रांची : पहाड़िया बच्चों को आठ माह से नहीं मिल रहा पोषाहार
Updated at : 27 Nov 2019 9:51 AM (IST)
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रांची : आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलने वाले पूरक पोषाहार कार्यक्रम की स्थिति झारखंड में दयनीय हो गयी है. राज्य भर के ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों में जहां गत चार माह से पोषाहार नहीं मिल रहा, वहीं कुछ केंद्र तो एेसे हैं, जहां गत आठ माह से न किसी बच्चे को अौर न गर्भवती या […]
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रांची : आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलने वाले पूरक पोषाहार कार्यक्रम की स्थिति झारखंड में दयनीय हो गयी है. राज्य भर के ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों में जहां गत चार माह से पोषाहार नहीं मिल रहा, वहीं कुछ केंद्र तो एेसे हैं, जहां गत आठ माह से न किसी बच्चे को अौर न गर्भवती या धात्री महिला को पोषाहार मिला है. पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड का मालधरा गांव का आंगनबाड़ी केंद्र एेसा ही है. मालधरा की सेविका सोनामुनी देवी के अनुसार उनके केंद्र सहित पास के संताल टोला में पहाड़िया बच्चों को अप्रैल 2019 से पोषाहार नहीं दिया जा रहा है.
दरअसल राज्य भर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती व धात्री महिला को पहले रेडी-टू-इट (तैयार पोषाहार) दिया जा रहा था. यह कार्यक्रम अगस्त 2019 से बंद हो गया है. इसके बदले अब झारखंड राज्य आजीविका मिशन सोसाइटी की महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के जरिये कच्चा पोषाहार (चावल, दाल, चना, मूंगफली गुड़ व अालू) भी मालधरा के आंगनबाड़ी के दो केंद्र सहित राज्य भर के करीब 80 फीसदी केंद्रों तक अभी नहीं पहुंचा है. इन केंद्रों पर राशन के लिए पैसे नहीं हैं. कई केंद्रों पर बरतन व इंधन की भी समस्या है.
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