रांची: सरायकेला-खरसांवा जिले के गम्हरिया प्रखंड स्थित निश्चितपुर गांव के किसान बहुफसली खेती अपना कर संपन्नता की ओर बढ़ रहे हैं. वर्ष 2005 में समेकित जलछाजन विकास कार्यक्रम के तहत यहां के तीन बड़े तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया. इसके अलावा केजीवीके की पहल पर पांच लॉ वेली लाइन कुएं का निर्माण किया गया है, जिनमें पूरे वर्ष पानी रहता है.
40 एकड़ क्षेत्र की सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता ग्रामीणों के अतिरिक्त आय का जरिया बनी है. केजीवीके की पहल पर खेती के क्षेत्र में श्रीविधि से धान की खेती व रबी फसलों में गेहूं, चना, सरसों जैसी फसलों के अलावा सब्जी की खेती को भी बढ़ावा दिया गया है. निश्चितपुर में एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी (आत्मा) की पहल पर कृषक पाठशाला भी शुरूकी गयी. इसमें किसानों को कृषि व इससे जुड़े क्रियाकलापों की नयी-नयी जानकारी दी जा रही है.
मछली व बकरी पालन को मिली कामयाबी : केजीवीके की पहल पर मछली पालन व बकरी पालन के क्षेत्र में किये गये कार्यो को भी बड़ी सफलता मिली है. निश्चितपुर के सफल किसान सहदेव कापरी ने बताया कि उनके गांव के रानीबांध नामक तालाब को गांव के पुरुष सहायता समूह द्वारा सरकार से ठेके पर लेकर मछली पालन किया जा रहा है. रोहू, कतला व मृगल मछली के पालन से पुरुष सहायता समूह को हर वर्ष एक लाख रुपये से ज्यादा मुनाफा हो रहा है. गांव के दूसरे तालाब में मछली पालन का कार्य दूसरे सहायता समूह के जिम्मे है.
सहदेव ने बताया कि बकरी पालन के क्ष़ेत्र में नस्ल सुधार कार्यक्रम को 100 फीसदी कामयाबी मिली है. केजीवीके द्वारा दिये गये बिट्ठल व जमानापारी नस्ल के बकरों को ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियों से क्रॉस ब्रीडिंग करायी गयी. इनके जन्मे संकर नस्ल के बकरे-बकरियों से काफी मुनाफा हो रहा है.