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संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं को निर्णायक भूमिका निभानी होगी

Updated at : 09 Mar 2019 1:13 AM (IST)
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संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं को निर्णायक भूमिका निभानी होगी

रांची : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संवाद व ग्राम सभा फेडरेशन ने एचआरडीसी सभागार गोस्सनर कंपाउंड में दो दिवसीय राज्यस्तरीय महिला सम्मेलन की शुरुआत की़ संसदीय राजनीति में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में सभी प्रमुख दलों की महिला प्रतिनिधियों ने इस मांग का पुरजोर समर्थन किया और साथ मिल कर […]

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रांची : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संवाद व ग्राम सभा फेडरेशन ने एचआरडीसी सभागार गोस्सनर कंपाउंड में दो दिवसीय राज्यस्तरीय महिला सम्मेलन की शुरुआत की़ संसदीय राजनीति में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में सभी प्रमुख दलों की महिला प्रतिनिधियों ने इस मांग का पुरजोर समर्थन किया और साथ मिल कर आगे चलने का संकल्प लिया़
यह बात उभर कर आयी कि संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं को निर्णायक भूमिका निभानी होगी और इसके लिए विशेष प्रावधान करना होगा़ रवांडा, अल्जीरिया, सेनेगल जैसे पिछड़े देशों में आरक्षण की विशेष नीतियों से वहां की महिलाओं के हक में सकारात्मक बदलाव आया है और भारत को भी इस रास्ते पर मजबूती से चलने की आवश्यकता है़
राजनीति में महिलाओं को आगे आना होगा: टीना
इस अवसर पर मुख्य अतिथि जर्मनी की डॉ गार्लिन स्नाइडर ने कहा कि राजनीति में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं की भागीदारी होगी तो समाज की बुनियादी जरूरतों और मानवीय पहलुओं को ज्यादा महत्व मिलेगा.
उन्हाेंने बताया कि जर्मनी में भी आबादी के अनुरूप राजनीति में महिलाओं का ज्यादा प्रतिनिधित्व नहीं है़ विशिष्ट अतिथि जर्मनी की टीना ने कहा कि विकसित देश भी गरीब और विकासशील देशों की तरह ही बराबरी की लड़ाई लड़ रहे है़ं
राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, तभी इस अशांत और हिंसा प्रधान दुनिया को शांतिमय व सुखदायी बनाने में निर्णायक साबित होगा़ इससे पूर्व विषय प्रवेश कराते हुए श्रावणी ने कहा कि पितृसत्तात्मक समाज में सत्ता में महिलाओं की बराबर की भागीदारी कैसे हो, यह सवाल महत्वपूर्ण है़ राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का सवाल 70 के दशक से चर्चा का विषय रहा है, लेकिन आज तक देश की राजनीतिक पार्टियों ने इस पर ठोस पहल नहीं की है़
वर्तमान में महिलाअों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व हाशिये पर है : गाड़ी
झारखंड विकास मोर्चा की अनीता गाड़ी ने कहा कि धन, बल और बाहुबल के मौजूदा दौर में महिलाअों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व हाशिये पर है़ झारखंड बल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने कहा कि मुख्यधारा की राजनीति को आदिवासी समाज के समानता के मूल्यों से सीखने की जरूरत है़
कांग्रेस की रमा खलखो ने कहा कि पंचायत चुनाव में महिलाओं ने अपनी क्षमता व ताकत का एहसास कराया है़ अब इसे मुख्यधारा की राजनीति में भी दोहराने की जरूरत है़ आजसू पार्टी की वायलेट कच्छप ने कहा कि महिलाओं के प्रति भेदभाव तभी दूर होगा, जब वे मुख्य भूमिका में आयेंगी़
ग्राम सभा फेडरेशन की संयोजिका एनी टुडू ने फेडरेशन के बारे में जानकारी दी़ कार्यक्रम का संचालन सलगे मार्डी ने किया़ वहीं शशि बारला ने प्रतिभागियों का स्वागत किया़ आयोजन में मालती, जमील, उमेश,सीमा, सगोरी, पूर्णिमा व अन्य ने योगदान दिया़
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