रांची : रिम्स के गार्ड कर रहे हैं पारा मेडिकल का काम, कैसे कम होगा मौत का आंकड़ा

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के शिशु रोग विभाग में पिछले साल नवंबर व दिसंबर (60 दिन) में इलाज के दौरान 178 बच्चों की मौत हो चुकी है. वहीं, एक साल में 1246 बच्चों की मौत का आंकड़ा सामने आया है.
इतनी गंभीर स्थिति होने के बावजूद यहां बच्चों के इलाज में लापरवाही बरती जा रही है. बुधवार को रिम्स की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) में डॉक्टर और नर्स के रहते हुए निजी सुरक्षा एजेंसी का गार्ड गंभीर रूप से बीमार बच्ची को निमोलाइजर से दवा दे रहा था. प्रभात खबर संवाददाता ने इसकी तस्वीर अपने कैमरे में कैद की है.
पीआइसीयू में आठ बीमार बच्चे भर्ती हैं. इनमें से दो की हालत बेहद गंभीर है. उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है. एक बच्चे को ऑक्सीजन लगा है.
वहीं, तीन माह की एक बच्ची को निमोनिया है, उसे निमोलाइजर द्वारा दवा दी जा रही है. बुधवार को बच्ची की स्थिति गंभीर होने पर विभाग में मौजूद डॉक्टर ने निमोलाइजर देने को कह कर वहां से चले गये. इसके बाद न तो नर्स और न ही जूनियर डॉक्टर बच्ची को निमोलाइजर देने पहुंचे. थोड़ी देर बाद वहां निजी एजेंसी का एक सुरक्षा गार्ड पहुंचा और बच्ची को निमोलाइजर से दवा देने लगा.
जब प्रभात खबर संवाददाता ने उसकी तस्वीर अपने कैमरे में कैद की, तो सुरक्षा गार्ड वहां से खिसकने लगा और बच्ची के परिजन को खुद ही निमोलाइजर लगाने की हिदायत दे दी. जब गार्ड से पूछा गया कि उसने किस हैसियत से बच्ची को निमाेलाइजर से दवा दी, तो उसने कहा : डॉक्टर साहब बोल कर गये हैं कि तुम ये छाेटे-मोटे काम कर लिया करो. इधर, महिला परिजन को मास्क लगाने में दिक्कत हो रही थी. वह दूसरी महिला के सहयोग से मास्क लगाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी. परिजनों ने बताया कि इस दवा से फेफड़ा को गर्मी मिलती है.
दो नर्स और पांच जूनियर डॉक्टर की रहती है ड्यूटी
रिम्स के पीडिया वन वार्ड में शिशु इमरजेंसी और पीआइसीयू है. यहां दो नर्स और पांच जूनियर डॉक्टर की ड्यूटी रहते हैं. गंभीर बच्चों को परामर्श देने व भर्ती करने का जिम्मा इन्हीं पर है.
शिशु वार्ड में वर्ष 2019 में हुई मौतें
माह संख्या
जनवरी 93
फरवरी 91
मार्च 87
अप्रैल 92
मई 93
जूून 107
जुलाई 93
अगस्त 132
सितंबर 136
अक्तूबर 136
नवंबर 119
दिसंबर 67
कुल 1246
हर विभाग में पर्याप्त डॉक्टर व नर्स हैं. गार्ड द्वारा उपकरण छूने व मरीज के इलाज का तो सवाल ही नहीं है. अगर प्रमाण मिला, तो गार्ड के साथ पूरे शिशु विभाग पर कार्रवाई करूंगा.
-डॉ दिनेश कुमार सिंह
निदेशक, रिम्स

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