रांची : रिम्स कार्डियोलॉजी के लिए कैथलैब मशीन खरीदने में अभी चार महीने और लगेंगे

Updated at : 15 Oct 2018 8:44 AM (IST)
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रांची : रिम्स कार्डियोलॉजी के लिए कैथलैब मशीन खरीदने में अभी चार महीने और लगेंगे

रांची : रिम्स के सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के कार्डियाेलॉजी विंग में नयी कैथलैब मशीन आने में अभी चार माह और लगेंगे. नयी कैथलैब मशीन की खरीद के लिए अब तक निकाली गयी निविदा में हर बार एक ही कंपनी रुचि दिखा रही है. ऐसे में सिंगल टेंडर की वजह से मशीन की खरीद का मामला आगे […]

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रांची : रिम्स के सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के कार्डियाेलॉजी विंग में नयी कैथलैब मशीन आने में अभी चार माह और लगेंगे. नयी कैथलैब मशीन की खरीद के लिए अब तक निकाली गयी निविदा में हर बार एक ही कंपनी रुचि दिखा रही है.
ऐसे में सिंगल टेंडर की वजह से मशीन की खरीद का मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है. इसलिए रिम्स प्रबंधन निविदा शर्तों को सरल बनाने का विचार कर रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा कंपनियां उसमें शामिल हो सकें.
रिम्स प्रबंधन शीघ्र ही कार्डियोलॉजी के डॉक्टरों के साथ बैठक करेगा, जिसमें निविदा की शर्तों में बदलाव पर विचार किया जायेगा. इसके बाद नये सिरे से निविदा आमंत्रित की जायेगी. उम्मीद है कि दुर्गापूजा की छुट्टी के बाद यह प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी.
इधर, जानकार कहते हैं कि अगर रिम्स प्रबंधन ने पहले ही निविदा की शर्ताें को सरल कर दिया होता, तो अबतक मशीन की खरीद हो चुकी होती, लेकिन विभाग के उच्च अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को नहीं समझा. रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने यह भी कहा है कि परचेज कमेटी में नहीं होने के बावजूद मरीज हित में वे इस बार परचेज कमेटी की बैठक में शामिल होंगे और बाधाओं को दूर करने का प्रयास करेंगे.
तो नहीं हो पायेगा कोई काम : रिम्स के कार्डियोलॉजी विंग में कैथलैब मशीन करीब 10 साल पहले लगायी गयी थी, जो अपनी आयु पूरी कर चुकी. 13 अक्तूबर को इसका एएमसी (एनुल मेंटेनेंस कांट्रैक्ट) भी खत्म हो जायेगा. आशंका जतायी जा रही है कि अगर जल्द से जल्द नयी मशीन नहीं खरीदी गयी, तो रिम्स का कार्डियोलॉजी विभाग में न तो एंजियोग्राफी होगी और न ही एंजियोप्लास्टी. वहीं, पेसमेकर लगाने और बैलूनिंग की प्रक्रिया पूरी तरह बंद हो जायेगी.
एएमसी एक साल बढ़ाने की तैयारी शुरू : इधर, रिम्स प्रबंधन एएमसी को अगले साल तक बढ़ाने की तैयारी भी कर रहा है. रिम्स प्रबंधन का कहना है कि मशीन की खरीदारी में यह तय कर दिया जाता है कि एएमसी का समय किसी कारण से पूरा हो जाता है, तो भी वह मशीन के मेंटेनेंस का कार्य कंपनी नहीं रोक सकती है. ऐसा करने पर कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाता है.
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