक्रमितों की संख्या में कमी आने से सरकारी अस्पताल में तैनात डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी राहत की सांस ले रहे हैं. जिला अस्पतालों में पीएचसी व सीएचसी से बुलाये गये डॉक्टरों को उनके मूल पदस्थापित जगहों पर भेजा जा रहा है.

अस्थमा व फेफड़ा रोगियों को ठंड में रखनी होगी सावधानी

अस्थमा व फेफड़ा रोगियों के लिए ठंड में बरतनी होगी सावधानी . क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों को कहना है कि अस्थमा व फेफड़ा की बीमारी से पीड़ित मरीज ही कोरोना संक्रमित होने पर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं. कोरोना होने पर निमोनिया हो जा रहा है. ऐसे मरीजों में सांस की नली में सिकुड़न पहले से ही रहती है.

एक्टिव केस की संख्या में कमी आयी है, लेकिन छठ पर्व तक इस पर ध्यान देना होगा. छठ के बाद भी अगर यही स्थिति रहती है तो झारखंड के लिए शुभ संकेत होगा. वर्तमान समय में ज्यादा कुछ कहना जल्दबाजी होगी.

डॉ मनोज कुमार,

विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी

कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी हुई है, लेकिन अगला चार माह सावधानी बरतनी जरूरी है. निमोनिया की समस्या लेकर दोबारा कोरोना संक्रमित आ रहे है. निमोनिया होने पर परेशानी बढ़ जाती है. ऐसे में अपने को बचाकर रखने की जरूरत है.

डॉ तापस कुमार,

क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ

Share Via :
Published Date
Comments (0)
metype

संबंधित खबरें

अन्य खबरें