दौड़ते रहे जायेंगे, कम होगा तभी जब बाबू चाहेंगे

By Prabhat Khabar Digital Desk
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हाल रांची कोषागार का- यहां बाबुओं की चलती है, पैसे नहीं दिये तो लगा देते हैं अड़ंगावरीय संवाददाता, रांचीयोगेंद्र यादव एक साल से ट्रेजरी का चक्कर लगा रहे हैं. वह 2013 में रिटायर हुए थे. अब तक पेंशन का कागज नहीं बना. करीब हर दिन वह ट्रेजरी आते हैं. साहब लोगों से मुलाकात करते हैं. लेकिन, केवल आश्वासन ही मिलता है. यादव जी संघ से भी जुड़े हुए हैं. कहते हैं कि जब संघ के पदाधिकारी की स्थिति यह है, तो अन्य लोगों का क्या होता होगा. कहते हैं हर बार कोई ना कोई बहना बता टाल दिया जाता है. ट्रेजरी के आसपास हर दिन दर्जनों शिक्षक, कर्मचारी, ठेकेदार चक्कर लगाते दिख जाते हैं. सबका कहना है कि बिना चढ़ावे का यहां कोई काम नहीं होता है. हर काम के लिए शुल्क तय है. रांची के उपायुक्त भी रांची ट्रेजरी की इस स्थिति पर चिंता जताते हैं. सभी का हिस्सा तय दिन भर के कलेक्शन को एक कागज में नोट किया जाता है. शाम को एक पन्ने पर हिसाब होता है. कुछ अधिकारी तो घर से लेन देन करते हैं. ऊपर से नीचे तक के कर्मचारी और अधिकारी का हिस्सा तय है. तीन दिन में निबटाना है बिल वित्त विभाग के आदेश के अनुसार, किसी भी बिल को तीन दिनों के भीतर निष्पादित कर देना है लेकिन, यहां कई ऐसे विपत्र हैं जो कई दिनों से लंबित पड़े हुए हैं. कर्मचारियों की शिकायत है कि कभी-कभी तो आवेदन से कुछ कागज भी गायब कर दिये जाते हैं. कागज नहीं होने का बहाना बना कर लटका दिया जाता है. रिसीविंग का कोई प्रावधान नहीं होने के कारण किसी की जिम्मेदारी भी तय नहीं होती है. एक माह का पेंशन भी मांगते हैंअगर कोई रिटायर कर्मचारी हैं और उनका बकाया है तो उसे पास करवाने के लिए यहां के बाबू एक माह का पेंशन भी मांग बैठते हैं.सभी कार्य के लिए तय है रेटरिटायरमेंट बेनीफिट : 1-2 प्रतिशतकंटीजेंसी फंड: 1-2 प्रतिशतएरियर विपत्र: 1-2 प्रतिशतस्टांप: 10 हजार रुपयेवर्जन....ट्रेजरी के बारे में इस तरह की कई शिकायतें मिली हैं, जो शिकायतें मिल रही हैं वो गंभीर है. बैठक में भी कई बार निर्देश दिया गया है कि अधिकारी व कर्मचारी अपनी कार्य संस्कृति में सुधार लायें. जांच के बाद ही मामला सामने आयेगा.विनय चौबे, उपायुक्त रांची
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