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झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई, दिया आदेश, स्टील कंपनी 1.28 करोड़ मुआवजा दें

Updated at : 14 Jan 2020 6:58 AM (IST)
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झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई, दिया आदेश, स्टील कंपनी 1.28 करोड़ मुआवजा दें

रांची : झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पांच स्टील कंपनियों से प्लांट लगाने से पर्यावरण को होनेवाले नुकसान के मद में 1.28 करोड़ रुपये मुआवजा मांगा है. आदेश जारी होने के एक माह में राशि जमा करने को कहा गया है. ऐसा न करने पर हर माह 12% की दर से ब्याज देना होगा. […]

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रांची : झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पांच स्टील कंपनियों से प्लांट लगाने से पर्यावरण को होनेवाले नुकसान के मद में 1.28 करोड़ रुपये मुआवजा मांगा है. आदेश जारी होने के एक माह में राशि जमा करने को कहा गया है. ऐसा न करने पर हर माह 12% की दर से ब्याज देना होगा.
इन कंपनियों की विस्तारित इकाई को अगस्त-सितंबर माह में संचालन की अनुमति बोर्ड ने दी थी. संचालन अनुमति की अवधि के दौरान ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नयी गाइडलाइन के आधार पर प्रदूषण की गणना की जा रही है. इसके तहत उद्योग का तीन माह का प्रदूषण का डाटा जमा होना है. इसके आधार पर एनवायरमेंट कंपनसेशन लेवी तय होती है.
तीन कंपनियों को 26-26 लाख देने का निर्देश : बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बख्शी ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मद में तीन कंपनियों को करीब 26-26 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है.
चार कंपनियों ने 88 दिनों तक उद्योग से होनेवाले उत्सर्जन का डाटा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नहीं दिया था. बालमुकुंद आयरन एंड स्टील, गिरिडीह पर करीब 76 दिनों का मुआवजा तय किया गया है. इसके लिए बोर्ड ने इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था. नोटिस से असंतुष्ट होने के बाद बोर्ड ने इन पर लगनेवाले मुआवजे का आकलन कराया है.
तय अवधि में उत्सर्जन की नहीं दी जानकारी
किस कंपनी पर कितना मुआवजा
कंपनी तय मुआवजा
चिंतपूर्णी स्टील प्राइवेट लिमिटेड, रामगढ़ 26.40 लाख
शिवम अायरन एंड स्टील कंपनी, कोडरमा 26.40 लाख
संतपुरिया एलॉय प्रा लिमिटेड, गिरिडीह 26.40 लाख
बालमुकुंद आयरन एंड स्टील, गिरिडीह 22.80 लाख
अनंदिता स्टील लिमिटेड, हजारीबाग 17.60 लाख
नयी गाइडलाइन के तहत किया अध्ययन
हजारीबाग स्थित अनंदिता स्टील लिमिटेड ने 88 दिनों तक मशीन खराब होने की बात के आधार पर उत्सर्जन का डाटा नहीं दिया. कंपनी के जवाब के बाद असंतुष्ट बोर्ड ने बोर्ड की गाइडलाइन के तहत अलग से अध्ययन कराया. अध्ययन के बाद 17.60 लाख रुपये एनवायरमेंट कंपनसेशन लेवी के रूप में देने का निर्देश दिया. करीब 2.60 करोड़ रुपये की निवेश लागत से कंपनी का संचालन हो रहा है.
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