रांची : केसीबी कॉलेज बेड़ो के तीन शिक्षक बर्खास्त, अब पैसा वसूलेगा विवि, जानें क्‍या है पूरा मामला

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Dec 2019 1:34 AM

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जांच समिति ने शैक्षणिक प्रमाण पत्र को जाली पाया था रांची : रांची विश्वविद्यालय के केसीबी कॉलेज बेड़ो के तीन शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है. विवि की जांच समिति ने तीनों शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र को जाली पाया था. बर्खास्तगी का यह फैसला सोमवार को सिंडिकेट की बैठक में लिया गया. इसके […]

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जांच समिति ने शैक्षणिक प्रमाण पत्र को जाली पाया था
रांची : रांची विश्वविद्यालय के केसीबी कॉलेज बेड़ो के तीन शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है. विवि की जांच समिति ने तीनों शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र को जाली पाया था. बर्खास्तगी का यह फैसला सोमवार को सिंडिकेट की बैठक में लिया गया.
इसके साथ ही सिंडिकेट ने नयी जांच कमेटी बनायी है, जो दस साल पहले इस मामले में हुई गलती की जांच करेगी. वहीं पीजी सेमेस्टर की बढ़ी हुई फीस को स्थगित कर दिया गया है. इसके अलावा बैठक में प्रोन्नति, अनुकंपा सहित 24 एजेंडों पर चर्चा की गयी और निर्णय लिया गया. बैठक में वीसी डॉ रमेश कुमार पांडे, प्रो वीसी डॉ कामिनी कुमार, कुलसचिव डॉ अमर कुमार चौधरी, डीएसडब्ल्यू डॉ पीके वर्मा सहित सिंडिकेट के सदस्य मौजूद थे.
इन तीन शिक्षकों को किया गया बर्खास्त : केसीबी कॉलेज बेड़ो के तीन शिक्षक उमेश नाथ तिवारी, मो जमील असगर और प्रतिमा सिन्हा को बर्खास्त किया गया है. साथ ही यह फैसला भी लिया गया कि व्यय की गयी राशि भी वसूल की जाये. मालूम हो कि विवि को 2008-09 में तीनों शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी होने की शिकायत मिली थी. विवि ने जांच कमेटी गठित कर मामले की जांच करायी थी. कमेटी ने मामले की जांच कर रिपोर्ट विवि प्रशासन को सौंप दी थी.
इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गयी. लिहाजा मामला ठंडे बस्ते में चला गया. जबकि पूर्व में जांच कमेटी ने तीन में से एक शिक्षक के पीजी डिग्री को गलत और एक शिक्षक की डिग्री को संदेहास्पद बताया था. हालांकि इस मामले को दोबारा उठाया गया और विवि प्रशासन ने तीनों शिक्षकों के जाली प्रमाण पत्र की जांच के लिए कमेटी बनायी, जिसमें मामला सही पाया. इसके बाद तीनों शिक्षकों के वेतन बंद कर दिये गये.
सिंडिकेट की बैठक में हुआ फैसला, छात्रों को बढ़ी फीस से मिली राहत
दस साल पुराने मामले के लिए भी बनी कमेटी
गौरतलब है कि शिक्षकों द्वारा जाली प्रमाण पत्र का मामला दस साल पहले आया था. उस समय कमेटी बनी थी और रिपोर्ट भी दी गयी थी. लेकिन विवि प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की. ऐसे में सिंडिकेट की बैठक में ये फैसला लिया गया कि उस समय इन शिक्षकों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गयी. उसकी जांच की जाये. इसके लिए कमेटी बनायी जाये, जो जांच करेगी कि उस समय इस लापरवाही का दोषी कौन है.
पहले भी तीन शिक्षकों की सेवा हो चुकी है समाप्त
मांडर कॉलेज के तीन शिक्षकों की सेवा विवि ने इसलिए समाप्त कर दी थी कि उनके भी प्रमाण पत्र जांच के दौरान गलत पाये गये थे़ इसमें से एक शिक्षक की नियुक्ति के समय पीजी में तय मापदंड के अनुरूप अंक नहीं थे. उन्होंने दो वर्ष बाद इंप्रूवमेंट परीक्षा दी, जबकि प्रावधान के अनुरूप विद्यार्थी सत्र की इंप्रूवमेंट परीक्षा में शामिल हो सकते हैं.
दूसरी ओर विवि के यूजी और पीजी के विद्यार्थियों को सिंडिकेट ने राहत दी है. बढ़ी हुई फीस को स्थगित कर दिया गया है. नये सेशन से बढ़ी फीस ली जायेगी. गौरतलब हो कि विवि के स्नातक थर्ड सेमेस्टर और पीजी सेकेंड सेमेस्टर में नामांकन फीस में बढ़ोतरी की गयी थी, जिसका विद्यार्थियों ने विरोध किया था.
इन प्रस्तावों पर लगी मुहर
जेपीएससी की अनुशंसा के आलोक में डेढ़ दर्जन शिक्षकों को प्रोमोशन.
राज्य सरकार के अनुसार रांची विश्वविद्यालय में नयी पेंशन स्कीम लागू की गयी है़ इसमें 2004 के बाद काम कर रहे शिक्षकों को पेंशन दी जायेगी़
बीएस कॉलेज लोहरदगा के भूगोल के शिक्षक स्व विनोद केरकेट्टा को सात वर्ष सेवा पूरी करने की तिथि से प्रयोग प्रदर्शक के पद पर प्रोमोशन.
पीपीके कॉलेज बुंडू के सुबोध चंद्र शुक्ल व धनसिंह महतो को प्रयोग प्रदर्शक के पद पर प्रोमोशन.
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