रांची : मिशनरी ऑफ चैरिटी को बदनाम किया जा रहा : डॉ रामेश्वर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Jul 2018 8:14 AM
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रांची : अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष सह पूर्व आइपीएस डॉ रामेश्वर उरांव ने शुक्रवार को मिशनरीज अाॅफ चैरिटी के निर्मल हृदय केंद्र जाकर मामले की जानकारी ली. बाद में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एक घटना हुई है, जिसका अनुसंधान होना चाहिए. पर इस पूरे प्रकरण में मिशनरी ऑफ चैरिटी को बदनाम किया […]
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रांची : अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष सह पूर्व आइपीएस डॉ रामेश्वर उरांव ने शुक्रवार को मिशनरीज अाॅफ चैरिटी के निर्मल हृदय केंद्र जाकर मामले की जानकारी ली. बाद में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एक घटना हुई है, जिसका अनुसंधान होना चाहिए. पर इस पूरे प्रकरण में मिशनरी ऑफ चैरिटी को बदनाम किया जा रहा है.
मीडिया इसकी खबरों से भरा है और स्टेट मशीनरी द्वारा ऐसा रंग दिया जा रहा है जैसे मिशनरी ऑफ चैरिटी सिर्फ गोरखधंधे में लगी है. अनब्याही माताओं को रखते हैं, बच्चा पैदा कराते हैं, बच्चा बेच देते हैं और मुनाफा कमाते हैं.
इससे पूर्व ऐसी कोई घटना नहीं हुई है. पुलिस व राज्य सरकार को देखना चाहिए कि चर्च कई तरह की संस्थाएं चलाता है. इनकी सेवाओं को भूल कर राज्य सरकार कह रही है कि बस यही सत्य है कि मिशन के लोग, चर्च के लोग, क्रिश्चियन लोग पकड़े गये हैं. ये इसी तरह की धांधली करते हैं. इसे तबाह कर दो, तंग कर दो. मुझे यही नीयत लगती है.
उन्होंने कहा कि इस संस्था में अनब्याही माताओं को रखा गया था. जब बच्चे की डिलीवरी हो जाती है, तो 2015 के कानून के अनुसार बच्चों को सीडब्ल्यूसी के पास जमा करना है.
यह काम सिस्टर्स का नहीं, बल्कि बच्चे की माता या उसके गार्जियन करते हैं. इस मामले में करिश्मा ने सरकारी (सदर) अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया. वहां की एक गार्ड मधु देवी और निर्मल हृदय की गार्ड अनिमा इंदवार को केयर टेकर के रूप में रखा गया था. राशि (जच्चा का बदला हुआ नाम) बोली कि उसका कजिन, भाई आ रहा है, जो बच्चे को सीडब्ल्यूसी के पास जमा कर देगा. सिस्टर्स को विश्वास था कि बच्चा जमा कर दिया जायेगा. पर लगता है कि उसने बच्चा जमा नहीं किया.
यह प्रतीत होता है कि सदर अस्पताल की गार्ड ने उत्तर प्रदेश के अग्रवाल परिवार से कोई डील कर लिया. वहां से परिवार आया और बच्चे को ले गया. मुझे बताया गया है कि इसके बाद राशि ने हल्ला मचाना शुरू किया कि बच्चा देना है, क्योंकि रख नहीं पायेंगे, पर आसपास के किसी को देंगे, ताकि कभी- कभी जाकर देखभाल कर सके.
इसी के बाद सीडब्ल्यूसी को पता चला और जांच हुई. गिरफ्तार सिस्टर कोंसीलिया द्वारा 164 के तहत बयान पर उन्होंने कहा कि वह उम्रदराज हैं और सदमे की स्थिति में है़ं 164 के तहत बयान होता है, पर कई लोग रिट्रैक्ट कर जाते हैं. ऐसा दबाव में बयान देने के कारण होता है. देश में इसके एक नहीं, हजारों नहीं, लाखों उदाहरण हैं. इसमें प्रोपर इंवेस्टिगेशन की जरूरत है. झाविमो नेता बंधु तिर्की और कांग्रेस के प्रदीप बलमुचू भी मिशनरीज ऑफ चैरिटी के जेल रोड स्थित केंद्र निर्मल हृदय गये़ वहां संबंधित लोगों से बातचीत कर मामले की जानकारी ली़
पुलिस पर भरोसा नहीं है, कोचांग मामले की सीबीआइ जांच होनी चाहिए
उन्होंने कहा कि खूंटी मामले में सीबीआइ जांच जरूरी है. मैं खुद पुलिस अफसर रहा हूं पर मुझे पुलिस पर भरोसा नहीं है. इसलिए नहीं है क्योंकि वह फादर स्कूल में पढ़ाते थे, महिला शिक्षिकाएं थी, जो वहां पढ़ाती थी़ं
इन सबको आरोपी बनाया जा रहा है. लड़कियां वहां नाटक प्रस्तुत करने गयी थीं, उन्हें वहां कोई ले गया था, जबकि कोचांग अशांत इलाका है. शर्मा नाम का व्यक्ति उन्हें कोचांग क्यों ले गया?
कोई किससे पूछ कर ले गया? और लड़कियों को क्यों सौंप दिया? शर्मा द्वारा, एनजीओ द्वारा लड़कियों को सौंपा गया है़ यदि वह उस अशांत इलाके में नहीं ले जाता, तो इस तरह की घटना नहीं होती. लड़कियां स्कूल में गयी, तो उधर से अपराधी आ गये, किडनैप कर ले गये. यदि मैं एसपी होता, तो शिक्षकों को गवाह बनाता.
जांच प्रक्रिया पर उठाये सवाल, डीजीपी को सौंपा पत्र
रामेश्वर उरांव ने शुक्रवार की शाम को डीजीपी डीके पांडेय से मुलाकात कर मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मामले में पुलिस द्वारा किये जा रहे अनुसंधान पर सवाल खड़े किये हैं.
उन्हें सामाजिक व कानूनी पहलू का जिक्र करते हुए कहा है कि क्या कोई मां-बाप अविवाहित बच्ची के बच्चे पैदा होने की जानकारी बताना चाहेंगे क्या? क्या कोई अविवाहित यह बताना चाहेगी कि वह गर्भवती है़, बच्ची को जन्म दी है.
क्या हमारा समाज इतना परिपक्व है कि वह इस तरह की बच्ची को स्वीकार करेगा़ जाने-अनजाने में अगर रेप पीड़िता के नाम का खुलासा होता है, तो यह भादवि की धारा 228ए के तहत दंडनीय होता है़ पुलिस महकमा में वर्षों गुजारने के बाद मुझे यह कहना पड़ रहा है कि जांच में पुलिस जिस तरह से संवेदनहीनता दर्शा रही है, वह अफसोसजनक है. मामले में अनुसंधान भी सही ढंग से नहीं किया जा रहा है़
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