केंद्र ने आधुनीकीकरण मद में झारखंड को दी सबसे कम राशि (संपादित)

By Prabhat Khabar Digital Desk
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वरीय संवाददाता, रांचीकेंद्र सरकार ने नक्सल प्लान के तहत वित्तीय वर्ष 2014-2015 के लिए झारखंड को सबसे कम राशि दी है. अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों को ज्यादा राशि दी गयी है. गत तीन जुलाई को दिल्ली में हुई एक बैठक में झारखंड के अधिकारियों ने कम राशि दिये जाने पर आपत्ति भी जतायी है. जानकारी के केंद्र सरकार पुलिस आधुनिकीकरण मद में राज्यों को योजना और गैर योजना मद में हर साल राशि उपलब्ध कराती है. चालू वित्तीय वर्ष में राज्य को योजना मद में 14.03 करोड़ और गैर योजना मद में 8.53 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की बात कही है. योजना मद की राशि से राज्य पुलिस के लिए आधारभूत संरचना (थाना, पुलिस लाइन, बैरक आदि) का निर्माण किया जाता है, जबकि गैर योजना मद की राशि से पुलिस आधुनिकीकरण के लिए सामानों (हथियार, वाहन, बुलेट प्रूफ जैकेट, गोली आदि) की खरीद की जाती है. नक्सल प्रभावित किस राज्य को मिली कितनी राशिराज्य का नामयोजना मदगैर योजना मदझारखंड14.03 करोड़8.53 करोड़बिहार42.10 करोड़25.60 करोड़आंध्रप्रदेश63.93 करोड़38.88 करोड़छत्तीसगढ़14.81 करोड़9.01 करोड़ओडि़शा 23.78 करोड़14.46 करोड़नक्सलवादनक्सली गतिविधि की सूचना पर अभियान नहीं चलाती पुलिसवरीय संवाददाता, रांचीराज्य गठन के बाद अब तक 5100 से अधिक नक्सली घटनाएं हुई. इन घटनाओं में 1500 से अधिक लोग मारे गये. 450 से अधिक पुलिसकर्मी शहीद हुए. राज्य के 430 थाना में से 67 थाना क्षेत्र नक्सलियों का लिबरेटेड जोन माना जाता है. 49 थाना क्षेत्रों में दिन में जाने से डर लगता है. दर्जन भर से अधिक सड़कों पर रात में वाहन नहीं चलते, लेकिन राज्य पुलिस नक्सली गतिविधि की सूचना मिलने के बाद भी अभियान चलाने से कतराती है. बात चाहे गुमला-लोहरदगा, कोडरमा, रामगढ़-बोकारो की हो, हर जगह हालात एक जैसे हैं. भाकपा माओवादी के नक्सली गांव-गांव में आतंक कायम कर रहे हैं. ग्रामीणों की हत्या कर रहे हैं. बच्चों को जबरन संगठन में शामिल करने के लिए ले जा रहे हैं. स्कूलों में जाकर बच्चों को परेड करवा रहे हैं. वहीं झारखंड पुलिस के जवान बैरक या पिकेट में हैं. गुमला-लोहरदगा से बच्चों को ले जाने की खबर के बाद भी कोई बड़ा अभियान नहीं शुरू किया गया. इससे पहले 25 जनवरी 2014 को नक्सलियों का दस्ता कोडरमा के सतगावां इलाके में होने की सूचना आयी, लेकिन कोई अभियान नहीं चला. अभियान तब शुरू हुआ, जब नक्सलियों ने 11 जून 2014 को डोमचांच के ढ़ाब गांव से छह ग्रामीणों का अपहरण कर लिया. इन सूचनाओं पर भी नहीं चला अभियान- बोकारो-रामगढ़ जिला के सीमा पर जंगल में भाकपा माओवादी के मिलिट्री कमीशन के अनल मांझी, प्रसाद जी समेत कई बड़े नक्सली जमे हुए हैं. नक्सली घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. पुलिस को इसकी जानकारी है, फिर भी कोई अभियान नहीं शुरू हुआ. - खुफिया एजेंसियां लगातार सूचना दे रही है कि लातेहार-गढ़वा सीमा पर स्थित बूढ़ा पहाड़ पर नक्सलियों का दस्ता है. लेकिन सूचनाओं पर पुलिस की तरफ से कोई बड़ा अभियान नहीं शुरू किया गया. - लोकसभा चुनाव के दौरान शिकारीपाड़ा में नक्सली गतिविधि की सूचना पहले से थी, लेकिन पुलिस ने अभियान नहीं चलाया. इस कारण 24 अप्रैल 2014 को मतदान के दिन नक्सलियों ने मतदानकर्मियों व पुलिस को लेकर आ रही बस को उड़ा दिया.