14 सालों में भी नहीं बनी नयी रांची (संपादित)

By Prabhat Khabar Digital Desk
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अब तक नयी रांची के लिए केवल सर्वे का काम किया गया राजधानी के आसपास के कुल 35 ग्रामों को मिला कर नयी रांची निर्माण की योजना बनायी गयीउत्तम महतोरांची. वर्ष 2001 में तत्कालीन सरकार ने नयी राजधानी बसाने का निर्णय लिया था. तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने नयी राजधानी का शिलान्यास किया था. दो वर्षों तक जमीन अधिग्रहण की कोशिश की गयी. उसके बाद मुख्यमंत्री के साथ-साथ नयी राजधानी की योजना भी बदल गयी. फिर जगह की तलाश शुरूहुई. फिर सरकार बदली. नाम बदल कर नयी रांची बसाने की कवायद आरंभ की गयी. नये सिरे से जगह की तलाश आरंभ हुई. जगह मिलने के पहले ही वह सरकार भी गिर गयी. राज्य गठन के 10 वर्ष बाद अंतत: नयी राजधानी के लिए स्थल का चयन किया गया. 11 वर्ष बाद परामर्शी चयनित हुआ. सर्वे के अलावा कुछ नहीं हुआअब तक नयी रांची के लिए केवल सर्वे का काम किया गया है. कांके और ओरमांझी (आंशिक) क्षेत्र में प्रस्तावित नयी रांची के लिए परामर्शी कंपनी कंसलटिंग इंजीनियरिंग सर्विसेज (सीइएस) ने सर्वे रिपोर्ट सरकार को सौंप दिया है. राजधानी के आसपास के कुल 35 ग्रामों को मिला कर नयी रांची निर्माण की योजना बनायी गयी है. वर्ष 2001 की जनगणना के मुताबिक इन ग्रामों की कुल आबादी 54,735 हजार है. नयी रांची के उपयोग में आनेवाले गांवों की कुल भूमि 28,397.95 एकड़ है. इसमें से 21,435.63 एकड़ की भूमि का स्वामित्व निजी हाथों में हैं, जबकि शेष 6962.32 एकड़ जमीन सरकारी है.93.24 एकड़ पर है कृषि फार्मसीइएस ने सरकार को नयी रांची के लिए प्रस्तावित भूमि पर किये जा रहे उपयोग की सूची भी सरकार को सौंपी है. बताया है कि प्रस्तावित नयी रांची में 93.24 एकड़ भूमि पर कृषि फार्म है. 5665.38 एकड़ भूमि पर खेत हैं. इसके अलावा 932.04 एकड़ जमीन पर भवन बने हुए हैं. भवनों के संलग्न भूमि 21.97 एकड़ है. 7.11 एकड़ भूमि पर इंस्टीट्यूट, 8.26 एकड़ भूमि पर उद्योग, 84.62 एकड़ पर ईंट भट्ठा, 58.42 एकड़ पर खुली खदान, 225.16 एकड़ भूमि पर सड़क, 15157.87 एकड़ भूमि परती, 2212.41 एकड़ भूमि अकृषित, 1814.57 एकड़ भूमि बंजर, 1257.3 एकड़ भूमि पर सब्जियों की खेती, 522.99 एकड़ पर वृक्ष और 336.51 एकड़ भूमि पर जलाशय है. जमीन अधिग्रहण का पेंचनयी रांची की प्रस्तावित जमीन का सर्वे पूरा होने के बाद मामले में जमीन अधिग्रहण का पेंच फंस गया है. राजधानी के आसपास के इलाके में बड़े पैमाने पर खेती होती है. परामर्शी कंपनी के सर्वे से यह साफ है कि प्रस्तावित नयी रांची में साढ़े पांच हजार से एकड़ से अधिक जमीन खेती योग्य है. इस प्रकार की भूमि का अधिग्रहण राज्य सरकार के लिए टेढ़ी खीर है.क्यों महत्वपूर्ण है नयी रांची की टाउन प्लानिंगराजधानी बनने के बाद रांची जिस रूप में बढ़ रही है, उसके लिए टाउन प्लानिंग की जबरदस्त आवश्यकता है. शहर की जरूरतों के मुताबिक लोगों के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के संबंध में भी इसका महत्व है. बुनियादी जरूरतों जैसे आवास, बुनियादी सुविधाओं जैसे-पानी की आपूर्ति, सिवरेज, सफाई, बिजली की आपूर्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्पताल, विभिन्न स्तरों पर शिक्षण संस्थानों के लिए बुनियादी ढांचे तैयार करने, सुरक्षा और सामाजिक सांस्कृतिक सुविधाओं के व्यावसायिक केेंद्र, परिवहन प्रणाली के साथ भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार परिवहन व उद्योग नयी रांची की टाउन प्लानिंग के महत्वपूर्ण घटक हैं.टाउन प्लानिंग के लिए इनकी है जरूरत : - शहरी क्षेत्र का विस्तार होना चाहिए- शहर के लिए मास्टर प्लान तैयार करना चाहिए- नगर निगम में तकनीकी एवं प्रशासनिक क्षमता को अविलंब बढ़ाना चाहिए- निगम में सृजित पदों पर बहाली होनी चाहिए- जनसंख्या के अनुरूप विकसित हुए नये क्षेत्रों को शहर का दरजा दिया जाना चाहिएक्यों जरूरी है टाउन प्लानिंग :- न्यूनतम विस्थापन कर भूमि का उपयोग करने के लिए- उपलब्ध भूमि का सही और योजना के मुताबिक उपयोग करने के लिए- उभरती जरूरतों के मुताबिक शहर का फैलाव करने के लिए- जमीन का उपयोग आवासीय, वाणिज्यिक, सामाजिक, परिवहन, पार्कों व मैदानों के रूप में बांटने के लिए- वातावरण और प्रकृति के संरक्षण के लिए- शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जनंसख्या का घनत्व नियंत्रित करने के लिए- संभावित सामाजिक, सांप्रदायिक, पारिस्थितिक या प्राकृतिक आपदा को न्यूनतम करने के लिए- आर्थिक स्थापना पर जोर देकर विकास को बढ़ावा देनेवाले नये केेंद्र बनाने के लिए- वाणिज्यिक गतिविधियों से होनेवाला लोड कम करने को लेकर खास कॉरिडोर विकासित करने के लिए- शहर में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रख कर केेंद्र खोजने के लिएनयी राजधानी बनती, तो यह होता फायदा : -शहर का विस्तार योजनाबद्ध तरीके से होता- ट्रैफिक का लोड कम होता-जनसंख्या के घनत्व का बंटवारा होता- आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र घोषित होने से शहर व्यवस्थित होता- सिवरेज और ड्रेनेज सिस्टम विकसित होने से बारिश में त्राहिमाम की स्थिति न होती
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