रांची : रिम्स की व्यवस्था कब व कैसे सुधरेगी

Updated at : 25 Oct 2019 9:31 AM (IST)
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रांची : रिम्स की व्यवस्था कब व कैसे सुधरेगी

रिम्स में इलाज की उत्कृष्ट व्यवस्था को लेकर हाइकोर्ट ने पूछा रांची : हाइकोर्ट के जज सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में गुरुवार को रिम्स में इलाज की उत्कृष्ट व्यवस्था को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने सरकार के जवाब को देखते हुए रिम्स के चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर नाराजगी जतायी. साथ […]

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रिम्स में इलाज की उत्कृष्ट व्यवस्था को लेकर हाइकोर्ट ने पूछा
रांची : हाइकोर्ट के जज सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में गुरुवार को रिम्स में इलाज की उत्कृष्ट व्यवस्था को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने सरकार के जवाब को देखते हुए रिम्स के चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर नाराजगी जतायी. साथ ही रिम्स निदेशक को उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया.
अदालत ने कहा कि आखिर रिम्स के चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस कैसे रुकेगी. ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी है. प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह से रोक लगाने की जिम्मेवारी रिम्स निदेशक की है.
अदालत ने कहा कि औचक निरीक्षण कर चिकित्सकों की उपस्थिति का आकलन हो सकता है. अनुपस्थित रहनेवाले चिकित्सकों को शो कॉज जारी कर जवाब मांगा जाना चाहिए. प्राइवेट प्रैक्टिस करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई होने से अन्य चिकित्सकों में भी संदेश जायेगा. रिम्स निदेशक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चिकित्सक अपने ड्यूटी समय में रिम्स में रह कर मरीजों का इलाज करें.
इलाज कराने आये मरीजों के परिजन को चिकित्सक का इंतजार या खोजना नहीं पड़े. अदालत ने निदेशक से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि रिम्स में शिक्षक व गैर शिक्षकों के अलावा ट्रामा सेंटर व पेइंग वार्ड के 54 पद, कार्डियोथेरासिक सर्जरी सहित अन्य विभागों के रिक्त 63 पदों को कब तक भरा जायेगा. अदालत ने मामले में केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया.अगली सुनवाई चार नवंबर को हाेगी. इससे पूर्व सरकार की अोर से महाधिवक्ता अजीत कुमार ने बताया कि रिम्स की व्यवस्था में सुधार के लिए उच्चस्तरीय बैठक कर निर्णय लिया गया है.
इंडोक्राइनोलॉजी, क्लीनिकल हिमोटोलॉजी, फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैविलिएशन, कैस्ट्रोइनट्रोलॉजी विभाग स्वीकृत करने व पद सृजित करने संबंधी प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा गया है. रिम्स की ओर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने अदालत को बताया कि प्राइवेट प्रैक्टिस करनेवाले चिकित्सकों के खिलाफ रिम्स की शासी निकाय कार्रवाई कर सकती है. चिकित्सकों के रिक्त पद शीघ्र भरे जायेंगे. प्राइवेट प्रैक्टिस रोकने के लिए राज्य सरकार को रिम्स की सहायता करनी चाहिए. सरकार स्पेशल विजिलेंस टीम बना कर प्राइवेट प्रैक्टिस को रोक सकती है. मामले की एमीकस क्यूरी अधिवक्ता वंदना सिंह ने भी पक्ष रखा.
रांची : हाइकोर्ट के जज अनंत बिजय सिंह की अदालत में गुरुवार को रिम्स के चिकित्सकों के स्थानांतरण आदेश को चुनाैती देनेवाली याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने प्रार्थियों का पक्ष सुनने के बाद सरकार के स्थानांतरण आदेश पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया.
सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने 21 अक्तूबर 2019 को प्रार्थी क्रांति कुमार सिंह, डॉ सरोज, डॉ ए सिन्हा, डॉ अनुपम चाैधरी सहित आठ चिकित्सकों का तबादला संबंधी अधिसूचना जारी की थी. अदालत ने सरकार को शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी.
प्रार्थी की अोर से वरीय अधिवक्ता जेपी झा ने बताया कि दिसंबर 2012 में सरकार ने स्थानांतरण किया था. इसे उन्होंने चुनाैती दी थी, जिस पर हाइकोर्ट ने स्थगन आदेश दिया था. इसके बावजूद दोबारा उनका स्थानांतरण किया गया है. यह कोर्ट के आदेश की अवमानना करने जैसा है.
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