झारखंड से बाहर के कई संस्थानों और छात्रों ने कल्याण विभाग से फर्जी तरीके से ली छात्रवृत्ति़, गिरेगी गाज

By Prabhat Khabar Digital Desk
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राज्य से बाहर के 12 संस्थानों का पता चला
रांची : राज्य से बाहर के कई संस्थानों को ब्लैक लिस्टेड किया जायेगा तथा वहां नामांकित विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति की राशि वसूली जायेगी. इन संस्थानों व विद्यार्थियों ने झारखंड सरकार के कल्याण विभाग से फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति ली है. इन पर प्राथमिकी भी दर्ज होगी. जानकारी के अनुसार 500 से अधिक विद्यार्थियों के नाम पर छात्रवृत्ति ली गयी है. मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ में निरीक्षण के दौरान करीब 12 फर्जी संस्थानों का पता चला है. हालांकि इस पर अंतिम निर्णय आदिवासी कल्याण आयुक्त की अध्यक्षतावाली कमेटी करेगी.
विभाग ने कराया निरीक्षण : दरअसल, विभाग ने कुछ राज्यों में स्थित उन संस्थानों का निरीक्षण कराया था, जहां झारखंड के 10 से अधिक विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने की सूचना थी. विभाग के एक या दो लोगों को संबंधित कॉलेजों की सूची सौंप कर उन्हें निरीक्षण के लिए भेजा गया था. निरीक्षण के दौरान कई राज्यों में नर्सिंग व बीएड कोर्स वाले फर्जी कॉलेजों का पता चला है. वहां किसी मकान या भवन में इन संस्थानों का बोर्ड तो लगा है, पर पढ़ाई नहीं होती. वहां झारखंड के विद्यार्थी नामांकित दिखाये गये हैं, पर यह उनके नाम पर सिर्फ छात्रवृत्ति वसूलने का जुगाड़ है.
ज्ञात हो कि दो वर्षीय बीएड कोर्स के लिए एक विद्यार्थी को प्रति वर्ष अधिकतम 40 हजार रुपये तथा दो वर्षीय नर्सिंग कोर्स के लिए अधिकतम 40 हजार रुपये प्रति वर्ष प्रति विद्यार्थी छात्रवृत्ति दी जाती है.
दरअसल संस्थान विद्यार्थियों के नाम से खाता खोल कर व चेक पर उनसे साइन लेकर उन्हें घर भेज देता है. बाद में छात्रवृत्ति की राशि सेल्फ चेक के माध्यम से संस्थान प्रबंधन खुद निकाल लेता है. इधर, विद्यार्थियों को बगैर कॉलेज गये व पढ़ाई किये बीएड का फर्जी सर्टिफिकेट दे दिया जाता है.
एक ही कैंपस में दो-दो बीएड कॉलेज : संस्थानों के निरीक्षण के लिए विशाखापत्तनम गये दल के मुताबिक, वहां एक ही कैंपस में दो बीएड कॉलेज चलाये जा रहे थे. इन दोनों में झारखंड के विद्यार्थियों के नाम विभाग के पास हैं. पता चला कि यहां बीएड की पढ़ाई ही नहीं होती. एक का नाम क्रिस्ट कॉलेज अॉफ एजुकेशन तथा दूसरे का नाम जीसस डोग्गा कॉलेज अॉफ एजुकेशन है.
एक ही भवन में दिखाये गये दोनों कॉलेज विशाखापत्तनम के कोट्टावालसा इलाके में हैं. यहां गये निरीक्षण दल को कॉलेज के पास भी कोई स्थानीय व्यक्ति नहीं बता पा रहा था कि संबंधित कॉलेज यही है. यही नहीं निरीक्षण दल जब वहां पहुंचा, तो वहां कोई स्कूल चल रहा था. बाद में प्रबंधन ने कहा कि हमारा डिस्टेंस लर्निंग कोर्स है, जबकि विभाग को फुल टाइम कोर्स बताया गया है. झारखंड के कुछ ऐसे विद्यार्थियों की भी सूचना विभाग को मिली है, जो कभी विशाखापत्तनम गये ही नहीं. दल के सामने ही एक सिस्टर रोने भी लगी.
राज्य के बाहर बीएड व नर्सिंग कोर्स पर होगा विचार
कल्याण विभाग ने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए झारखंड अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पिछड़ी जाति प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना नियमावली-2018 बनायी है. नियमावली के तहत राज्य के बाहर के विवि व संस्थानों से सामान्य स्नातक कोर्स जैसे बीए, बीएससी व बीकॉम सहित आइटीआइ व डिप्लोमा जैसे नन डिग्री स्तरीय तकनीकी व अन्य कोर्स (जिसमें प्रवेश की योग्यता 10 वीं पास होती है) में शिक्षा ले रहे विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं दी जाती है. सूत्रों के अनुसार, इसी तरह की पाबंदी नर्सिंग व बीएड कोर्स के लिए भी लगायी जा सकती है. गौरतलब है कि इन दोनों कोर्स के लिए झारखंड में भी कई संस्थान हैं.
फर्जी संस्थानों ने रखा है अपना एजेंट
कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ऐसे कॉलेजों द्वारा झारखंड के विद्यार्थियों का नामांकन लेने के लिए बकायदा एजेंट नियुक्त किया गया है. मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ में निरीक्षण के दौरान करीब 12 फर्जी संस्थानों का पता चला है. वहीं पांच सौ से अधिक विद्यार्थियों के नाम पर छात्रवृत्ति ली गयी है.
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