रांची : हमने गठबंधन धर्म निभाया, साथियों की भूल पर सोचना होगा

Updated at : 03 Jun 2019 6:05 AM (IST)
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रांची : हमने गठबंधन धर्म निभाया, साथियों की भूल पर सोचना होगा

हमने गठबंधन धर्म निभाया, साथियों की भूल पर सोचना होगा विधायक दल की बैठक में झामुमो ने की हार की समीक्षा, कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा रांची : झामुमो लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के सहयोगी दलों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से आहत है. झामुमो विधायक दल की रविवार को हुई बैठक में सभी […]

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हमने गठबंधन धर्म निभाया, साथियों की भूल पर सोचना होगा
विधायक दल की बैठक में झामुमो ने की हार की समीक्षा, कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा
रांची : झामुमो लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के सहयोगी दलों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से आहत है. झामुमो विधायक दल की रविवार को हुई बैठक में सभी विधायकों ने इस बात को बैठक में रखा.
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने भी कहा कि गठबंधन से नुकसान ये हुआ कि पार्टी की सीट कम हुई और फायदा यह हुआ कि वोटों का प्रतिशत बढ़ा है. श्री सोरेन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव में कांग्रेस, झाविमो और राजद को सबसे ज्यादा सहयोग झामुमो ने किया, लेकिन झामुमो को इन दलों का उतना सहयोग नहीं मिला, जितना मिलना चाहिए था.
गौरतलब है कि झामुमो ने लोकसभा चुनाव की चार सीटों दुमका, राजमहल, गिरिडीह व जमशेदपुर सीट से चुनाव लड़ा था. इसमें मात्र एक सीट राजमहल पर ही जीत मिली. पार्टी अध्यक्ष शिबू सोरेन भी दुमका सीट से चुनाव हार गये. चुनाव में करारी पराजय खासकर दुमका सीट हारने से झामुमो ने महागठबंधन पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है.
बैठक की अध्यक्षता पार्टी के अध्यक्ष शिबू सोरेन ने की. इसमें लोकसभा चुनाव परिणाम को, आगामी विधानसभा चुनाव और संगठन को लेकर मंथन किया गया.बैठक में झामुमो विधायक प्रो स्टीफन मरांडी व चमरा लिंडा को छोड़कर बाकी सभी विधायक तथा विनोद पांडेय व सुप्रियो भट्टाचार्य भी मौजूद थे.
केंद्रीय समिति की बैठक में गठबंधन पर विचार होगा
हेमंत ने कहा, चुनाव में हमने अपनी भूमिका बखूबी निभायी, लेकिन सहयोगियों ने कहां भूल की, यह विचारणीय प्रश्न है.विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन जारी रहने के सवाल पर हेमंत ने स्पष्ट किया कि सोमवार को होनेवाली केंद्रीय समिति की बैठक में इस मुद्दे पर तथा चुनाव लड़ने की रणनीति को लेकर विचार किया जायेगा. यह पूछे जाने पर कि विधानसभा चुनाव में भी महागठबंधन जारी रखने और झामुमो बड़े भाई की भूमिका निभायेगा या नहीं, इस सवाल को हेमंत ने टालते हुए कहा कि इन सारी बातों पर केंद्रीय समिति की बैठक में निर्णय लिया जायेगा. वैसे झामुमो बड़े भाई की भूमिका निभाने के लिए पूरी ताकत से मैदान में रहेगा. इस संबंंध में घटक दलों से बैठक की कोशिश होगी.
विधानसभा चुनाव पूरी ताकत से और रणनीति बना कर लड़ेंगे
हेमंत ने कहा कि झामुमो विपक्ष में राज्य की सबसे बड़ी पार्टी है. इसलिए हमारी जिम्मेवारी भी बड़ी है. इसे ध्यान में रखते हुए विधानसभा चुनाव पूरी ताकत से लड़ा जायेगा. इसकी रणनीति बनाने पर जोर दिया गया है.
पार्टी की सभी इकाइयों खासकर युवा वर्ग और महिलाओं की अधिक से अधिक भूमिका तय की जायेगी. युवाओं व महिलाओं के बीच जाकर अपनी बात रखी जायेगी. राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाया जा रहा है शिबू सोरेन के हारने के बाद झामुमो समाप्त हो गया है. लेकिन ऐसी स्थिति पहले भी आयी थी.