सबसे अधिक नक्सली घटना झारखंड मेंराज्यघटनामरेझारखंड16038छत्तीसगढ़15366आध्रप्रदेश1805बिहार8317मध्य प्रदेश0200महाराष्ट्र3721ओडि़सा5511अन्य राज्य0100कुल50915809 जिले पूरी तरह नक्सलवाद के गिरफ्त में :- चतरा, पलामू, लातेहार, गुमला, सिमडेगा, गढ़वा, गिरिडीह, लोहरदगा व खूंटी11 जिले का ग्रामीण इलाका नक्सल प्रभावित :-रांची, कोडरमा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, चाईबासा, सरायकेला, दुमका व पाकुड़.04 जिलों में चल रही गतिविधि :- जामताड़ा, गोड्डा, साहेबगंज व देवघर.रात में इन प्रमुख सड़कों पर नहीं चलते वाहनरांची-खूंटी-चाईबासा रोडरांची-खूंटी-सिमडेगा रोडरांची-गुमला रोडरांची-कुड़ू-लोहरदगा रोडरांची-कुड़ू-लातेहार-पलामू रोडहजारीबाग-कटकमसांडी-चतरा रोडहजारीबाग-बड़कागांव-चतरा रोडरांची-खलारी-टंडवा-चतरा रोडगिरिडीह-बगोदर रोडगिरिडीह-डुमरी-फुसरो रोडअपराध14 साल में हुई 18752 लोगों की हत्या- हर तरह के अपराध बढ़े, उपलब्धि घटीवरीय संवाददाता, रांची राज्य गठन के बाद 30 जून 2014 तक झारखंड में 18752 लोगों की हत्या कर दी गयी है. 9588 महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटना हुई. लूट व डकैती के क्रमश: 8149 व 5054 वारदात हुए. अपराध कम नहीं हो रहे हैं. अपराधियों में डर खत्म हो गया है. वर्ष 2013 के मुकाबले वर्ष 2014 में राज्य में हर तरह के अपराध बढ़े हैं, जबकि अपराधियों के खिलाफ पुलिस को मिलनेवाली सफलता में कमी दर्ज की गयी है. एक जनवरी से 30 जून 2014 के बीच हुई हत्या, लूट, अपहरण, डकैती जैसे अपराध वर्ष 2013 के इसी अवधि में हुए अपराध से ज्यादा है. दूसरी तरफ इसी अवधि में अपराधियों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गयी कार्रवाई में उपलब्धि में भारी कमी दर्ज की गयी है. बात चाहे गिरफ्तारी की हो या हथियारों की बरामदगी की, हर स्तर पर कमी दर्ज की गयी है. साफ है अपराधी ज्यादा सक्रिय हुए हैं, पुलिस उतने ही सुस्त. पुलिस के एक सीनियर अफसर कहते हैं : वर्ष 2014 में राज्य पुलिस उस तरह काम नहीं कर रही है, जिस तरह पिछले साल काम कर रही थी. अधिकारी को आशंका है कि पुलिस की प्राथमिकता बदल गयी है. अपराध नियंत्रण के बजाय पुलिस दूसरी तरफ ज्यादा ध्यान दे रही है. वर्ष 2013 व 2014 के छह माह (जनवरी-जून) का अपराध अपराधवर्ष 2013वर्ष 2014हत्या9741057डकैती110132लूट288297चोरी40284560अपहरण(फिरौती)2226अपहरण685716वर्ष 2013 व 2014 के छह माह (जनवरी-जून) की उपलब्धिउपलब्धिवर्ष 2013वर्ष 2014गिरफ्तारी190801530कुर्की-जब्ती80405948हथियार बरामद(नियमित)3030हथियार बरामद (देशी) 372287गोली बरामद17811424बम बरामद3717राज्य में गंभीर अपराध की स्थितिवर्षहत्यालूटडकैतीदुष्कर्म2003148286470271220041488780580797200515237325927482006149277953679920071617771524855200816977614167912009163678041271920101689709335773201117476143097842012169449428481220131630568232120420141057297132589(30 जून तक)कुल 18752814950549588
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