निर्धारित समय से पीछे चल रही है शहरी जलापूर्ति योजना

By Prabhat Khabar Digital Desk
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वरीय संवाददाता, रांचीझारखंड के शहरों में जलापूर्ति योजनाएं काफी पीछे चल रही हैं. धनबाद शहरी जलापूर्ति का काम समय पर चल रहा है. लेकिन अन्य शहरों की जलापूर्ति योजनाएं दो-तीन वर्ष पीछे चल रही हैं. इससे शहरों में लोगों को पीने का पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है. राजधानी रांची में जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी पुनरुद्धार योजना (जेएनएनयूआरएम) के तहत 2010 में ली गयी योजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है. हैदराबाद की कंपनी आइवीआरसीएल लिमिटेड को काली सूची में डालने के बाद पेयजल और स्वच्छता विभाग की ओर से निकाली गयी पुनर्निविदा को अब तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है. नतीजतन एक वर्ष में योजना में एक काम भी पूरा नहीं हो पाया है. सरकार की ओर से योजना में एलएनटी का चयन किया गया है. पर योजना में 29 फीसदी अधिक का वित्तीय दर दिये जाने से इसे कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिली है. फिलहाल योजना की पुनरीक्षित लागत 350 करोड़ के आसपास पहुंच गयी है. केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने 287 करोड़ की योजना को 2008-09 में मंजूरी दी थी. धनबाद में जेएनएनयूआरएम के तहत चल रही शहरी जलापूर्ति योजना का काम 87 प्रतिशत से अधिक पूरा हो गया है. 288 करोड़ की योजना में सिंदरी पैकेज का काम पूरा हो गया है. धनबाद शहरी जलापूर्ति का फेज-टू भी पूरा हो गया है, जिसमें 12 टावर और 250 किलोमीटर तक पाइपलाइन बिछायी गयी है. फेज-वन में 16 टावर और 100 किलोमीटर तक की पाइपलाइन बिछायी गयी है. राज्य में दुमका, मिहिजाम, जामताड़ा, कतरास, देवघर-जोन टू का काम पूरा हो गया है. चास शहरी जलापूर्ति योजना भी तीन-चार महीने में शुरू होने की उम्मीद है. झुमरीतिलैया शहर में भी स्कीम पूरा हो गया है. रांची, जमशेदपुर और धनबाद में पीपीपी मोड के तहत जलापूर्ति व्यवस्था की तैयारीसरकार की ओर से राजधानी रांची, जमशेदपुर और धनबाद में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर जलापूर्ति व्यवस्था बहाल करने की तैयारी चल रही है. राजधानी रांची के पुराने दस वार्ड में अक्तूबर 2014 से जलापूूर्ति की व्यवस्था का जिम्मा रांची नगर निगम को दे दिया जायेगा. सरकार की ओर से इस संबंध में तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं.
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