एसीबी ने मोमेंटम झारखंड घोटाले की जांच शुरू करने की अनुमति सरकार से मांगी

Updated at : 09 Feb 2020 7:46 AM (IST)
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एसीबी ने मोमेंटम झारखंड घोटाले की जांच शुरू करने की अनुमति सरकार से मांगी

शिकायत की फाइल एसीबी ने मंत्रिमंडल निगरानी विभाग को भेजी रांची : मोमेंटम झारखंड ग्लोबल इनवेस्टर समिट 2017 में घोटाले से संबंधित शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पास भेज दी गयी है. शिकायत पर विभाग और सरकार से अनुमति मिलने के बाद एसीबी द्वारा मामले में पीई (प्रांरभिक जांच) दर्ज […]

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शिकायत की फाइल एसीबी ने मंत्रिमंडल निगरानी विभाग को भेजी
रांची : मोमेंटम झारखंड ग्लोबल इनवेस्टर समिट 2017 में घोटाले से संबंधित शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पास भेज दी गयी है. शिकायत पर विभाग और सरकार से अनुमति मिलने के बाद एसीबी द्वारा मामले में पीई (प्रांरभिक जांच) दर्ज कर जांच शुरू कर दी जायेगी. जांच के दौरान घोटाले से संबंधित तथ्य आने के बाद एसीबी की ओर से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे अनुसंधान के लिए अनुमति ली जायेगी. घोटाले की शिकायत एसीबी से पंकज कुमार यादव ने की थी. इसमें मोमेंटम झारखंड के नाम पर करोड़ों के घोटाले और 100 करोड़ रुपये पब्लिक मनी का दुरुपयोग किये जाने की शिकायत की गयी है.
मामले में पूर्व में हाइकोर्ट में पीआइएल दायर की गयी थी. इसमें कोर्ट ने एसीबी में जाने का सुझाव दिया था. शिकायतकर्ता पंकज यादव ने अपनी शिकायत में इसके लिए पूर्व सीएम रघुवर दास, पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, उद्योग निदेशक के रवि कुमार, कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के राहुल सिंह, सीएम के तत्कालीन प्रधान सचिव संजय कुमार, सुमित कुमार सहित अन्य लोगों को जिम्मेवार ठहराते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है. शिकायत में इस बात का उल्लेख भी है 220790 करोड़ निवेश के प्रस्ताव मिलने की बात महज छलावा साबित हुई.
ऑर्गनाइजिंग कमेटी सीआइआइ (कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज) की ओर से कर्टेन रेजर कार्यक्रम, दूतावास मुलाकात, घरेलू रोड शो आदि के नाम पर 7.5 करोड़ रुपये खर्च किये गये. लेकिन इसका लाभ जनता को नहीं मिला. सीआइआइ द्वारा यूएसए, यूके, जर्मनी जैसे देशों में रोड शो का आयोजन किया गया. जहां लोग झारखंड को जानते भी नहीं थे.
लेकिन अफसरों में राजबाला वर्मा, संजय कुमार, के रवि कुमार व सुनील कुमार वर्णवाल ने लोगों, राजनेताओं व मुख्यमंत्री को भी अपने निजी स्वार्थ के कारण दिग्भ्रमित किया. पोस्टेज व कुरियर मद में 7.5 लाख से 15 लाख, सिक्यूरिटी में नौ लाख से 12.50 लाख, फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी में 10 से 15 लाख, ब्रांडिंग में 20 लाख से 45 लाख, बीमा में दो लाख से 7.5 लाख तक बढ़ाया गया. आयोजकों ने अतिथियों के लिए 1.25 करोड़ में चार्टर्ड प्लेन की व्यवस्था की थी. लेकिन इसमें 90 फीसदी सीट खाली ही रही. उद्यमी अपने निजी विमान से समिट में शामिल होने आये.
पंकज यादव ने की थी एसीबी से शिकायत बिना मंजूरी बजट बढ़ाकर सौ करोड़ किया
शिकायतकर्ता पंकज यादव ने दावा किया है कि समिट का आयोजन 16-17 फरवरी 2017 को हुआ था. इसका बजट 8.50 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 16.94 करोड़ किया गया. फिर इसे बढ़ाकर 100 करोड़ कर दिया गया, जबकि इसकी मंजूरी कैबिनेट से नहीं ली गयी. खर्च 8.50 से बढ़ाकर लगभग 17 करोड़ किये जाने पर तत्कालीन उद्योग निदेशक ने भी गहरा एतराज जताया था. इसमें आश्चर्यजनक बात यह है कि कई ऐसे उद्योगों ने निवेश करने का प्रस्ताव दिया था, जो पहले से ही यहां काम कर रहे थे.
निवेशकों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं
निवेशकों के लिए 4.91 एकड़ जमीन की मांग की गयी थी, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा कहा गया था कि एक जिले में इतनी जमीन उपलब्ध नहीं है. यह जानते हुए भी की जमीन उपलब्ध नहीं है, फिर भी अधिकारियों ने उद्यमियों को धोखा दिया. रांची को चमकाने के लिए करदाताओं के करोड़ों रुपये समिट के दौरान खर्च किये गये. लेकिन कुछ दिनों बाद ही शहर की स्थिति पहले जैसी हो गयी. यह कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जिसे अंकित किया गया है, लेकिन इसके अलावा भी कई चीजें है जिसकी जांच जरूरी है.
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