झारखंड के 34 बच्चों को लुधियाना में जबरन रखने के मामले में दो अरेस्ट

Updated at : 02 Sep 2018 9:32 AM (IST)
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झारखंड के 34 बच्चों को लुधियाना में जबरन रखने के मामले में दो अरेस्ट

रांची, चाईबासा और खूंटी जिले के हैं बच्चे प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी को अभिभावकों को सुपुर्द किया जायेगा रांची : झारखंड के 34 बच्चों की तस्करी कर लुधियाना में जबरन रखे जाने के मामले में चाईबासा पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें लुधियाना के फुलनबॉल पखवाल रोड स्थित पेकियम मर्सी […]

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रांची, चाईबासा और खूंटी जिले के हैं बच्चे
प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी को अभिभावकों को सुपुर्द किया जायेगा
रांची : झारखंड के 34 बच्चों की तस्करी कर लुधियाना में जबरन रखे जाने के मामले में चाईबासा पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें लुधियाना के फुलनबॉल पखवाल रोड स्थित पेकियम मर्सी क्रॉस होम के कर्ताधर्ता सत्येंद्र प्रसाद मोसेस और जुनूल लोंगा शामिल है.
56 वर्षीय मोसेस मूल रूप से बिहार के गया जिले के महकार थाना अंतर्गत केउड़ी गांव का निवासी है. जबकि लोंगा चाईबासा जिले के गुदड़ी थाना क्षेत्र स्थित किचिंदा का निवासी है. लोंगा पूर्व में उसी होम में रहकर पढ़ाई करता था.
दोनों के गिरफ्तारी की पुष्टि चाईबासा एसपी क्रांति कुमार गड़देशी ने की है. अब तक 34 में से 15 बच्चों से पुलिस ने पूछताछ की है. इसमें यह बात सामने आयी है कि होम में बच्चों से प्रेयर कराया जाता था. साथ ही उन्हें बाइबिल का पाठ भी पढ़ाया जाता था. बड़े बच्चे वहां पर खाना बनाते थे. जबकि छोटे बच्चों को पब्लिक हाइस्कूल पढ़ाई के लिए भेजा जाता था. वहां पर बच्चों का क्लास में दाखिला उनकी हाइट के हिसाब से होता था.
20 बच्चों को लुधियाना ले गया था जुनूल लोंगा : जुनूल लोंगा ने पूछताछ में इस बात को कबूल किया है कि वह चाईबासा से 20 बच्चों को लुधियाना ले गया था. इसके लिए उसने अभिभावकों को सब्जबाग दिखाये थे. इन 20 में से 15 बच्चों से पुलिस ने अब तक पूछताछ की है. इसमें यह बात सामने आयी है कि लुधियाना के हाेम में तीन कमरों में सभी 34 बच्चों को रखा गया था. इनमें चाईबासा, खूंटी और रांची के बच्चे शामिल थे.
मामले में जब संस्था को कार्रवाई की भनक लगी तो आनन-फानन में 30 बच्चों को संचालक सत्येंद्र मोसेस द्वारा भगा दिया गया. जबकि खूंटी व रांची के बुंडू के चार बच्चे वहीं रहे गये थे. उन्हें भी चाईबासा ले आया गया है. सभी को प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके अभिभावकों को सुपुर्द किया जायेगा.
12 साल से बिना निबंधन के ही चल रही थी संस्था : पूछताछ में सत्येंद्र प्रसाद मोसेस ने यह स्वीकार किया है कि उसने अपनी दूसरी पत्नी की मां के नाम पर पेकियम मर्सी क्रॉस होम खोला था. 2006 तक संस्था निबंधित थी. इसके बाद बिना निबंधन के ही यह संस्था चल रही थी. वहां पर बच्चों को सही तरीके से नहीं रखा गया था. खाने-पीने व मेडिकल की उचित सुविधा वहां पर नहीं थी. अभिभावकाें को उनके बच्चों से दूर रखा गया था.
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