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रांची : तीन साल में भी सरकार नहीं कर सकी घोटाले में शामिल अफसरों की पहचान

Updated at : 29 Jul 2019 8:38 AM (IST)
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रांची : तीन साल में भी सरकार नहीं कर सकी घोटाले में शामिल अफसरों की पहचान

एनटीपीसी पकरी बरवाडीह परियोजना के मुआवजा वितरण में हुआ था घोटाला रांची : राज्य सरकार तीन साल में भी 354 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाले में शामिल अफसरों की पहचान नहीं कर सकी है. एनटीपीसी पकरी बरवाडीह परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में हुई गड़बड़ी के बाद सरकार ने दोषी अफसरों को […]

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एनटीपीसी पकरी बरवाडीह परियोजना के मुआवजा वितरण में हुआ था घोटाला
रांची : राज्य सरकार तीन साल में भी 354 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाले में शामिल अफसरों की पहचान नहीं कर सकी है. एनटीपीसी पकरी बरवाडीह परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में हुई गड़बड़ी के बाद सरकार ने दोषी अफसरों को चिह्नित करने का आदेश दिया था.
जानकारी के मुताबिक भू-राजस्व विभाग ने देवाशीष गुप्ता की रिपोर्ट में वर्णित तथ्यों के आधार पर 2016 में एक आदेश जारी किया था
इसमें मुआवजा वितरण में हुए घोटाले में शामिल अफसरों को चिह्नित करने का आदेश दिया गया था. विभागीय सूत्रों के अनुसार अभी भी इस मामले में दोषी अधिकारियों को चिह्नित करने की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है. श्री गुप्ता ने रिपोर्ट में सरकारी जमीन पर कब्जा करनेवालों को फर्जी दस्तावेज के आधार पर मुआवजा देने का उल्लेख किया था. उन्होंने रिपोर्ट में इस पूरे प्रकरण में एनटीपीसी के अधिकारियों की भूमिका को भी संदेहास्पद करार दिया था.
क्या कहा गया था रिपोर्ट में : रिपोर्ट में कहा गया था कि इस परियोजना में 3000 एकड़ सरकारी जमीन का मुआवजा वैसे लोगों को दिया गया था जिनका नाम रजिस्टर-टू में नहीं था. संबंधित अधिकारियों ने इन लोगों को औसतन 10 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया.
इस मद में 354.20 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. 21 फरवरी 2015 को एनटीपीसी के सीएमडी के और हजारीबाग जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्रोसिडिंग तैयार हुई. इसमें यह लिखा गया कि अवैध कब्जाधारियों को मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है. इसी प्रोसिडिंग में यह भी लिखा गया कि अवैध कब्जा करनेवाले बहुत ही गरीब और पिछड़े हैं. उनका जीवनयापन इसी जमीन पर निर्भर है. एनटीपीसी के पास ऐसे 2769 लोगों की सूची है. पर यह सूची कहां से और किस सर्वे के माध्यम से एनटीपीसी को मिली, इसका कहीं उल्लेख नहीं किया गया.
कोयला व ऊर्जा मंत्रालय की जगह जिला प्रशासन को भेज दी रिपोर्ट : जांच में पाया गया था कि 2769 लोगों की सूची में से 2000 लोग एेसे हैं, जिनके पास औसतन दो ही डिसमिल जमीन है. दो डिसमिल जमीन पर ही किसी परिवार का जीवनयापन निर्भर होना संभव नहीं है. सिर्फ इतना ही नहीं एनटीपीसी की सूची में ऐसे जमीन मालिकों का भी नाम था, जिनके पास सिर्फ 20 वर्ग फुट खेती की जमीन है.
एनटीपीसी के इन आंकड़ों को देखते हुए देवाशीष गुप्ता ने सरकार को सुझाव दिया था कि वह इस मामले को कोयला और ऊर्जा मंत्रालय के पास ले जाये और इसकी जांच कराये. पर राज्य सरकार ने उनकी पूरी रिपोर्ट को जिला प्रशासन के पास यह कहते हुए भेज दिया कि जिला प्रशासन इस मामले में शामिल दोषी सरकारी अधिकारियों को चिह्नित कर आवश्यक कार्रवाई करे.
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