रांची : गरीबों के लिए मुहल्लों में खुलेंगे अटल क्लिनिक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Aug 2019 8:09 AM (IST)
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रांची : शहरी मुहल्लों और झुग्गी इलाके में गरीबों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अटल क्लिनिक खोला जायेगा. इसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि 16 अगस्त से होगी. उसी दिन से आयुष्मान भारत के लाभुकों को नि:शुल्क गोल्डेन कार्ड भी मुहैया कराया जायेगा. फिलहाल प्रज्ञा केंद्रों से यह कार्ड […]
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रांची : शहरी मुहल्लों और झुग्गी इलाके में गरीबों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अटल क्लिनिक खोला जायेगा. इसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि 16 अगस्त से होगी. उसी दिन से आयुष्मान भारत के लाभुकों को नि:शुल्क गोल्डेन कार्ड भी मुहैया कराया जायेगा. फिलहाल प्रज्ञा केंद्रों से यह कार्ड बनवाने में 25 रुपये लगते हैं. उक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कही. वे गुरुवार को होटल बीएनअार में हेल्थ केयर समिट को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आयुष्मान भारत योजना शुरू होने की पहली वर्षगांठ (23 सितंबर) पर सभी 57 लाख योग्य परिवारों को गोल्डेन कार्ड उपलब्ध करा दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि अपने देश में न रोगों की कमी है, न रोगियों की. इसका कारण बढ़ती जनसंख्या है.
परिवार जितना छोटा होगा, उसे स्वास्थ्य व शिक्षा मुहैया कराना उतना ही अासान होगा. वर्ष 2000 तथा 2019 के दौरान राज्य के स्वास्थ्य सूचकांक जैसे मातृ मृत्यु दर (एमएमआर), शिशु मृत्यु दर (सीएमआर), संस्थागत प्रसव तथा बच्चों के टीकाकरण में सुधार का हवाला देते हुए सीएम ने कहा कि हमने दुर्गम क्षेत्रों में सीएसआर के माध्यम से बाइक एंबुलेंस की भी शुरुआत की है. वहीं, एंबुलेंस-108 राज्य का बेहद सफल कार्यक्रम है.
स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने की सलाह : स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कार्यक्रम में मौजूद नीति आयोग के सदस्य डॉ विनोद कुमार पॉल से गुजारिश की कि वह राज्य के तीन नये मेडिकल कॉलेजों (हजारीबाग, पलामू व दुमका) में पढ़ाई शुरू कराने में सहयोग करें. इससे राज्य में मेडिकल की 300 सीटें बढ़ जायेंगी. नीति आयोग के सदस्य डॉ विनोद कुमार पॉल ने राज्य सरकार से स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने की सलाह दी. डॉ गुप्ता ने कहा कि यहां ग्रासरूट पर स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ करना आसान है.
उन्होंने मुख्यमंत्री से टेली हेल्थ (मेडिसिन) सुविधाएं बढ़ाने तथा इसमें सुधार के लिए ब्रॉड बैंड के अलावा सेटेलाइट लिंक के इस्तेमाल का प्रस्ताव दिया. कहा कि यदि आप चाहें, तो इस संबंध में हम इंडियन स्पेस रिसर्च अॉर्गनाइजेशन (इसरो) से बात करेंगे.
मैगजीन का विमोचन और पैनल डिस्कशन भी हुआ : इससे पहले स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में झारखंड की उपलब्धियों की चर्चा की. कार्यक्रम के दौरान इ-हेल्थ (मैप) मैगजीन का विमोचन, दो तकनीकी सत्र तथा तीन पैनल डिस्कशन भी हुआ. कार्यक्रम में रिम्स के निदेशक डॉ डीके सिंह तथा झारखंड सहित देश के विभिन्न अस्पतालों के प्रतिनिधि, हेल्थ एक्सपर्ट व विभागीय पदाधिकारी उपस्थित थे.
एनएमसी के बारे में भ्रांति : डॉ गुप्ता ने नेशनल मेडिकल बिल (एनएमसी) बिल पास होने तथा इस संबंध में कुछ भ्रांतियों की उल्लेख करते हुए कहा कि यह बिल झोला छाप डॉक्टरों को बढ़ावा देनेवाला कतई नहीं है.
आयुष के लिए ब्रिज कोर्स की बात तो पहले ही खत्म कर दी गयी है. दरअसल, इस बिल के जरिये एएनएम-जीएनएम व हेल्थ वर्कर्स को प्रशिक्षित कर नर्स या एएनएम से ऊपर तथा डॉक्टर से नीचे स्तर की चिकित्सा उपलब्ध कराने की बात है. भारत जैसे विशाल देश में यह जरूरी है. यही नहीं अमेरिका, ब्राजिल, नीदरलैंड सहित यूरोप के कई देशों में यह पहले से हो रहा है.
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