रांची : फंसेंगे कई और अभियंता, जांच कमेटी बनेगी

Updated at : 28 Jan 2020 6:41 AM (IST)
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रांची : फंसेंगे कई और अभियंता, जांच कमेटी बनेगी

रांची : पथ निर्माण विभाग में इस्टीमेट व टेंडर गड़बड़ी के मामले में कई और अभियंता फसेंगे. प्रथम दृष्टया इस मामले में विभाग के टेक्निकल हेड को जिम्मेवार माना गया है. इस तरह अभियंता प्रमुख रास बिहारी सिंह पर कार्रवाई की गयी है. यह देखा जायेगा कि इस मामले में और कौन-कौन जिम्मेवार हैं. इस […]

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रांची : पथ निर्माण विभाग में इस्टीमेट व टेंडर गड़बड़ी के मामले में कई और अभियंता फसेंगे. प्रथम दृष्टया इस मामले में विभाग के टेक्निकल हेड को जिम्मेवार माना गया है. इस तरह अभियंता प्रमुख रास बिहारी सिंह पर कार्रवाई की गयी है. यह देखा जायेगा कि इस मामले में और कौन-कौन जिम्मेवार हैं. इस तरह दोषियों को चिह्नित करने के बाद उन पर आरोप तय किये जायेंगे. फिर कार्रवाई की जायेगी.
पूरे मामले की जांच के लिए मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी ने विकास आयुक्त की अध्यक्षता में पांच विभागों के सचिवों की कमेटी बनायी है. पूरा मामला तकनीकी से जुड़ा हुआ है. ऐसे में इस मामले की जांच के लिए टेक्निकल टीम की आवश्यकता है.
मुख्य सचिव ने इस कमेटी को तकनीकी समिति बनाने को कहा है. इसमें संयुक्त सचिव या उप सचिव रैंक के पदाधिकारी को संयोजक बनाने को कहा है. इंजीनियरों का कहना है कि तकनीकी जांच के दौरान के इस बिंदु पर भी ध्यान दिया जायेगा कि शिड्यूल ऑफ दर (एसओआर) तैयार करने में और किनकी भूमिका है. मुख्य अभियंता व अधीक्षण अभियंता स्तर के इंजीनियरों का भी इसमें हस्ताक्षर होता है. कमेटी में कई सदस्य होते हैं. यही स्थिति टेंडर निबटारा के मामले में भी है.
क्या है मामला : मुख्यमंत्री के निर्देश पर दो दिन पूर्व पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख रास बिहारी सिंह को निलंबित कर दिया गया. शिड्यूल अॉफ रेट में गड़बड़ी व टेंडर निष्पादन में अनियमितता के मामले को लेकर उन्हें सस्पेंड किया गया है. यह पाया गया है कि ग्रामीण कार्य विभाग व पथ निर्माण विभाग के एसअोआर में भारी विषमता है.
दोनों विभाग के एक ही प्रकृति के समान काम में रेट का अत्याधिक अंतर पाया गया है. पथ निर्माण विभाग अत्याधिक रेट पर काम करा रहा था. इतना ही नहीं जिस दर पर योजना का टेंडर हुआ है, उससे 10 फीसदी तक कम दर भरने पर निविदा समिति की अनुशंसा लेकर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति लेनी है, जबकि यहां 30 फीसदी कम तक का रेट भरा गया है और उसे कमेटी ने स्वीकृति दी है.
विभाग ने माना है कि अगर ठेकेदार 30 फीसदी कम रेट पर भी काम करने को इच्छुक हैं, तो कहीं न कहीं इस्टीमेट में बड़ी गड़बड़ी की संभावना हो सकती है. इन सारे मामलों को लेकर कार्रवाई की गयी है.
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