रांची : आइपीएस तदाशा मिश्रा के बेटे अत्येंद्र की मौत के मामले में बॉडीगार्ड निलंबित, अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज

Updated at : 29 Dec 2018 1:01 AM (IST)
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रांची  :  आइपीएस तदाशा मिश्रा के बेटे अत्येंद्र की मौत के मामले में बॉडीगार्ड निलंबित, अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज

रांची : डोरंडा थाना क्षेत्र के हिनू से एयरपोर्ट जाने के दौरान चलती कार में पुलिस अधिकारी तदाशा मिश्रा के बेटे अत्येंद्र मिश्रा की गोली लगने से हुई मौत पर डाेरंडा थाना में अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज किया गया है. वहीं लापरवाही बरतने के आरोप में एसएसपी ने बॉडीगार्ड दिलीप कुमार सिन्हा को निलंबित […]

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रांची : डोरंडा थाना क्षेत्र के हिनू से एयरपोर्ट जाने के दौरान चलती कार में पुलिस अधिकारी तदाशा मिश्रा के बेटे अत्येंद्र मिश्रा की गोली लगने से हुई मौत पर डाेरंडा थाना में अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज किया गया है.

वहीं लापरवाही बरतने के आरोप में एसएसपी ने बॉडीगार्ड दिलीप कुमार सिन्हा को निलंबित कर दिया है. पुलिस के अनुसार अगर बॉडीगार्ड ने सही तरीके से अपने कर्तव्य का पालन किया होता, तब शायद घटना नहीं होती. बॉडीगार्ड ने सुरक्षा की अनदेखी कर अत्येंद्र अनवेश मिश्रा को गोलियों से भरा मैगजीन भी दे दिया. इसलिए उसे निलंबित कर दिया गया.
उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जायेगी. इधर, पुलिस ने अत्येंद्र मिश्रा की मौत को लेकर डोरंडा थाना में अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज कर लिया है. चालक और बॉडीगार्ड के बयान को आरंभिक रूप से सही मानते हुए केस दर्ज किया गया है. पुलिस अधिकारियों ने चालक और बॉडीगार्ड का एक साथ और अलग-अलग कई बार बयान लिया. लेकिन वे अपने बयान पर डटे रहे.
घटना के कारणों को जानने तदाशा मिश्रा के घर पहुंची पुलिस
घटना के बाद स्थानीय थाना के कुछ लोग तदाशा मिश्रा के घर पहुंचे और घटना की जानकारी लेने की कोशिश की. पुलिस अधिकारियों को इस बात जानकारी मिली है कि अत्येंद्र ने मेडिकल की पढ़ाई अंतिम वर्ष में छोड़ दी थी. उसे हमेशा परिवार की ओर से मेडिकल की पढ़ाई पूरा करने के लिए कहा जाता था. लेकिन संभवत: उसकी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने की इच्छा नहीं थी.
बॉडीगार्ड ने कहा: गलती मेरी थी, जो पिस्टल दे दी, अब मैडम को क्या जवाब दूंगा
इधर, तदाशा मिश्रा के बेटे की मौत की जानकारी मिलने पर दिन भर सीनियर आइपीएस अधिकारियों का मेडिका अस्पताल में आना-जाना लगा रहा़ अत्येंद्र को मेडिका में इलाज के लिए भरती कराये जाने से पहले ही एसएसपी अनीश गुप्ता ने तत्काल वहां सिटी एसपी, सदर डीएसपी के अलावा सदर और बरियातू थाना प्रभारी को भेज दिया था. लेकिन अस्पताल के चिकित्सकों ने जब जांच के बाद बताया कि अत्येंद्र अनवेश मिश्रा की मौत अस्पताल लाने के दौरान रास्ते में ही हो गयी थी.
यह सुनकर सरकारी बॉडीगार्ड दिलीप कुमार सिन्हा घबरा गया. वह अस्पताल परिसर में ही चिल्ला-चिल्ला कर राेने लगा. वह कहने लगा : अब क्या होगा. मेरी ही गलती थी. अगर मैंने उन्हें पिस्टल देने से इनकार कर दिया होता, तो शायद ऐसा नहीं होता. मैं मैडम को क्या जवाब दूंगा. बॉडीगार्ड को रोता देख अन्य पुलिसकर्मियों ने उसे शांत कराया और अस्पताल परिसर से बाहर ले गये.
इसी बीच रांजी रेंज के डीआइजी एवी होमकर और अनीश गुप्ता ने बॉडीगार्ड और चालक का बयान लिया. इसी बीच कई सीनियर आइपीएस अधिकारी भी मेडिका अस्पताल पहुंचे. अस्पताल पहुंचने वालों में मुख्यालय डीजी पीआरके नायडू, एडीजी अनिल पाल्टा, एडीजी आरके मल्लिक, एडीजी प्रशांत सिंह, एडीजी मुरारी लाल मीणा, आइजी सुमन गुप्ता, आइजी आशीष बत्रा, डीआइजी साकेत सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारी शामिल थे.
