संसाधन और आदिवासी-विस्थापितों पर ध्यान देने की है जरूरत : भाजपा

Updated at : 03 Aug 2018 5:29 AM (IST)
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संसाधन और आदिवासी-विस्थापितों पर ध्यान देने की है जरूरत : भाजपा

15वें वित्त आयोग के समक्ष सत्ताधारी दल भाजपा की ओर से महामंत्री दीपक प्रकाश और उपाध्यक्ष प्रदीप वर्मा ने पार्टी का पक्ष रखा. पार्टी की ओर से 11 सूत्री मांग पत्र रखा गया. कहा गया कि झारखंड असीम संभावनाओं का राज्य है. इसकी रत्नगर्भा भूमि को प्रकृति ने मुक्तहस्त से सजाया और संवारा है. जिस […]

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15वें वित्त आयोग के समक्ष सत्ताधारी दल भाजपा की ओर से महामंत्री दीपक प्रकाश और उपाध्यक्ष प्रदीप वर्मा ने पार्टी का पक्ष रखा. पार्टी की ओर से 11 सूत्री मांग पत्र रखा गया. कहा गया कि झारखंड असीम संभावनाओं का राज्य है.
इसकी रत्नगर्भा भूमि को प्रकृति ने मुक्तहस्त से सजाया और संवारा है. जिस प्रकार से देश के सर्वांगीण विकास एवं आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यहां की खनिज संपदा का दोहन होता रहा है, उस अनुपात में राज्य में मूलभूत सुविधाओं के विकास का कार्य नहीं हो सका है.
वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद वर्ष 2014 तक राज्य में 9 सरकारें आयी और 3 बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ. राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य की प्रगति अपेक्षाकृत कम हुई. वर्ष 2014 से राजनीतिक स्थिरता आयी है और हमारी प्रगति तेज हुई है. इसमें वित्त आयोग से सहयोग की जरूरत है, जिससे राज्य का और तेजी से विकास हो सके.
भाजपा की ओर से दिये गये ज्ञापन में कहा गया है कि वित्त आयोग राज्य में वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को सरल करते हुए विकास कार्यों के लिए भूमि की उपलब्धता पर समुचित ध्यान दे. राज्य में 27 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजातियों की है, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहतर करना आवश्यक है.
खनिज की उपलब्धता के आधार पर यहां वृहत उद्योग एवं खनन कंपनियां कार्यरत हैं, लेकिन ये कंपनियां यहां के आधारभूत संरचना पर अत्यधिक दबाव तो डालती ही हैं. साथ ही जल, जंगल एवं जमीन का विस्थापन भी करती है.
केंद्र सरकार को पुनर्वास के लिए राज्य सरकार को पर्याप्त संसाधन की व्यवस्था करनी चाहिए. इन कंपनियों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सीमित हैं. इन सभी के कारण यहां की जनता गरीब एवं कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं.
70 प्रतिशत जनता कृषि पर आधारित है. सिंचाई की बड़ी परियोजना को पूरा करने के लिए संसाधन दें. राज्य के 24 में से 19 जिले उग्रवाद प्रभावित हैं. गत वर्षों में उग्रवादी घटनाओं को काफी नियंत्रित भी किया गया है, लेकिन राज्य की पुलिस प्रशासन को और चुस्त-दुरुस्त तथा तकनीकी रूप से सक्षम एवं साधन संपन्न बनाने के लिए भी संसाधन की आवश्यकता है. रेल नेटवर्क को बढ़ाने में सहयोग किया जाये.
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