जेट 2006 : मेरिट लिस्ट के बिना ही निकला था रिजल्ट, 37 अयोग्य अभ्यर्थी बन गये लेक्चरर

Updated at : 20 Nov 2019 8:28 AM (IST)
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जेट 2006 : मेरिट लिस्ट के बिना ही निकला था रिजल्ट, 37 अयोग्य अभ्यर्थी बन गये लेक्चरर

शकील अख्तर रांची : लेक्चरर नियुक्ति घोटाले की जांच के दौरान जेट-2006 में हुई गड़बड़ी का भी खुलासा हुआ है. इसके अनुसार झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने मेरिट लिस्ट बनाये बिना ही जेट-2006 का रिजल्ट प्रकाशित किया था. इसमें 191 अयोग्य उम्मीदवारों को सफल घोषित कर दिया गया था. बाद में जालसाजी कर इसमें […]

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शकील अख्तर
रांची : लेक्चरर नियुक्ति घोटाले की जांच के दौरान जेट-2006 में हुई गड़बड़ी का भी खुलासा हुआ है. इसके अनुसार झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने मेरिट लिस्ट बनाये बिना ही जेट-2006 का रिजल्ट प्रकाशित किया था. इसमें 191 अयोग्य उम्मीदवारों को सफल घोषित कर दिया गया था. बाद में जालसाजी कर इसमें से 37 को लेक्चरर भी बना दिया गया. इस सूची में तत्कालीन जेपीएससी सदस्य गोपाल प्रसाद के भाई विवेकानंद सिंह और शांति देवी की बहन कांति कुमारी भी शामिल है.
सीबीआइ जांच के दौरान इसका खुलासा हुआ है कि जेपीएससी ने जेट-2006 का रिजल्ट 13 जनवरी 2007 को जारी किया. इसमें कुल 767 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया गया था. तत्कालीन अध्यक्ष गोपाल प्रसाद सिंह व परीक्षा नियंत्रक एलिस उषा रानी सिंह के निर्देश पर रिजल्ट प्रकाशित किया गया था. हालांकि, एलिस उषा रानी सिंह ने नौ मार्च 2007 को विभाग को मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश िदया. लेकिन इससे पहले ही आयोग ने बिना मेरिट लिस्ट के रिजल्ट निकाल दिया था. तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद सिंह जेट-2006 परीक्षा सेल केचेयरमैन थे.
गोलमाल. लेक्चरर नियुक्ति घोटाले की जांच के दौरान हुआ खुलासा
पकड़ी गयी गड़बड़ी
जेट-2006 में सफल घोषित किये गये 676 उम्मीदवारों में से 191 उम्मीदवार अयोग्य थे
रिजल्ट में जालसाजी कर इन अयोग्य उम्मीदवारों में से 37 को लेक्चरर बना दिया गया
तत्कालीन जेपीएससी सदस्य गोपाल प्रसाद के भाई व शांति देवी की बहन को भी मिली नौकरी
नहीं हुई थी कॉपियों की कोडिंग
जेट-2006 से जुड़े दस्तावेज की जांच में पाया गया कि मूल्यांकन के लिए भेजी गयी कॉपियों की कोडिंग नहीं की गयी थी. नियमानुसार बिना कोडिंग की कॉपियां मूल्यांकन के लिए नहीं भेजी जा सकती हैं. जेपीएससी ने जेट-2006 परीक्षा के लिए नियम बनाया था कि जो उम्मीदवार पेपर-1 की परीक्षा में शामिल नहीं होगा, उसे पेपर-2 और पेपर-3 की परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया जायेगा. पेपर-3 की कॉपियों का मूल्यांकन उन्हीं उम्मीदवारों का होगा, जो पेपर-1 और पेपर-2 में पास मार्क्स लायेंगे. हालांकि, आयोग ने अपने ही नियमों का उल्लंघन करते हुए वैसे उम्मीदवारों के पेपर-3 की कॉपियों का मूल्यांकन किया, जो पेपर-1 और पेपर-2 में पास मार्क्स नहीं ला सके थे.
मेरिट लिस्ट की जांच से अयोग्य उम्मीदवारों का पता चला
सीबीआइ जांच के दौरान इसकी जानकारी मिली कि जेपीएससी के पास जेट-2006 परीक्षा के पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर शीट नहीं है. जेपीएससी ने जांच के लिए सीबीआइ को सिर्फ पेपर-3 में उम्मीदवारों को मिले नंबरों का ब्योरा दिया. इस पर मूल्यांकन करनेवाले परीक्षकों और को-ऑर्डिनेटर के हस्ताक्षर थे. जांच में पाया गया कि जेपीएससी ने प्रारंभिक जांच शुरू होने के दौरान नये सिरे से मेरिट लिस्ट बनायी. इस मेरिट लिस्ट की जांच में पाया गया कि जेपीएससी ने जेट-2006 में जिन 676 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया था, उनमें से 191 अयोग्य थे.
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