झामुमो पहले भी समाप्त नहीं हुआ बल्कि और आगे बढ़ा है. हेमंत ने कहा कि हार जीत अपनी जगह पर है. जिस तरह से चुनाव हुए और हार मिली है उसके कई कारण रहे हैं. हालांकि इससे हतोत्साहित होने के बजाये सभी विधायक उत्साह के साथ विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटेंगे. एक नयी रणनीति के साथ मैदान में आयेंगे. केंद्रीय समिति की बैठक रणनीति बनायी जायेगी.
इवीएम पर सवालिया निशान लगते रहे हैं
हेमंत ने विधानसभा चुनाव इवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराने की वकालत की. कहा कि इवीएम पर सवालिया निशान लगते रहे हैं. इसलिए बैलेट पेपर से ही चुनाव कराया जाये. वोटिंग के दिन वोटों की संख्या और मतगणना के दिन वोटों की संख्या में कई क्षेत्रों में अंतर आया है. इसे चुनाव आयोग देखे कि कैसे क्या हुआ है.
चुनाव में राष्ट्रवाद छोड़ कर कोई मुद्दा नहीं था
हेमंत ने कहा कि चुनाव में राष्ट्रवाद छोड़ कर कोई मुद्दा नहीं था. इसके अलावा किसी मुद्दे के बारे में कोई मतदाता नहीं बता पायेगा. भाजपा धन बल और नोट छापने वाली मशीन है. कई एजेंसियोंं, पेड स्टाफ के माध्यम से अपने षड्यंत्र को लोगों तक पहुुंचाया. एक बार फिर से जनता को छला गया.
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झामुमो की बैठक : अंदर की बात
रांची : झामुमो विधायक दल की सोमवार को हुई बैठक में विधायकों ने जमकर भड़ास निकाली. सूत्रों ने बताया कि पार्टी का नेतृत्व आम कार्यकर्ताओं से कटता जा रहा है. कार्यकर्ताआें को तो छोड़ें, विधायकाेंकी हेमंत सोरेन तक से बात नहीं होने दी जाती है. 17 विधायक नेता से नेता बात नहीं कर सकते, ताे कार्यकर्ता कैसे पहुंचेंगे.
विधायकों ने पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक कुमार पिंटू पर भी सवाल उठाये आैर कहा कि वह न तो कार्यकर्ताओं को मिलने देते हैं और न ही विधायकों से टेलीफोन पर बात करने देते हैं. ऐसा लगता है, जैसे पार्टी वही चला रहा है. हेमंत सोरेन सबकी बातें धैर्यपूर्वक सुन रहे थे.
अन्य मुद्दाें पर ध्यान दे पार्टी : एक विधायक ने कहा कि पार्टी सिर्फ एक ही मुद्दा सीएनटी-एसपीटी को लेकर उछालती रहती है. जबकि आज के पढ़े-लिखे आदिवासी युवा इससे ऊपर जा चुके हैं. उनकी समझ में ये बातें नहीं आती. पार्टी को अन्य मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. एक वरिष्ठ विधायक ने कहा कि जल, जंगल, जमीन पार्टी का कोर एजेंडा है. पर पार्टी धरातल पर नहीं है, हाइ-फाइ बन गयी है. गरीब-गुरबों से जमीन पर उतर कर बात नहीं हो रही है. पार्टी से लोग कट रहे हैं. महिला और युवाओं के बीच पार्टी की पैठ बनानी होगी.
विधायकों ने कहा कि विधायक तो अपने स्तर से सहयोगी पार्टी को सहयोग कर रहे थे. पर सहयोगी पार्टी ने अपेक्षित सहयोग नहीं दिया. गठबंधन से पार्टी को नुकसान ही हुआ. पार्टी के हिस्से में जो सीट आयी, उसमें भी मनमाने तरीके से टिकट का बंटवारा हुआ. जमशेदपुर कुर्मी बहुल इलाका है, इसके बावजूद वहां से एक संताली उम्मीदवार को टिकट देना उचित नहीं था.
गुरुजी के क्षेत्र में भी पार्टी के कार्यकर्ता उदासीन रहे. खूंटी में पौलुस सुरीन तैयारी कर रहे थे, पर पार्टी ने सहयोगी दल को सीट दे दी. इसका खामियाजा ये हुआ कि सहयोगी दल भी सीट नहीं बचा सके. पर झामुमो के विधायक ने अपनी सीट पर बढ़त दिलायी. बैठक में साफ कहा गया कि सहयोगी हो या पार्टी, किसी ने जाति, धर्म देखकर टिकट नहीं दिया, जबकि भाजपा ने सारे समीकरणों को देखकर टिकट का बंटवारा किया.
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