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रांची : बालू का टेंडर फाइनल नहीं हुआ, 15 के बाद अवैध कारोबार बढ़ने की आशंका

Updated at : 11 Oct 2019 7:07 AM (IST)
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रांची : बालू का टेंडर फाइनल नहीं हुआ, 15 के बाद अवैध कारोबार बढ़ने की आशंका

सुनील चौधरी जेएसएमडीसी की निविदा में पांच हेक्टेयर से अधिक के बालू घाटों पर फैसला नहीं रांची : राज्य में बालू घाटों की निविदा में अब भी कई तकनीकी पेंच फंसी हुई है. किसी घाट का इनवायरमेंटल क्लीयरेंस का मामला लंबित है तो कहीं अॉपरेशन की अनुमति नहीं मिली है. अभी बालू की आपूर्ति स्टॉकिस्ट […]

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सुनील चौधरी
जेएसएमडीसी की निविदा में पांच हेक्टेयर से अधिक के बालू घाटों पर फैसला नहीं
रांची : राज्य में बालू घाटों की निविदा में अब भी कई तकनीकी पेंच फंसी हुई है. किसी घाट का इनवायरमेंटल क्लीयरेंस का मामला लंबित है तो कहीं अॉपरेशन की अनुमति नहीं मिली है. अभी बालू की आपूर्ति स्टॉकिस्ट या फिर कहीं-कहीं अवैध रूप से भी आपूर्ति हो रही थी. एनजीटी द्वारा बालू उत्खनन पर लगायी गयी रोक 15 अक्तूबर को समाप्त होगी.
राज्यभर में अब केवल 19 घाट ही हैं, जहां 15 अक्तूबर के बाद बालू का उत्खनन हो पायेगा. इसके अलावा झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) के तीन बालू घाट हैं, जो चालू हैं. यानी कुल 22 घाट हैं, जहां से 15 अक्तूबर के बाद बालू निकाला जा सकेगा. रांची जिले के सारे बालू घाट जेएसएमडीसी के पास चले गये हैं. ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि 15 अक्तूबर के बाद बालू का अवैध कारोबार बढ़ेगा. राज्यभर में टास्क फोर्स ने हजारों ट्रक अवैध बालू एनजीटी की रोक दौरान पकड़े हैं. केवल रांची में ही 68 लाख के अवैध बालू पकड़े गये थे.
क्या है मामला : राज्य सरकार बालू घाटों के संचालन की जवाबदेही जेएसएमडीसी को दे चुकी है. राज्यभर में 640 बालू घाट हैं. जेएसएमडीसी ने 26 फरवरी 2019 को राज्यभर के 93 बालू घाटों के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजेल (आरएफपी) निकाला था. जेएसएमडीसी ने पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल के 59 बालू घाटों व पांच हेक्टेयर से अधिक के 34 बालू घाटों के लिए टेेंडर आमंत्रित किया था. पांच हेक्टेयर से कम वाले 59 बालू घाटों में 17 पर ही फैसला हो सका है. शेष को रद्द कर दिया गया है या फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण मामला लंबित है. 17 बालू घाटों में 15 बालू घाटों को अब तक झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से कंसेट टू अॉपरेट (सीटीओ) नहीं मिला है. इस कारण इनका भी तुरंत चालू होने पर संदेह है.
वहीं पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले 34 बालू घाटों के लिए नौ बिडर ने 50 प्रस्ताव डाले थे. इसमें केवल टेक्निकल बिड खोला गया है. इसमें नौ बिडर में से दो के कागजात सही नहीं होने पर रद्द कर दिया गया. सात कंपनियों से कुछ अतिरिक्त जानकारी निगम द्वारा मांगी गयी है. इसके बाद ही फाइनेंशियल बिड खोला जायेगा. यानी पांच हेक्टेयर से अधिक के 34 बालू घाटों को चालू होने में कम से कम छह माह और लगेंगे.
जेएसएमडीसी द्वारा 31 अगस्त को पांच हेक्टेयर से कम के अन्य 47 बालू घाटों की निविदा भी निकाली गयी है. इन पर भी अब तक फैसला नहीं हो सका है.
क्या है स्थिति : खान विभाग के सूत्रों ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से यदि जल्द ही सीटीओ नहीं मिला, तो राज्य में बालू संकट की स्थिति आ सकती है.
सीटीओ मिलने के बाद कम से कम दो दिन लगेंगे, तब कहीं बालू उत्खनन आरंभ संभव होगा. इधर रांची में एक भी बालू घाट की निविदा नहीं हो सकी है. जिसके कारण 15 अक्तूबर के यहां संकट हो सकता है. रांची में चार स्टॉकिस्ट के पास लाइसेंस है, उनके पास अभी एक से दो माह का स्टॉक बचा है. तब तक जेएसएमडीसी ने निविदा पर फैसला नहीं लिया तो रांची में भी संकट होगा.
स्टॉकिस्ट के भरोसे ही बालू की आपूर्ति
अवैध कारोबार भी बढ़ेगा
रांची समेत राज्य के सभी हिस्सों में बालू की वैध निकासी नहीं होने पर अवैध कारोबार बढ़ने की आशंका है. अभी ग्रामीण इलाकों से ट्रैक्टर से बालू का अवैध कारोबार जारी है. टास्क फोर्स के पास राज्यभर से ऐसे हजारों मामले आये हैं. बालू जब्त किया जाता है फिर भी अवैध कारोबार चलता रहता है. इसमें संबंधित थानों से सांठगांठ कर यह कारोबार जारी है.
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