रांची : लुप्त न हो जाये कैथी लिपि, चंद ही हैं जानकार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Aug 2019 9:07 AM
प्रवीण मुंडा कैथी लिपि में जो भी दस्तावेज थे उनमें हिंदी, उर्दू अौर फारसी के शब्दों का प्रयोग होता था रांची : कचहरी स्थित पुराने बार भवन के सीलन भरे अौर तंग गलियारे से होते हुए उस बरामदे तक पहुंचा जा सकता है, जहां बमुश्किल से सात या आठ टाइपिस्ट अपने क्लाइंट के दस्तावेजों को […]
प्रवीण मुंडा
कैथी लिपि में जो भी दस्तावेज थे उनमें हिंदी, उर्दू अौर फारसी के शब्दों का प्रयोग होता था
रांची : कचहरी स्थित पुराने बार भवन के सीलन भरे अौर तंग गलियारे से होते हुए उस बरामदे तक पहुंचा जा सकता है, जहां बमुश्किल से सात या आठ टाइपिस्ट अपने क्लाइंट के दस्तावेजों को टाइप करते देखे जा सकते हैं. इन्हीं टाइपिस्टों में दो खास व्यक्ति हैं कैलाश राम वर्मा (73 वर्ष) अौर दूसरे प्रो रामलाल साहू (52 साल). कचहरी में मौजूद टाइपिस्ट में ये दोनों ही हैं जो कैथी लिपि पढ़ अौर समझ सकते हैं. ये दोनों क्लाइंट के द्वारा कैथी लिपि में लाये गये दस्तावेजों का अनुवाद कर उसे टाइप कर उपलब्ध कराते हैं.
कैथी लिपि में होते थे पुराने दस्तावेज: जानकारी के मुताबिक पुराने सरकारी दस्तावेज खासकर जमीन से संबंधित कैथी लिपि में लिखे होते थे.
इनमें खतियान, बिक्री पट्टा, हुकुमनामा आदि शामिल है. कायस्थ समाज के लोग इसके जानकार थे. कैथी लिपि में जो भी दस्तावेज थे उनमें हिंदी, उर्दू अौर फारसी के शब्दों का प्रयोग होता था. सिविल कोर्ट के अधिवक्ता नीलेश कहते हैं कि इस देश में शुरू से ही सरकारी दस्तावेजों में जिस भाषा का प्रयोग किया जाता रहा वह आम बोलचाल की अलग होती थी. जब कैथी लिपि का काफी प्रचलन था तब भी बहुत कम लोग ही थे जो इसे पढ़ अौर समझ पाते थे.
नयी पीढ़ी को नहीं है इसमें रुचि : प्रो रामलाल साहू ने कहा कि वे 1974 से सिविल कोर्ट परिसर में बैठ रहे हैं. रांची के अलावा राज्य के कई जिलों से लोग कैथी में लिखे दस्तावेजों को पढ़वाने अौर टाइप कराने के लिए उनके पास आते हैं. कैथी लिपि की कहीं पढ़ाई नहीं होती थी.
जो कुछ जान पाया वह सब दूसरों को देख कर सीखा और जाना. पुराने दस्तावेजों की लिखावट को समझने के लिए मैग्नीफाइंग ग्लास का प्रयोग करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि पुराने दस्तावेजों में भी हिंदी, उर्दू, फारसी के शब्दों का मिलाजुला प्रयोग है. वे दुख के साथ कहते हैं कि नयी पीढ़ी में इस लिपि को सीखने समझने के लिए रुचि नहीं है. यही स्थिति रही तो जल्दी ही यह लुप्त हो जायेगी.
कैथी लिपि को बचाने की पहल करनी होगी : जिला बार एसोसिएशन के महासचिव कुंदन प्रकाशन ने कहा कि उनकी जानकारी में सिविल कोर्ट में चंद लोग ही हैं जो इस लिपि के जानकार हैं. ज्यादातर लोग उम्रदराज हैं. इस लिपि को बचाने के लिए पहल करने की जरूरत है. सरकार से अपील है कि वे इस लिपि को बचाने के लिए आगे आये.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










