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रांची के 29 में से छह बालू घाट ही चालू

Updated at : 06 Apr 2019 2:26 AM (IST)
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रांची के 29 में से छह बालू घाट ही चालू

रांची : रांची जिले में कुल 29 बालू घाट हैं, जिनमें केवल छह बालू घाट ही चालू हैं. 23 बालू घाटों से बालू की निकासी बंद है. चालू बालू घाटों में भी कांके, लापुंग और चान्हों में स्थित पांच बालू घाटों का संचालन पंचायत द्वारा किया जा रहा है. यानी एक निर्धारित सीमा से ज्यादा […]

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रांची : रांची जिले में कुल 29 बालू घाट हैं, जिनमें केवल छह बालू घाट ही चालू हैं. 23 बालू घाटों से बालू की निकासी बंद है. चालू बालू घाटों में भी कांके, लापुंग और चान्हों में स्थित पांच बालू घाटों का संचालन पंचायत द्वारा किया जा रहा है.

यानी एक निर्धारित सीमा से ज्यादा ये बालू की निकासी नहीं कर सकते. केवल एक बालू घाट खलारी में है, जो पांच हेक्टेयर से अधिक है. इस बालू घाट की लीज 30 जून 2019 तक है.
बालू घाटों के लीज की अवधि समाप्त हो गयी है, जिसकी वजह से 23 बालू घाटों से एक अप्रैल से उत्पादन बंद कर दिया गया है. अब इन बालू घाटों का संचालन जेएसएमडीसी द्वारा किया जाना है.
जेएसएमडीसी द्वारा रांची के दो बालू घाटों छापड़ और मुरुपीड़ी के लिए निविदा निकाली गयी है. बालू घाटों से उत्पादन बंद होने की वजह से रांची जिला प्रशासन द्वारा पहले ही पांच कंपनियों को स्टॉक लाइसेंस दे दिया गया था.
इन्हें 31 मार्च तक अधिक से अधिक बालू को स्टॉक करने का निर्देश दिया गया था. रांची में फिलहाल बालू की उपलब्धता इन्हीं स्टॉकिस्ट के माध्यम से हो रही है. खान विभाग द्वारा बीजूपाड़ा, सोनाहातू, बुंडू व तमाड़ में पांच स्टॉकिस्ट को लाइसेंस दिया गया है.
एनजीटी के आदेश के कारण संकट की स्थिति : एनजीटी द्वारा 13.9.2018 तथा 11.12.2018 के आलोक में पांच से 25 हेक्टेयर तक के बालू घाटों के पर्यावरणीय स्वीकृति में इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट(इआइए) और इनवायरमेंटल मैनेजमेंट प्लान(इएमपी) एवं जनसुनवाई अनिवार्य कर दी गयी है. इस कारण बड़े बालू घाटों के लिए ये प्रक्रिया पूरी करने में छह से सात माह का समय लग जायेगा.
जेएसएमडीसी द्वारा 26 फरवरी को ही पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले 33 बालू घाटों में माइनिंग, ट्रांसोपोटेशन, स्टॉकिंग और लोडिंग के लिए एजेंसी चयन के लिए निविदा निकाली गयी थी.
यह निविदा भी अचार संहिता के कारण फंसी हुई है. बताया गया कि एनजीटी के आदेश के कारण ही जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने में लंबा समय लग सकता है. जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक बालू की निकासी नहीं हो सकती.
हो सकती है बालू की कमी
सूत्रों ने बताया कि अप्रैल में किसी तरह स्टॉकिस्ट के माध्यम से बालू की आपूर्ति हो पा रही है. पर जैसे ही स्टॉक खत्म होगा बालू की किल्लत हो सकती है. राज्य में लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता लागू है.
इसके कारण जेएसएमडीसी भी बालू की निविदा तो फाइनल कर सकता है, पर बालू उत्खनन के लिए एग्रीमेंट नहीं कर सकता. 23 मई के बाद ही एग्रीमेंट किया जा सकता है. इसके बाद पर्यावरण स्वीकृति व अन्य प्रकार के लाइसेंस लेने में समय लगा सकता है.
तब तक 15 जून आ जायेगा. 15 जून से 15 अक्तूबर तक एनजीटी के आदेश से राज्य के किसी भी बालू घाटों से बालू की निकासी नहीं की जा सकती. हालांकि, सरकार इस संकट से निबटने के लिए स्टॉक लाइसेंस में इजाफा कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा बालू का स्टॉक रखा जाये.
पंचायतों द्वारा किया जा रहा है कांके, लापुंग और चान्हो में स्थित पांच बालू घाटों का संचालन
खलारी स्थित पांच हेक्टेयर से अधिक के बालू घाट की लीज 30 जून को हो जायेगी समाप्त
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