रांची : 30 मरीजों के इलाज की होगी सुविधा

Updated at : 14 Jan 2020 9:14 AM (IST)
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रांची : 30 मरीजों के इलाज की होगी सुविधा

ट्रॉमा सेंटर में फरवरी माह से शुरू हो सकता है सेंट्रल इमरजेंसी का संचालन रांची : रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में सेंट्रल इमरजेंसी का संचालन फरवरी के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है. इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है. कमियों को दूर किया जा रहा है. ट्रॉमा सेंटर के निचले तल्ले पर […]

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ट्रॉमा सेंटर में फरवरी माह से शुरू हो सकता है सेंट्रल इमरजेंसी का संचालन
रांची : रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में सेंट्रल इमरजेंसी का संचालन फरवरी के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है. इसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है. कमियों को दूर किया जा रहा है.
ट्रॉमा सेंटर के निचले तल्ले पर भर्ती ट्रॉमा के मरीजों को ऊपरी तल्ले पर शिफ्ट कर दिया गया. निचले तल्ले पर अब सेंट्रल इमरजेंसी का संचालन होगा. सेंट्रल इमरजेंसी में 25 से 30 मरीजों के लिए बेड की व्यवस्था होगी. हालांकि संचालन से पहले रिम्स प्रबंधन एडवाइजरी कमेटी के साथ बैठक कर विचार-विमर्श करेगा.अगर किसी प्रकार के परिवर्तन के लिए एडवाइजरी कमेटी सुझाव देगी, तो उसके हिसाब से बदलाव भी किया जायेगा. वर्तमान में सेंट्रल इमरजेंसी का संचालन पुरानी बिल्डिंग में किया जा रहा है, जहां सीमित मात्रा में मरीजों का इलाज किया जा रहा है. जगह की कमी के कारण यहां किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जा सकता है.
इसलिए ट्रॉमा सेंटर को सेंट्रल इमरजेंसी की व्यवस्था की जा रही है. वर्तमान इमरजेंसी 18 बेड ही है. नयी व्यवस्था में बेड की संख्या बढ़ कर 30 हो जायेगी. सूत्रों की मानें, तो रिम्स प्रबंधन सेंट्रल इमरजेंसी में सिर्फ सर्जरी से संबंधित मरीजों को ही रखना चाहता है. मेडिसिन से पीड़ित गंभीर मरीजों के लिए वहां बहुत कम बेड होंगे.
वर्तमान व्यवस्था में यह है चुनौती : ट्रॉमा सेंटर में अभी गैस सिलिंडर से ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है. इसके लिए छह आदमी को वहां तैनात किया गया है. सिलिंडर से ऑक्सीजन की सप्लाई होने के कारण इसके किसी भी समय खत्म होने की आशंका बनी रहती है. ऐसे में कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
निचले तल्ले पर भर्ती मरीजों को ऊपरी तल्ले पर शिफ्ट किया गया है
लिक्विड टैंक लगाने के लिए दिया गया कार्यादेश
ट्रॉमा सेंटर में ऑक्सीजन सप्लाई की समस्या के स्थायी निदान के लिए परिसर में लिक्विड ऑक्सीजन टैंक का निर्माण कराया जा रहा है. इसके लिए एजेंसी का चयन कर उसे कार्यादेश दे दिया गया है. उम्मीद है कि इस माह के अंत तक लिक्विड टैंक से ऑक्सीजन की सप्लाई पूरे ट्रॉमा सेंटर की बिल्डिंग में शुरू हो जायेगी.
ट्रॉमा सेंटर के निचले तल्ले पर सेंट्रल इमरजेंसी शुरू की जानी है. इसकी क्षमता करीब 30 मरीजों की होगी. लिक्विड ऑक्सीजन टैंक के लिए एजेंसी काे कार्यादेश दिया गया है. उम्मीद है कि फरवरी से यहां सेंट्रल इमरजेंसी शुरू हो जायेगी.
डॉ दिनेश कुमार सिंह, निदेशक, रिम्स
रांची :एक साथ दोनों घुटने का हुआ प्रत्यारोपण
रांची : रिम्स में हड्डी विभाग के डॉक्टरों ने एक साथ बीएसएफ जवान के दोनों घुटने का सफल प्रत्यारोपण किया. विभागाध्यक्ष डॉ एलबी मांझी की टीम ने शनिवार को बीएसएफ में कार्यरत 44 वर्षीय जवान के दोनों घुटने का प्रत्यारोपण किया. जवान घुटने में असहनीय दर्द की समस्या से पीड़ित था. इस कारण नौकरी के अलावा उसका दैनिक जीवन भी प्रभावित हो गया था. आर्मी अस्पताल से उसे रिम्स के हड्डी विभाग में रेफर किया गया था. ओपीडी में चिकित्सीय जांच के बाद उसके दोनों घुटने का प्रत्यारोपण करने का फैसला लिया गया.
विभागाध्यक्ष डॉ एलबी मांझी ने बताया कि पहली बार एक साथ दोनों घुटने का प्रत्यारोपण किया गया है. दो दिन पहले उसकी सर्जरी की गयी. सोमवार को वह अपने पैर पर खड़ा हो गया है.
शीघ्र वह खुद से चलना शुरू कर देगा. उन्होंने बताया कि रिम्स में अबतक लगभग दो दर्जन मरीजों के घुटना का प्रत्यारोपण किया गया है. निजी अस्पताल में दोनों घुटने के प्रत्यारोपण का खर्च लगभग छह लाख रुपये आता है, लेकिन रिम्स में डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया. ऑपरेशन करनेवाली टीम में डॉ एलबी मांझी के अलावा डॉ शशि, डॉ रवींद्र,डॉ राजकुमार, डॉ विमल थापा, डॉ सत्येंद्र, डॉ महेश, डॉ आशीष पाल, डॉ प्रवीण, डॉ राजेश आदि शामिल थे.
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