अधिकािरयों ने सिटी एसपी और एसएसपी से मामले की जानकारी ली. कुछ आइपीएस अधिकारियों ने तदाशा मिश्रा से फोन पर संपर्क भी किया. मौत के बाद शव का पंचनामा कर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया. पोस्टमार्टम के दौरान भी आइजी रंजीत प्रसाद सहित अन्य पुलिस अधिकारी रिम्स में रहे.
शाम को तदाशा मिश्रा भी रांची पहुंच चुकी थी. लेकिन वह रिम्स पहुंच कर अपने बेटे का शव देखने की हिम्मत नहीं जुटा पायी. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस अधिकारियों ने शव को महिलौंग स्थित घर पहुंचा दिया.
एफएसएल की रिपोर्ट मिलने के बाद सुलझेगी मौत की गुत्थी
स्कॉर्पियो की जांच और शव को देखने से पुलिस अधिकारियों को प्रथमदृष्टया आत्महत्या के संकेत मिले हैं. पुलिस को आशंका है कि पिस्टल से गोली छाती में सटाकर मारी गयी थी. अगर कोई दुर्घटना या बॉडीगार्ड के हाथ से गोली चली होती, तब शरीर व पिस्टल के बीच दूरी होती. ऐसे में गोली संभवत: शरीर के आर-पार नहीं जाती.
लेकिन गोली छाती में छेद करते हुए पीछे से निकल गयी और गोली का पिलेट स्कॉर्पियो की सीट में फंस गया. यह स्थिति अमूमन तब होती है, जब कोई खुद से फायरिंग करता है. इधर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मृतक के अलावा बॉडीगार्ड और चालक का बयान लिया गया है.
दोनों ने अपने बयान में एक सामान बातें बतायी है. लेकिन पुलिस मामले में कोई लापरवाही बरतना नहीं चाहती. इसलिए पुलिस ने एफएसएल के सहयोग से मृतक के अलावा बॉडीगार्ड व चालक के हाथ का धोवन भी लिया है. एफएसएल की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगी कि गोली किसके हाथ से चली है.
बॉडीगार्ड की लापरवाही पर उठ रहे हैं सवाल
आइपीएस तदाशा मिश्रा के बेटे की मौत के बाद सरकारी बॉडीगार्ड दिलीप कुमार की लापरवाही पर भी सवाल उठने लगे हैं. अत्येंद्र की मौत बॉडीगार्ड के पिस्टल की गोली लगने से हुई है. दिलीप कुमार सिन्हा के बयान के अनुसार उससे अत्येंद्र मिश्रा ने पिस्टल देखने के लिए मांगी थी. उसने सुरक्षा के दृष्टिकोण से पिस्टल से मैगजीन निकाल कर अत्येंद्र को पिस्टल दे दिया.
जब पुलिस अफसरों ने पिस्टल देने का कारण पूछा, तब उसने बताया कि अत्येंद्र को हथियार के बारे में अच्छी जानकारी थी. उसने सिर्फ देखने के लिए पिस्टल मांगी थी. पिस्टल मांगने के दौरान उनका व्यवहार भी सामान्य था. इसलिए किसी अनहोनी की आशंका नहीं हुई. जब उन्होंने मैगजीन मांगा, तो बॉडीगार्ड ने उन्हें मैगजीन भी दे दिया. पुलिस वालों का कहना है कि मैगजीन देकर दिलीप कुमार सिन्हा ने गलती कर दी.
शव भुनेश्वर ले गये परिजन पुरी में होगा अंतिम संस्कार
नामकुम. गृह विभाग की विशेष सचिव तदाशा मिश्रा के बेटे अत्येंद्र मिश्रा के शव का पोस्टमार्टम शुक्रवार को रिम्स में हुआ. इसके बाद वहां से शाम छह बजे शव को महिलौंग स्थित तदाशा मिश्रा के आवास ले जाया गया. तब तक घर पर तदाशा मिश्रा भी भुवनेश्वर से पहुंच चुकी थी. साथ में अन्य परिजन भी थे.
मौके पर उन्हें ढांढस बंधाने गृह विभाग के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे, डीजीपी डीके पांडेय, होमगार्ड डीजी बीबी प्रधान सहित अन्य अधिकारी पहुंचे थे. तकरीबन आधे घंटे के बाद शव को सड़क मार्ग से भुवनेश्वर ले जाया गया. साथ में तदाशा मिश्रा और परिजनों के साथ पुलिसकर्मी भी गये़ आसपास के लोगों ने बताया कि अत्येंद्र का अंतिम संस्कार शनिवार को पुरी में किया जायेगा.
घटना से हतप्रभ थे लोग
बिरला सेंटोरियम के समीप रहनेवाले लोग इस घटना से हतप्रभ थे. उनके आवास पर पहुंचे कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि अत्येंद्र का बाहरी लोगों से घुलना-मिलना नहीं था. वह मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था, लेकिन वह यहां कम ही दिखाई देता था.
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