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ब्लास्टिंग जोन में CUJ कैंपस बसाने का मामला : क्रशर बंद कराने के लिए वर्ष 2013 से ही सरकार से गुहार लगा रहा CUJ, नहीं हुई सुनवाई

Updated at : 21 Feb 2020 7:14 AM (IST)
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ब्लास्टिंग जोन में CUJ कैंपस बसाने का मामला : क्रशर बंद कराने के लिए वर्ष 2013 से ही सरकार से गुहार लगा रहा CUJ, नहीं हुई सुनवाई

रांची : सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (सीयूजे) कांके प्रखंड स्थित चेरी-मनातू में बन रहे नये कैंपस के आसपास से पत्थर उत्खनन और क्रशर बंद कराने के लिए वर्ष 2013 से ही गुहार लगा रही है. इसके लिए राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, जिला खनन पदाधिकारी, खनन सचिव से आग्रह किया जा चुका है. विवि प्रशासन […]

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रांची : सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (सीयूजे) कांके प्रखंड स्थित चेरी-मनातू में बन रहे नये कैंपस के आसपास से पत्थर उत्खनन और क्रशर बंद कराने के लिए वर्ष 2013 से ही गुहार लगा रही है. इसके लिए राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, जिला खनन पदाधिकारी, खनन सचिव से आग्रह किया जा चुका है. विवि प्रशासन के साथ-साथ नये कैंपस में काम करा रहे ठेकेदार ने भी संबंधित अधिकारी से क्रशर बंद कराने का आग्रह किया. विवि प्रशासन ने इससे संबंधित आठ पत्र भेजा है, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई. बल्कि तीन कंपनियों को खनन विभाग ने पत्थर कटाई के लिए लीज दे दिया.
विवि प्रशासन ने सरकार से गुहार लगायी कि कैंपस से सटे पहाड़ पर से पत्थर काटने के लिए ब्लास्ट किया जा रहा है. जब कैंपस में पठन-पाठन शुरू हो जायेगा व विद्यार्थी रहने लगेंगे, तो परेशानी हो सकती है. अन्य खतरों के साथ-साथ वातावरण भी प्रभावित होगा अौर इस कैंपस में रहनेवाले के लिए प्रदूषण से झेलना पड़ेगा. इतना ही नहीं कुलपति और विवि प्रशासन के अधिकारी नये कैंपस के लिए एप्रोच रोड को लेकर भी परेशान हैं.
रिंग रोड से नये कैंपस में प्रवेश के लिए 1.7 किमी एप्रोच रोड उपलब्ध कराने के लिए राज्यपाल, सीएम, सीएस, रोड सेक्रेटरी, डीसी से कई बार आग्रह किया गया. 2019 में एक बार टेंडर भी निकला, लेकिन इस मद में खर्च के लिए लगभग 47 करोड़ नहीं मिले. फलस्वरूप एप्रोच रोड के लिए भूमि अधिग्रहण भी नहीं हो सका. सड़क के लिए पथ सचिव को जून 2019 में फिर से प्राक्कलन जमा किया गया है. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
नये कैंपस में काम करा रहे ठेकेदार ने भी संबंधित अधिकारी से क्रशर बंद कराने का किया था आग्रह
1.7 किमी एप्रोच रोड के लिए राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, सेक्रेटरी, डीसी से कई बार किया गया है आग्रह
राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण रैयती जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अब तक आगे नहीं बढ़ी
भू-अर्जन कार्यालय को मिले हैं िसर्फ 10 करोड़ रुपये
जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया अब तक लंबित
नये कैंपस के लिए 139.17 एकड़ रैयती जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया 18 फरवरी 2019 से जारी है, जो अब भी लंबित है. वर्ष 2009 में राज्य सरकार व विवि के बीच एमअोयू में जमीन राज्य सरकार को उपलब्ध करानी है. इस बाबत अधिग्रहण संबंधी प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने के बाद जिला भू-अर्जन कार्यालय ने विवि से 604 करोड़ 20 लाख 70,000 रुपये मुआवजा राशि की मांग की. राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पायी. भू-अर्जन कार्यालय को सिर्फ 10 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये गये हैं.
23 फरवरी 2013 को रखी गयी थी आधारशिला
23 फरवरी 2013 को तत्कालीन कुलपित डीटी खटिंग ने चेरी-मनातू में सीयूजे कैंपस की नींव रखी थी. 500 करोड़ की लागत से कैंपस का निर्माण शुरू हुआ था. स्कूल बिल्डिंग, दो ब्यॉज हॉस्टल, एक बहुमंजिला गर्ल्स हॉस्टल बन कर लगभग तैयार हैं.
मुख्य सचिव ने उपायुक्त को दिया निर्देश
मुख्य सचिव डीके तिवारी ने सीयूजे कैंपस के पास बलास्टिंग जोन में माइनिंग कार्य व पहाड़ों से पत्थर को लेकर उपायुक्त राय महिमापत रे को निर्देश दिया है. मुख्य सचिव ने कहा कि प्रभात खबर में प्रकाशित इस मामले को देखें तथा आवश्यक कार्रवाई करें.
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